आई हेट टीयर्स पुष्पा! 

@चंचल

‘ झुट्ठा !’ ताउम्र ‘ वह ‘ यह झूठ बोलता रहा और मुस्कुराता रहा । उसने इस झूठ की दास्तान का एक बड़ा हिस्सा हमारे पास छोड़ दिया है और रुखसत होते समय ,हर बात की तरह ,इस झूठ वाली बात पर वचन नही लिया कि –

     ‘ साहिब ! दायी से क्या पेट छिपाना , आपसे कुछ भी तो नही छुपा पाया , आंशू भी नही लेकिन हमारे न रहने पर ही इसका जिक्र करिएगा । काका कभी रोता नही कभ्भी नही ‘

      – कल जब ऐश्वर्या को देख कर आप ?

      – फ़िल्म है साहिब ! हम नही , स्क्रिप्ट को रोना था ।

      – वो किसी केमिकल के रिएक्शन से निकला आंशू नही था ।

        – चलिये शाम को मिलते हैं , नो बहाना , बिल्कुल राइट टाइम । वो के

   और हम राइट टाइम होते रहे । काका की जिंदगी के आखिरी आठ साल हम साथ साथ रहे । उनको अलविदा नही कह पाऊंगा , कैसे कहूंगा , बहुत कमजोर हूँ इस सवाल पर । डिम्पल जी को फोन किया काका की बीमारी और उनकी गिरती सेहत उनकी रुखसती की पूर्व सूचना थी । डिम्पल जी ने सब बताया और बोली

     – आकर क्या करेंगे चंचल ! मुलाकात या बात चीत तो हो नही पाएगी । जो देखेंगे वो और दुख देगा ।

     नही गया । लेकिन वह जो साथ मे है उसका क्या करूँ मन से जाता भी तो नही ।

    – क्या रोना लेकर बैठ गए ? नौटंकी ! नशेड़ी !! दुष्ट !!!

 आज काका का जन्मदिन है , आज हंसी खुशी का दिन है , उसकी बात करो ‘ आनंद ‘ के ठहाके पर तो जानीवाकर तक ने जनता को रुला दिया था । उस ठहाके पर मत जावो दिल्ली सुनाओ ।

     जो लिख चुका हूं उसे किताब में समेट रहा हूँ । कैसे मुलाकात हुई , कैसे दोस्ती हुई , क्या क्या हुआ ? वह सब टुकड़ों टुकड़ों में लिखता रहा हूँ यहां एक वाक्या सुनाता हूँ जिससे हम गच्चा खा गए । और आज तक नही उबर पाए , गो कि हमे यहां अपने पर नाज है । सुन मोटू ! दिल्ली क्या है ?

     दिल्ली जरायम पेशे के बेशुमार हुनर रखनेवालों का उजड़ा हुआ अड्डा है । धोखे खूब हैं । चेहरे पर चेहरा लटका मिलेगा । राजनीति की बात किया जाय ।

     एक दिन हम राज बब्बर के साथ उनके सरकारी आवास पर बैठे थे । सांवले रंग दरमियाना कद काठी का एक अधेड़ अंदर आया और उसने सिगरेट निकाल कर राज के सामने रख दिया और बाहर जाने लगा । हमने रोका – सुनो भाई ! ये लो बीस रुपये , वहां सामने आकाशवाणी के पीछे पान की दुकान है वहां से पान लगवा लो , चूना , कत्था और एक सौ बीस । सुपारी मत डलवाना । लाता हूँ कह कर बगैर पैसे लिए निकल गया । राज को देखा तो सर पर हाथ धरे बैठे हैं ।

     – अब आपको क्या हो गया ?

      – मरवावोगे यार ! जानते हो यह कौन है ?

      – हम मर्दुमसुमारी करने नही आये हैं , देख कर लगता है लगनशील प्राणी है ।

       – तुम कहाँ से टिकट मांग रहे थे मुलायम सिंह से ?

       – मछलीशहर से

       – किसे मिल रहा है ?

      – अमर सिंह का कोई कारकुन है सी यन सिंह ।

        – यह वही सी यन सिंह है , प्रतापगढ़ का ।

        सी यन सिंह से यह पहली मुलाकात थी , बाद में दोस्ती हो गयी ।

   यही सी यन सिंह मछलीशहर से समाजवाद के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते ।

   राज ने बताया कि आज तो भाई सलमान खुर्शीद की पार्टी में बुलाये गए हो । ( सलमान खुर्शीद उस समय विदेश राज्य मंत्री थे , हमारे उनसे , उनके पूरे परिवार से बहुत बेहतर रिश्ते हैं तब से ।

गर्मियों के दिन थे , भाई सलमान खुर्शीद के आवास का बगीचा सजा था लोग आ रहे थे अपनी अपनी जमात तलाश कर अपना काम सीधा कर रहे थे । दिल्ली जलसे का यह स्थायी भाव है । तुगलक से लेकर आज तक खंजरों पर धार इन्ही जलसों में लगाये जाते है ।

    नरेश जुनेजा , हम और काका भाई एक कोने में बैठे हंसी मजाक कर रहे थे । काका तिरुपति से लौटे यह बाल कटा सर लिए घूम रहे थे । इतने में सी यन सिंह हौले हौले आये और बोले आप लोंगो को अब्बू ( मरहूम खुर्शीद आलम , गवर्नर कर्नाटक थे ) बुला रहे हैं । हम लोग अब्बू के पास गए सब बैठ गए काका अब्बू के बगल में बैठे थे , हम सलमान भाई से बात करने लगे । इतने में तमाम कैमरा वाले काका की तरफ बढ़ गए । यहां एक हादसा हो गया । अमर सिंह एक कुर्सी खींच कर काका के बगल बैठ गए और अपना एक हाथ काका के कंधे पर रखा ही था कि काका को जैसे करेंट लग गया । उन्होंने गुस्से में जोर से अमर सिंह का हायह झटका और अंग्रेजी में ‘ कुछ ‘ बोल गए ।

   बात आयी गयी हो गयी । थोड़ी देर में काका ने हमारे कंधे पर हाथ रखा और बोले चलिए ‘ फाइल ‘ खोली जाय । हमने काका से मजाक किया – हाथ टिकाए रखिये इसमे करेंट नही है ‘ और हम दोनों हंस पड़े । हमने यह नही देखा कि जब हम आगे निकल रहे थे , हंसते हुए तो अमर सिंह वहीं बगल में बैठे थे । इस हंसी ने हमे मछलीशहर से खिसका दिया और हम समाजवाद की पुरानी बखरी कांग्रेस में लौट पड़े ।

  काका को जब मालूम हुआ कि अमर सिंह की वजह से हमारा टिकट कट रहा है तो उन्होंने कहा कि हम मुलायम जी से बात करें ?

 हमने मना कर दिया । और बताया कि पूना में हमने मुलायम जी को बहुत तल्ख शब्दों में बोल दिया है कि अब हमें अगर अमर सिंह और शराब व्यापारी समाजवाद पढ़ाएंगे ? हमारा नाम रजिस्टर से काट दीजिये । बाकी जो किताब सकल ले रही है उसमें । काका आज आपका जन्मदिन है. काका को नमन

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