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माटी के लाल ; वीएन राय : जिसने बतौर पुलिस अधिकारी पुलिस के अमानुषिक कृत्य पर धारदार क़लम चलाया..!

माटी के लाल आज़मियों की तलाश में.. ० महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के वीसी रह चुके हैं० डीजीपी से सेवानिवृत्त और राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित० ‘शहर में कर्फ्यू’…

पत्रकार और कवि सुभाष राय को पहला देवेन्द्र कुमार स्मृति सम्मान

लखनऊ/ गोरखपुर। प्रेमचंद साहित्य संस्थान गोरखपुर द्वारा हिंदी के विलक्षण कवि देवेंद्र कुमार की स्मृति में घोषित देवेंद्र कुमार स्मृति कविता सम्मान कवि-लेखक-पत्रकार सुभाष राय को दिया जाएगा। यह जानकारी…

पुण्यतिथि पर विशेष : धारा के विरुद्ध खड़े होने की आदत चंद्रशेखर को यंग टर्क बना देती है..

8 जुलाई । आज एक ‘समाजवादी ‘ चंद्रशेखर जी की पूर्णतिथि है, गो कि इस अजीम शख्सियत के साथ कई और तमगे लटके हैं, मसलन ‘ प्रधान मंत्री ‘ ‘जनतापार्टी…

माटी के लाल: विष्णुदेव गुप्त : जिसने पूरा जीवन समाजवादी आंदोलन के लिए कुर्बान कर दिया..

माटी के लाल आजमगढ़ियों की तलाश में.. ० महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और आजादी के नायक थे० सालो जेल में बिताए लेकिन अपने उसूलों से कभी समझौता नहीं किया.० विधायक…

दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे दिलीप साहब

●श्याम सुंदर भाटिया काश, सोशल मीडिया में सेहत से जुड़ी उनकी यह ख़बर भी दीगर न्यूज़ की मानिंद महज अफवाह होती, लेकिन इस बार बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार…

माटी के लाल : मुखराम सिंह होने का मतलब एक महान आंचलिक चितेरा और सिंह गर्जना वाला कलमकार..

माटी के लाल आजमगढि़यों की तलाश में.. ० ‘बिसराम के विरहों’ का संकलन और संपादन किया० वेस्ली इंटरमीडिएट कालेज में हिंदी के प्रकांड विद्वान थे० 1983 आजमगढ़ कचहरी कांड की…

माटी के लाल : रामाधीन सिंह : चलती-फिरती पूरी एक पाठशाला हैं..जिससे हम रोज़ सिखते हैं!

माटी के लाल आजमगढि़यों की तलाश में.. ० उत्तर प्रदेश का पहला मीसा बंदी, 4 बरस से अधिक समय भारत के जेलों में बिताया.० पूरब के आक्सफोर्ड इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र…

माटी के लाल : जिस धरमपुर की ‘मुर्दहिया’ को छोड़कर भागे थे, उसी मुर्दहिया’ ने प्रोफेसर तुलसीराम को कालजयी साहित्यकार बना दिया..

माटी के लाल आजमगढि़यों की तलाश में.. ० गरीबी में पैदा हुए, अभाव में पले और प्रभाव में साहित्यकार बन गयें० जेएनयू के प्रोफेसर ने ‘मुर्दहिया’ को पूर्वी उत्तर प्रदेश…

माटी के लाल : सोशलिस्ट विजयनारायण ने 1962 में लोहिया का इन्टरव्यू किया था

माटी के लाल आजमगढियों की तलाश में.. 1962 में लोहिया का इन्टरव्यू करने वाले विजय नारायण, राजनारायण के साथ बनारस और तिहाड़ जेल गए एकमात्र बनारसी आंदोलनकारी हैं ० पूर्व…

माटी के लाल : राष्ट्रभाषा आंदोलन का नायक, जिसका एक पैम्फलेट भी ‘डॉक्टरेट उपाधि’ के लिए पर्याप्त था..

माटी के लाल आजमगढियों की तलाश में.. ० प्रख्यात साहित्यकार हजारी प्रसाद द्विवेदी और केशव प्रसाद मिश्र की निष्पत्तियों पर भी सवाल खड़ा कर देनें की अदभुत क्षमता थी.० प्रख्यात…

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