• Mon. Nov 30th, 2020

शिब्ली डे : जिन्होंने आज़मगढ़ के गुमनाम ख़ित्ते को इल्म की दुनिया में-यूनान-ओ-बग़दाद बना दिया..

ByArvind Singh

Nov 18, 2020

एक अज़ीम शख़्सियत “अल्लाम शिबली नोमानी” जिन्होंने आज़मगढ़ के गुमनाम ख़ित्ते को इल्म की दुनिया में हम रुतब-ए-यूनान-ओ-बग़दाद बना दिया।

दारुलमुसन्नफ़ीन शिबली एकेडमी आप के लिए मोहताज-ए-तआरुफ़ नहीं है, बैतुल हिक्मत बग़दाद और दायरा-तुल-म’आरिफ़ हैदराबाद के बाद आलम-ए-इस्लाम का ये तीसरा माया नाज़ इल्मी व तहक़ीक़ी इदार’ह है, जिसकी दाग़ बेल सन् 1914 ई. में “अल्लमा शिबली नोमानी” ने डाली और जिसकी अज़ीमुश्शान इल्मी कारनामों की बदौलत आज़मगढ़ का गुमनाम ख़ित्ता हम रुतब-ए-यूनान-ओ-बग़दाद बन गया।

इस इदार’ह ने इस्लामी उलोम-ओ-फ़नोन, सीरत-ओ-तारीख़,कलाम-ओ-अक़ायद और फ़लसफ़ा व अदब वगैरह मतनू’अ (विविध) मौज़ूआत पर दौ सौ किताबें अपने रुफ़का से लिखवा कर शाये’अ कीं, जिनको इल्मी हलक़ों में सनद ए’तेबार हासिल है ।

सीरत रसूल अकरम ﷺ के मौजू’अ पर सात ज़ख़ीम (मोटी) जिलदों में एक इंसाइक्लोपीडिया तैयार किया जिसने दानिशवरान-ए-मग़रिब के जहल-ओ-त’अस्सुब की क़ल’ई खोलकर रख दी ।
सहाब-ए-केराम रज़ि. ताबे’ईन-ओ-तब’अ ताबे’ईन-ए-अज़ाम रह. और अहल-ए-किताब सहाबा रज़ि. व ताबे’ईन की मुसतनद सवानेह (प्रामाणिक पुस्तक) उर्दू ज़बान में सबसे पहले इसी इदारा ने पेश की और इसमें ब’आज़ (कुछ) ऐसे गोशे (कोने,हिस्से) उजागर किए जिनसे अरबी ज़बान का वसी’अ सरमाया भी ख़ाली है ।
तारीख़-ए-इस्लाम व मुसलमान-ए-आलम और तारीख़-ए-हिन्द के मौजू’अ (विषय) पर दर्जनों तस़ानीफ़ (पुस्तकों) का मुरत्तब (सेटअप) करके पेश किया, जिसने उर्दू ख्वां तबक़ा में इल्म तारीख़ की अहमियत और उसकी ग़ैर म’अमूली ज़रूरत का श’ऊर (चेतना) पैदा किया ।

सन् 1982 ई. में इस्लाम और मुसतशरेक़ीन (पूरबी इलाक़ा ،مشرق وسطی) के उनवान से एक बैन-उल-अक़वामी कांफ्रेंस अपने अहाता में मुन’अक़िद (आयोजित) की जिसके ज़रिए मुसतशरेक़ीन युरोप की वसीसा कारियों का पर्दा चाक़ करने की एक ख़ुसूसी मुहिम का आग़ाज़ हुआ ।
इस सिलसिला में तनहा दारुल-मुसन्नफ़ीन का सरमाया कई ज़ख़ीम जिलदों में यकजा (इकठ्ठा) किया गया, वतन अज़ीज़ ‘हिंदुस्तान’ में मुसलमानों की दीनी व इल्मी सरगरमियों के त’आरुफ़ के लिए मुफ़स्सरीन (दुभाषियों, टिप्पणीकारों) और मुहद्दस़ीन-ए-हिन्द पर किताबें शाये’अ कीं ।
हिंदुस्तान के मुस्लिम हुक्मरानों के कारनामों पर मुसतनद तारीख़ी लिटरेचर फ़राहम (प्रदान) किया, इसके अलावा कई दूसरे मौज़ू’आत पर दारुल-मुसन्नफ़ीन के रुफ़क़ा (साथियों) मुसलसल तहक़ीक़-ओ-तस़नीफ़ के काम में लगे हुए हैं ।
इदारा का तरजुमान-ए-माहनामा ” म’आरिफ़ ” सन् 1916 ई. से मुतवातिर बिला किसी इनकेता’अ के शाये’अ हो रहा है, फिल्लाहिलहम्द !
मोहतरम मन !
दारुल-मुसन्नफ़ीन के इल्मी व तहक़ीक़ी मनसूबों की तकमील के लिए आज़ादी-ए-हिन्द से क़ब्ल भोपाल और हैदराबाद की फ़याज़ाना सरपरस्ती हासिल थी।
मुल्क की आज़ादी फिर तक़सीम-ए-हिन्द के अलमिया ने सूरत-ए-हाल को यकसर बदल दिया, चुनान’चह दारुल-मुसन्नफ़ीन और उस जैसे दूसरे इल्मी मराकिज़ जो यकसोई के साथ इल्म व तहक़ीक़ में मस़रूफ़ थे, सख़्त आज़माइश में पड़ गये।
इसी सूरत-ए-हाल को देखते हुए 1962 ई. में डा. ज़ाकिर हुसैन मरहूम साबिक़ सदर-ए-जमहूरिय-ए-हिन्द ने पार्लियामेंट में एक एक्ट मंज़ूर करवा कर इन इदारों को हुकूमत-ए-हिन्द के ज़ेर-ए-इंतेज़ाम चलाए जाने की पेशकश की।
ख़ुदा बख़्श लाइब्रेरी पटना और रज़ा लाइब्रेरी रामपुर ने इस एक्ट के मुताबिक़ हुकूमत से इलहाक़ को मंजूर कर लिया मगर दारुलमुसन्नफ़ीन के अरबाब-ए-इंतेज़ाम ने माली मुश्किलात के बा’वजूद महज़ इस बिना पर इस पेशकश को क़ुबूल करने से एतेराज़ किया कि इस इदारा के ज़रिया आज़ादाना तौर पर इस्लामी उलोम-ओ-फ़नोन की ख़िदमत का जो सिलसिला अल्लामा शिबली नोमानी के दौर से चला आ रहा था वह मो’अत्तल होकर रह जाता और इस इदारा की शिनाख़्त यकसर तब्दील हो जाती।
अल्हमदुलिल्लाह… दारुलमुसन्नफ़ीन ने अपनी ख़ुद मुख़तारी को बरक़रार रखते हुए एक सदी का तवील अरसा बसर किया है और ये इस के कारकुनान और असहाब-ए-क़लम की अज़ीमत है कि उन्होंने क़ना’अत के साथ अल्लामा शिबली के मिशन को फ़’आल और तेज़ग़ाम (सक्रिय और सक्रिय) रक्खा।
इस इदारा के ज़रा-ए-आमदनी किताबों की फ़रोख़्त और असहाब-ए-ख़ैर के अ’तय्यात तक महदूद हैं।
एक ऐसा इदारा जो दस एकड़ से ज़ा’एद रक़बा पर मुश्तमिल हो, उसके लिए यह आमदनी कहां तक किफ़ा’यत कर सकती है।
अमर-ए-वाक़ेया यह है जिस काम को हुकूमतें करती हों उसको इन दरवेशों ने कर दिखाया है।
इस लिए मिल्लत की ज़िम्मेदारी है कि एक ख़तीर रक़म यकजा करके वक़्फ़ का ऐसा उम्दा और मुस्तहकम इंतेज़ाम कर दे कि यह इदारा मुस्तक़बिल में भी इस्लामी उलोम-ओ-फ़नोन की ख़िदमत में सरगर्म अमल रहे —

Visits: 268
0Shares
Total Page Visits: 238 - Today Page Visits: 1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी »