जर्नलिस्ट की डायरी- भाग-2 : मैंने अपने जीवन काल में कभी ऐसा क्रूर समय नहीं देखा..!

अब तो रहम कर दे मेरे मौला..! (कोरोना आपदा काल – दूसरी लहर) मैंने अपने जीवन काल में कभी ऐसा क्रूर समय और अमानवीय सोच नहीं देखी-कि अस्पतालों के बाहर…

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नानक ने 28 हजार किलोमीटर की पैदल यात्राएं की थीं..

पंकज चतुर्वेदी बाबा नानक विश्व की ऐसी विलक्षण हस्ती थे, जिन्होंने दुनिया के धर्मों, निरंकार ईश्वर खोज, जाति-पाति व अंध विश्वास के अंत के इरादे से 24 साल तक दो…

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सड़क पर उतरकर सराय इनायत में पिटे पत्रकारों को दिलाउंगी न्याय-रिचा सिंह

सौरभ सिंह सोमवंशी प्रयागराज के सराय इनायत थाने में पुलिस कर्मियों के द्वारा पत्रकारों और एक पत्रकार की 8 माह की गर्भवती पत्नी को पीटे जाने का मामला समाजवादी पार्टी…

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नयी शिक्षा नीति के तहत…

आजादी एक ख्याल है ।आइए इस बार अपनी आजादी मनाएं । मुदित मन से । स्वफूर्त उल्लास से । अगली पीढ़ी के मन मे सवाल उठे । उसका उत्तर दीजिये…

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सीमा की लकीर तोड़ देना और उन्हें उठा कर अँकवार में भर कर मनमाफिक रो लेना..

–चंचल आगे नेपाल है । हम नेपाल से मोहब्बत करते हैं,जैसे अपने मुल्क भारत से । पाकिस्तान और बांग्ला देश से भी यही रिश्ता है । वजह केवल इंसानी तमीज…

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पलायन : त्रासदियां सबसे पहले कमज़ोर-वर्ग का शिकार करती हैं..!

पलायन … मज़दूरों के पलायन पर बहुत बातें कही जा चुकी हैं। जिन्होंने कही हैं, वो स्वयं पलायन नहीं कर रहे थे, और जो कर रहे थे, उन तक वे…

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पितृशोक : कर्मयोगी- लौहपुरुष और हठयोगी

कर्मयोगी- लौहपुरुष और हठयोग 11 जनवरी 1909 : भारत के लौह पुरुष कहे जाने वाले सरदार बल्लभ भाई पटेल पेशे से वकील थे। एक बार उनकी पत्नी बहुत ज्यादा बीमार…

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विचार मंथन : लॉकडाउन की पत्रकारिता या पत्रकारिता का लॉकडाउन!

प्रदीप कुमार ●●●●●●● तालाबन्दी के दूसरे दौर का 5वाँ दिन । आज भी सुबह नींद जल्दी खुल गई । लेकिन आंखें मींचे बिस्तर पर पड़ा करवटें बदल रहा हूँ ।…

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अर्थशास्त्र : क्या मोदी जी इन अर्थशास्त्रियों की बात सुनेंगे?

–लालबहादुर सिंह अर्थशास्त्र की दुनिया में भारतीय मूल के 3 सबसे बड़े नामों- नोबेल पुरस्कृत अमर्त्य सेन व अभिजीत बनर्जी तथा RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने एक संयुक्त…

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Lockdown के बाद : बाजारों की रौनक़ घटेगी और मरघटों की बढ़ेगी..?

-Arvind Kumar Singh ◆भविष्य का भारत कैसा होगा? ◆जहाँ हर इंसान भविष्य की एक लाश बनने के भय में आज जिंदा लाश बन चुका है। ◆कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के…

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