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कंट्री क्रास क्रश : ठहरी हुई ज़िंदगी और बिछड़ा हुआ प्यार, समंदर के सतह पर उभरे बुलबुले के समान होता है..

Byadmin

May 27, 2021

#कंट्री_क्रास_क्रश की नई कड़ी में आज हम ‘Start Up’ बेवसीरीज की बात करेंगे। किसी भी चीज़ की शुरूआत बहुत मायने रखती है। समुन्दर में छलांग लगाने से पहले शार्क की जानकारी ज़रूरी है, ठीक वैसे ही पर्वत श्रृंखला की चढ़ाई से पहले पर्वतारोही बनने की मानसिक तैयारी महत्वपूर्ण है।

ठहरी हुई ज़िंदगी एवं बिछड़ा हुआ प्यार, समुन्दर के सतह पर उभरे बुलबुले के समान होता है

दुनिया के भीड़ में अपनी पहचान बनाने के लिए भटकने वाले करोड़ों हैं। कोई-कोई ही अपनी पुख़्ता पहचान बना पाता है। जिसने बना लिया उसने अपना लोहा मनवा लिया। दरअसल यह कुछ ऐसे ही ज़िद्दी, जुनूनी, तेज-तर्रार, दूरदर्शी, चतुर, डिसिजन मेकर और दौलत से अधिक बदलाव के मुद्दे को दिशा देने की हद से गुज़र जाने वाले प्रेमियों की कहानी है।

जिसने ख़त लिखा वह रोता है, जिसने ख़त नहीं लिखा वह इश्क़ कर बैठता है। सिरीज़ बहुत रूलाती है। नये चैलेंज स्वीकारने की दृष्टि भी देती है। अनूठी प्रेम त्रिकोण का क़िस्सा कहती है, जहां से आप सहजता से दृ्श्य के बाहर निकल ही नहीं पाते हैं। संवेदना की सघनता दिल-दिमाग का सारा करार लूट लेती है। कहानी ख़त्म होने के बाद दिल में बेचैनी, दिमाग में बेकली और वातावरण में अनचिन्हें सवाल छोड़ देती है जिनके जवाब की प्रतीक्षा मुमकिन नहीं है मगर दूसरा रास्ता भी तो नहीं है।

दक्षिण कोरिया, काल्पनिक स्थान सिलिकॉन वैली में स्थापित #सैंडबॉक्स एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी है। यह कंपनी दुनिया भर में प्रतियोगिता कराती है। वह चुन-चुनकर टॉपर, ब्रिलियंट एवं कुछ हटकर अनोखा करने वालों को अपने स्टार्ट-अप को कंपनियों की दुनिया में पहचान बनाने के लिए दस करोड़ वॉन के साथ टॉस्क वर्क देती है। जो जितना जुटेगा, उतना ही उठेगा। आप यह स्लोगन कंपनी के संदर्भ में गढ़ सकते हैं। कोरिया का हर युवा अपने सपने को साकार करने हेतु सैंडबॉक्स के दिशा में अथक प्रयत्न करता है। कहानी चार युवाओं की मज़बूत इच्छाशक्ति व जिजीविषा को बयां करती है।

एक यतीम बालक दुनिया की पथरीली सड़क पर जब निकलता है तब वह बचता है या सदैव के लिए मिट जाता है। हम भारतीय लोग अर्थव्यवस्था की दृष्टि से सरकारी नौकरी को प्रथम श्रेणी में रखते हैं। अपने देश के परिवेश की मन:स्थिति भी ऐसी ही है कि आप सरकारी विभाग में हैं तो आपका रुतबा है, अगर प्राइवेट में क्रांति करते हैं तो आपकी अपनी कोई ख़ास पहचान नहीं है। जबकि यह बात कोरिया सहित तमाम विकसित अन्य देशों पर लागू नहीं होता है। यह सबसे अहम बिंदु ग़ौरतलब है। प्रतिभा की कमी नहीं है बशर्ते प्रतिभा को सही दिशानिर्देश मिले तो प्रतिभा के विस्फोट को कोई रोक नहीं सकता है।

कोरिया में बच्चे के जन्म के साथ ही यह सिखाया जाने लगता है कि आप किस फ़ील्ड में जायेंगे तो नेम-फ़ेम ढंग से कमा सकते हैं। एक अनाथ लड़का छोटी सी उम्र में, एक बुजुर्ग दुकान वाली स्त्री का हिसाब-किताब देखता है। बदले में मिले मेहनताना को शेयर बाज़ार में निवेश करता है और अस्सी लाख वॉन कमाता है। हाई स्कूल में जाते-जाते घर-गाडी, बंग्ला और एक बड़ी कंपनी का डायरेक्टर बन जाता है। साहस, संघर्ष, हिम्मत, जोश-होश और मेहनत के दमपर उठने वाले दूसरों के लिए मिशाल बनने के साथ-साथ मददगार भी साबित होते हैं। मिस्टर हॉन ऐसे ही व्यक्ति हैं।

हॉन जी-प्योंग बचपन में किसी को सुकून देने, तन्हाई बाँटने, अनाम दोस्ती की लाज रखने और नन्हें आँखों से क़ीमती मोती ने टूटे के लिए बड़े ही निठोहरे मन व दिल से ख़त लिखते हैं, बस उसे अपने दिल की गहराइयों में ज़रा सा भी जगह नहीं देते हैं। शायद समय ही नहीं मिलता है या फिर तन्हा सफ़र करते-करते इस कदर तन्हाई पसंद हो जाते हैं कि खुद के लिखे शब्द को कभी दिल की ख़ाली कोठरी में जगह बनाने ही नहीं देते हैं।उधार चुकाना बेहद सरल है जबकि एहसान को चुकाना सदियों पैदल चलने के बाद भी संभव नहीं है। ऐसा ही एहसान है जिसे चुकाते-चुकाते मिस्टर हॉन एक परिपक्व मेंटोर में तब्दील हो जाते हैं।

चपल, चंचल, ज़िद्दी, ठहराव से भरी, बला की खूबसूरत एवं ज़हीन युवा लड़की डाल-मील के उज्ज्वल भविष्य की कहानी सीरिज़ में स्थायी रूप से निहित है। वह स्टीव जॉब्स की तरह सफल होना चाहती है। दिन-रात एक कर देती है। नाम दो-सान, सैमसन टेक कंपनी का संस्थापक (पार्टनर: किम योंग-सान, ली चुल-सान) है। दुनिया का सबसे कम उम्र का मैथ चैंपियन है। मात्र दस साल की अवस्था में कॉलेज पहुँच जाता है। तीनों मित्रों के साथ कंपनी की शुरुआत करता है। दो वर्ष तक निरंतर प्रयास के बावजूद असफल रहता है जिसका असर उसके जीवनशैली पर पड़ता है। परिजन की तरफ़ से कठोर शब्दावली सुनने को मिलता है। सभी के कहें को चुपचाप सहन करता है। एक दिन अचानक तरक़्क़ी के सारे मार्ग खुल जाते हैं और प्रेम की पगडंडी से सफलता की सीढ़ी बनने लगती है। यह सीढ़ी इतनी जटिल है की काँटों भरे राह पर चलने से भी अधिक दुष्कर साबित होता है।

सीईओ डाल-मील (Bae Suzy), नाम दो-सान (नाम जू-ह्रूाक), बाई सूजी, किम सेओन-हो और कांग हान-ना की केमेस्ट्री, नोक-झोंक में प्रेम की गहरी खाई मौजूद है। सैमसन टेक, USA में CODA प्रतियोगिता जितने के साथ कहानी नई दिशा में मुड़ जाती है।
यह सीरिज़ हर उस युवा को देखना चाहिए जिसके आँखों में कोई सपना है तो उसे साकार करने का हुनर मिलेगा।

#सुनियोजित_वार्ता 27/05/2021

अगली की प्रतीक्षा करें।
-डा० सुनीता की फेसबुक वाल से

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