केन्द्र सरकार के खिलाफ मुखर हुई किसान सभा

० निकाला जुलूस, सौंपा ज्ञापन
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रिपोर्ट :- शन्नू आज़मी

घोसी (मऊ)। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत केंद्र सरकार की जनविरोधी किसान विरोधी कानूनों, बढ़ती बेरोजगारी तथा नागरिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों पर बढ़ते हमले के खिलाफ बुधवार को किसान सभा की घोसी इकाई ने नगर के मधुबन मोड़ से जुलूस निकालकर तहसील मुख्यालय पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक 12 सूत्रीय मांग पत्र उप जिलाधिकारी घोसी को सौंपा। सौंपे गए मांग पत्र में किसान और मजदूर विरोधी कानून रद्द करने, बिजली के दाम कम करने, बुनकरों के फिक्स चार्ज बहाल करने, डीजल का दाम आधा करने, एमएसपी को कानूनी दर्जा दिए जाने, सार्वजनिक उपक्रमों की बिक्री बंद करने, मनरेगा में 200 दिन ₹600 दैनिक मजदूरी तय करने, सभी कामगारों के न्यूनतम वेतन 21000 रुपये मासिक करने व 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके सभी महिला/ पुरुष किसानों को ₹10000 मासिक पेंशन दिए जाने संबंधी मांग शामिल है।


इस अवसर पर भाकपा के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी शेख हिसामुद्दीन ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने इस मानसून सत्र में लॉक डाउन के प्रावधानों का दुरुपयोग करते हुए तीन काले कानूनों को पारित कर किसानों व मजदूरों पर भारी हमला किया है। इन विधेयकों को पारित करने के लिए सांसदों को मत विभाजन की मांग के अधिकार तक से वंचित कर दिया गया। किसान सभा के जिला मंत्री हाजी गुफरान अहमद ने कहा कि यह सरकार सांप्रदायिक भावनाएं भड़का कर जनता को मूल समस्याओं से भटका कर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रही है जिससे कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होती जा रही है।
इस अवसर पर शेख हिसामुद्दीन व हाजी गुफरान अहमद के साथ जनार्दन यादव, अनीस अहमद, उदय नारायण राय, एकराम प्रधान, शकील पांडेय, जमील अहमद, खुर्शीद अंसारी, भेखराज प्रजापति, जयराम यादव, जावेद आलम, अलाउद्दीन आदि मौजूद रहे।

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