अपनी सारी जिंदगी साम्प्रदायिक सद्भावना के काम के लिए जिसने लगा दी..

पंकज चतुर्वेदी की वाल से
आपसी भाई चारे को बढ़ावा देने, संस्कृतियों से विमर्श ओर अतीत के वे खूबसूरत पल जो सह-जीवन व धर्मों के सामंजस्य की बात करते हैं को सहेज कर प्रेम की खुशबु से नफरत करने वालों ने फैसल के साथ जो किया , वह हम, आप सभी को सोचने को मजबूर करता है |
48 वर्षीय फैसल खान ने अपनी सारी जिंदगी साम्प्रदायिक सद्भावना के काम के लिए लगा दी है। फैसल खान अयोध्या के रामजानकी मंदिर, दुराही कुआं, सरजू कुंज स्थित सर्व धर्म सद्भाव केन्द्र न्यास के न्यासी भी हैं। आचार्य युगल किशोर शास्त्री के इस मंदिर को एक सर्व धर्म सद्भाव केन्द्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इस मंदिर में फैसल खान ने कई बार आ कर नमाज़ अदा ही है और यहां किसी को कोई आपत्ति नहीं होती।
लोगों के बीच में शांति और सौहार्द बना रहे इसके लिए न जाने उन्होंने कितनी यात्राएं की हैं, सिर्फ भारत के अंदर ही नहीं बल्कि भारत से पाकिस्तान के बीच भी। फैसल खान अगर कुरान की आयतें पढ़ते हैं तो उतनी ही आसानी से रामचरितमानस की चौपाई भी पढ़ते हैं। वे मस्जिद में नमाज़ अदा करते हैं, तो मंदिर में प्रसाद ग्रहण कर पुजारी से आशिर्वाद भी लेते हैं। पिछले वर्ष उन्होंने अयोध्या में सरयू आरती में भी हिस्सा लिया। 2018 में जाने-माने संत मुरारी बापू ने उन्हें अपने स्थान महुआ बुलाकर सद्भावना पर्व पर पुरस्कार दिया और अपनी सभा में बोलने का मौका भी दिया।
खुदाई खिदमतगार या फैसल की भावना बेहद पवित्र थी लेकिन उनके सोशल मिडिया पर लगया गए फोटो ने उपद्रवियों को अवसर दे दिया .
सी ए ए एन आर सी आन्दोलन की बानगी हमारे सामने हैं , लोग आठ महीने से जेल में हैं, शारीरिक प्रताडना झेली , जेल में रहना बहुत महंगा है , उससे महंगा है अदालतों के खर्चे — उस आंदोलन के अनुभव मेरे पास हैं – शाहीन बाग के लाख की भीड़ देख कर भाषण देने के लिए लालायित लोग अब इस लिए चुप बैठे हैं कि कहानी उनका नाम न आ जाए .
ज़रा सोचें जो रिक्शा चला कर घर चलाता था, वह जेल चला गया तो उनका घर कैसे चल रहा होगा, यह जमीनी हकीकत है कि शिव विहार इलाके में मुस्लिम परिवार लागत से आधे दाम पर अपने मकान बेच कर जा रहे हैं — लोनी की झुग्गी बस्तियों में — उधर मकान खरीदने को मिश्र-रावत गिरोह चन्दा जमा कर पैसे चुका रहा है .
फैसल व साथियों के जेल जाने पर आपके नारों से कुछ नहीं होगा- हाथरस कांड में चार युवकों को पुलिस ने दंगे की साजिश में बंद कर ही दिया ओर वे एक महीने से जेल में हैं .
भीमा कोरेगांव , सी ए ए आन्दोलन, दिल्ली दंगा , हाथरस आंदोलन की तर्ज पर फैसल के मामले में भी पुलिस विदेशी फंडिंग जैसे किस्से गढ़ रही हैं ताकि उनकी जमानत ना हो सके — यह लड़ाई लंबी हैं — इस समय भावनाओं पर नियंत्रण रखना जरुरी है — ए एम् यू में जुलुस गैर जरुरी था ओर मंदिर में नमाज पढ़ने का सद कार्य भी — .
इस समय जरुरी है कि आप देश के लिए काम करते समय यह ध्यान में रखें कि शैतान की आँख आपकी एक चूक पर है — थोड़ा सा पब्लिसिटी से बच लें —- धार्मिक सथानों की यात्रा पर भी परहेज कर लें —- संवाद में सतर्कता जरूरी है
आज जरुरी है कि हर शहर में वकीलों की एक ऐसी टीम जो निशुल्क, संविधान की भावना के साथ काम कर सके .
हर शहर में ऐसे स्वयं सेवकों की जो ऐसे हालात पर सजग रहें .
यदि दिल से खुल कर साथ देने की लियाकत न हो तो केवल फेसबुक पर क्रांति न करें

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