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जर्नलिस्ट की डायरी- भाग-2 : मैंने अपने जीवन काल में कभी ऐसा क्रूर समय नहीं देखा..!

अब तो रहम कर दे मेरे मौला..! (कोरोना आपदा काल – दूसरी लहर) मैंने अपने जीवन काल में कभी ऐसा क्रूर समय और अमानवीय सोच नहीं देखी-कि अस्पतालों के बाहर…

मोहम्मद मुस्तफा : एक फेरीवाले से सिंगापुर के बड़े बिजनेस एंपायर बनने तक का सफ़र

माटी के लाल की तलाश… मोहम्मद मुस्तफा : एक फेरीवाले से सिंगापुर के बड़े बिजनेस एंपायर बनने तक का सफ़र…. एक अद्भुत.. अविस्मरणीय.. और बेमिसाल उदाहरण है @ अरविंद है…

पहल : झारखंड की सोरेन सरकार बुजुर्ग और बीमार कलाकारों को देगी हर महीने 4 हजार की पेंशन

  झारखंड की सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. राज्य के बीमार और बुजुर्ग कलाकारों को, जो आर्थिक मुश्किलों से गुजर रहे हैं या जिन्हें सहायता की जरूरत है,…

जिंदगी जीरो किमी पर है.. इसका आनंद लें..

– रमेश पराशर की वाल से बात ज्यादा पुरानी नहीं है। एक सीनियर सिटिज़न मेरी क्लीनिक मे दिखाने आये। कुछ सामान्य सी शिकायतें थीं जो अमूमन उम्रशुदा लोगों को हो…

बदलाव : मेरा गांव बदल रहा है.. मेरा देस बदल रहा है…!

@अरविन्द सिंह गाँव अब गाँव नहीं रहें, उसकी ठेठ पहचान,गंवईपन,भदेसपन और लोक मर्यादा को वैश्वीकरण की आंधी ने उखाड़ फेंका है. गांव कभी गंभीर था, उसका सामुदायिक जीवन, लोकपर्व और…

सीमा की लकीर तोड़ देना और उन्हें उठा कर अँकवार में भर कर मनमाफिक रो लेना..

–चंचल आगे नेपाल है । हम नेपाल से मोहब्बत करते हैं,जैसे अपने मुल्क भारत से । पाकिस्तान और बांग्ला देश से भी यही रिश्ता है । वजह केवल इंसानी तमीज…

काश! मानसिक गुलामी और तर्कहीन मूढ़ताओं से लड़ पाता आजमगढ…!

@ अरविंद सिंह मित्रों! मेरे शहर के कुछ लोग पहले तो एक चिकित्सक को आजमगढ़ का वरदान और भगवान साबित करने की कोशिश कर रहे थे, और उसके अस्पताल को…

देवभूमि में नये एजुकेशन बोर्ड ‘भारतीय शिक्षा परिषद’ का पाठ्यक्रम तैयार कर रहे हैं..एनपी सिंह

‌ @ अरविंद सिंह 2019 के नवंबर का समय था. आजमगढ़ के राजनीतिक और सामाजिक हलचल के हृदय स्थल नेहरू हाल सभागार में ‘शार्प रिपोर्टर’ के ‘गांधी विशेषांक’ का लोकार्पण…

बिरसा मुंडा पुण्यतिथि : जन जातीय आंदोलन का नायक

मुंडा जनजातियों ने अंग्रेजों की आदिवासी भूमि विरोधी नीति के कारण कई बार संघर्ष किया मगर ये संघर्ष कभी भी अपने मुकाम पे नहीं पहुंच सका था।कारण आदिवासी समाज में…

पत्रकारिता दिवस विशेष : हिंदी के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति ठीक नहीं होगा?

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर –अरविंद कुमार सिंह हाल में विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी बोर्ड का अध्यक्ष भारत के स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन को बनाया गया तो सोशल मीडिया पर…

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