नज़रिया : भारतीय परियोजनाएं और मध्य एशियाई गणराज्य

हेलफोल्ड मैंकाइण्डर ने कहा था की जिसने मध्य एशिया पर नियंत्रण कर लिया उसने पूरी एशिया पर नियंत्रण कर लिया। इस परिप्रेक्ष्य से आज विश्व की प्रमुख महा शक्तियां इन देशों पर नियंत्रण करने के लिए प्रयासरत हैं। भारत और मध्य एशियाई गण राज्यों के प्राचीन काल से ही आत्मीय और घनिष्ठ संबंध रहे हैं।मध्य एशिया में कुल 5 देश हैं।जो 1991 के पहले सोवियत संघ का हिस्सा थे, परंतु उसके विघटन के पश्चात यह सभी स्वतंत्र हो गए और संयुक्त राष्ट्र संघ की सदस्यता भी ग्रहण कर लिया जबकि इन देशों में इस्लाम धर्म को मानने वालों की बहुलता है परंतु यह सभी देश पाश्चात्य संस्कृति और सभ्यता से प्रभावित हैं। जब यह देश आजाद हुए तो भारत सऔर सोवियत संघ से संबंध सैन्य , आर्थिक ,राजनीतिक और सामरिक रिश्ते बहुत प्रगाढ़ थे ।वही उत्तराधिकार के रूप में इन देशों से भी स्थापित हुए। भारतीय प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने इन देशों की यात्राएं की, क्योंकि भारत ने 1991 से उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की अवधारणा को अपना लिया था। वह आसियान देशों के साथ-साथ मध्य एशियाई गणराज्यों के साथ भी अपने संबंध प्रगाढ़ करना चाहता था। भारत ने जब एल० पी ०जी० की अवधारणा को अपनाया और उसके साथ-साथ पूर्व की ओर देखो नीति की पहल के साथ उसका ध्यान आसियान देशों के साथ मध्य एशिया के देशों में भी केंद्रित हुआ । इसी परिप्रेक्ष्य में प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने इन देशों की यात्रा की व्यापारिक और आर्थिक समझौता संपन्न होना प्रारंभ हुए । भारत ने अपना पहला सेटेलाइट में कानून से ही लांच किया था। वर्तमान समय में यह सभी देशअपने आर्थिक विकास में प्रगति के लिए एक प्रतिरूप खोज रहे हैं क्योंकि इनके कुछ देशों की सीमाएं अफगानिस्तान से मिलती हैं जहां तालिबान आतंकी संगठन सक्रिय है ।जिस कारण से भारत का तापी प्रोजेक्ट भी सफल नहीं हो पा रहा है क्योंकि तालिबान आतंकी संगठन उस में गतिरोध पैदा करता है।साथ ही इस आतंकी संगठन के अन्य सहायक संगठन उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान में भी सक्रिय हैं। अन्य देश एवं महा शक्तियां सुरक्षा, आर्थिक विकास और समझौतों संधियों को कायम कर के वहां अपना निवेश बढ़ा रहे हैं परंतु भारत उस तेजी रफ्तार के साथ निवेश और गतिविधियां नहीं बना पा रहा है हालांकि 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मध्य एशियाई यात्राओं से स्थगित परियोजनाओं में अधिक सक्रियता देखने को मिली जिसमें गैस पाइपलाइन परियोजना और बन रहे विश्वविद्यालयों में आर्थिक योगदान से दोनों के संबंधों में मजबूती देखने को मिली। मध्य एशिया के संपूर्ण देश( कजाकिस्तान ,तजाकिस्तान उज्बेकिस्तान ,तुर्कमेनिस्तान और किर्गिस्तान) भूबध्द हैं ।इन देशों की कोई भी सीमा समुद्री मार्ग से नहीं मिलती है ।अतः यह अपने व्यापार और विकास के लिए रूस एवं पश्चिम एशियाई देशों पर निर्भर हैं । वर्तमान समय में भारत की मध्य एशिया में वाणिज्यिक उपस्थिति सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं- पंजाब नेशनल बैंक, ओएनजीसी और ओ० बी ०एल के नेतृत्व में है ।दोनों कजाकिस्तान में निवेश बढ़ा रहे हैं। इस क्षेत्र में निजी ग्रुप में सन ग्रुप भी शामिल है जो कजाकिस्तान में यूविलीनोय में सोने की खदानों में कार्य कर रहा है ।साथ ही के ०ई०सी०, इंटरनेशनल लिमिटेड, कॉस्मापॉलिटन बिल्डर्स और होटलियर्स लिमिटेड जैसी भारतीय कंपनियां वहां पर योजनाओं के निष्पादन में कार्यरत हैं।

    7 फरवरी 2020 को नई दिल्ली में भारत मध्य एशिया व्यापार परिषद का शुभारंभ हुआ जो दोनों के मध्य परस्पर व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देने के नए संकेत दे रहे हैं।इन दोनों के साथ भारत के आर्थिक संबंधों को नए आर्थिक क्रम द्वारा आकार दिया गया है।भारत के द्वारा 2012 में शुरू की गई ‘कनेक्ट मध्य एशिया’ नीति के ढांचे के भीतर ऊर्जा हासिल करने, आतंकवाद को रोकने, नशीली पदार्थों की तस्करी और पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक संबंधों को स्थापित करने के लिए इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना चाहता है।भारत ने मध्य एशियाई गण राज्यों के प्रति बहुपक्षीय दृष्टिकोण अपनाया है जिसमें वर्तमान समय में चाबहार बंदरगाह का नवीनीकरण कर एक महत्वपूर्ण व्यापारिक कदम उठा रहा है।

        जिसमें भारत न केवल मध्य एशिया तक पहुंच बनाएगा बल्कि यह अन्य यूरोपीय व्यापारिक मार्गों तक भी पहुंच बनाएगा। भारत का ध्यान इस समय मध्य एशिया के समस्त देशों में है जो उसके साथ आर्थिक विकास और परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के साथ-साथ वहां के विकास मॉडल पर भी ध्यान दे रहा है। परंतु चीन इस क्षेत्र में भी हस्तक्षेप कर रहा है और चीन अपना व्यापारिक संबंध मध्य एशिया के देशों के साथ अधिक बढ़ा रहा है ।चीन इन मध्य एशियाई देशों के साथ ‘वन बेल्ट वन रोड इनीशिएटिव’ के माध्यम से इन क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बना रहा है और इन देशों को भरपूर लोन भी प्रदान कर रहा है। वहीं शंघाई कोऑपरेशन संगठन के तहत इन देशों में अपनी व्यापारिक और आर्थिक स्थिति मजबूत किए हुए हैं। वर्तमान समय में भारत को चाहिए कि वहां पर अपनी स्थगित स्थगित परियोजनाओं को संचालित करें और सभी प्रकार के निवेश की गतिविधियों को बढ़ाएं जिससे कि मध्य एशिया देशों के नागरिकों का रुख भारत की ओर हो मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मध्य एशियाई बाजार चीनी सामानों से भरे हुए हैं क्योंकि उसका प्रोडक्ट सस्ता होता है जिससे वहां के नागरिक कम दाम में खरीद सकते हैं। चीन अपनी मोतियों की माला की नीति से मध्य एशिया में निवेश को बढ़ा रहा है ।और उन देशों को शंघाई कोऑपरेशन संगठन के तहत कर्ज का प्रावधान भी कर रहा है, जिससे कि उनका रुख भारत की ओर और रूस की ओर ना हो करके चीन की ओर अधिक हो।मध्य एशियाई गण राज्यों में आज भी अधिनायक वादी शासन है और उन देशों में केवल किर्गिस्तान ही ऐसा देश है जहां पर लोकतंत्र स्थापित है परंतु आतंकवादी गतिविधियों के कारण वहां पर लोकतंत्र स्थापित नहीं हो पा रहा है । साथ ही वहां की निवेश करने में कंपनियां डरती हैं, क्योंकि आतंकवाद से सुरक्षा की गारंटी शत-प्रतिशत वहां की सरकार प्रदान नहीं कर पाती है। यह सभी के सभी देश प्राकृतिक संसाधन ,खनिज संसाधन ,ऊर्जा ,और गैसों के अधिकतम भंडार हैं ,जिससे विश्व के प्रमुख देशों की और प्रमुख महा शक्तियों की इन पर नजरें टिकी हुई हैं ।इसी परिदृश्य को राजनीति विज्ञान में ग्रेट गेम के नाम से जाना जाता है। भारत की प्रमुख कंपनियां यहां पर निवेश बढ़ा रही हैं ।जैसे कि भारत तुर्कमेनिस्तान से पाकिस्तान और अफगानिस्तान होते हुए एक गैस पाइपलाइन बिछा रहा है जिससे भारत की गैस पर निर्भरता अधिक बढ़ेगी और साथ ही तुर्कमेनिस्तान को भी इससे लाभ होगा। क्योंकि वह अपने यहां से प्रत्यक्ष रूप में गैस का निवेश कर सकेगा। भारत चार वाह बंदरगाह का निर्माण कर रहा है जिससे कि भारत की रोड और परिवहन की पहुंच प्रत्यक्ष रुप से पहुंच मध्य एशिया तक हो सकेगी और केवल मध्य एशिया तक ही नहीं बल्कि वहां से यह डायरेक्ट यूरोप के देशों को भी जोड़ सकेगी।भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2015 में अपनी पांच दिवसीय यात्रा में इन सभी देशों की यात्राएं की।साथ ही यहां के राष्ट्रपति से मिले और उनसे आर्थिक और व्यापारिक सहयोग और समन्वय की बात की।वर्तमान समय में भारत को चाहिए कि यहां पर अपनी आर्थिक गतिविधियां और आर्थिक नीतियां अधिक बढ़ाएं और रुकी हुई पर योजनाओं को संचालित करें।

 

विकास कुमार ‘विश्लेषक’

sagarvikash829@gmail.com. Mo.9919914900

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