आजमगढ़ में तांडव : पलिया में पुलिस ने दलितों के घर नहीं तोड़े, वो तो धरती कांपी और सागर डोल गया..!

पलिया में घरों को पुलिस ने जमीदोज़ नहीं किया-एसपी(?)
…तो क्या धरती कांपी और सागर डोल गया..?
@ अरविंद सिंह #त्वरित_टिप्पणी

प्रियंका गांधी के ट्वीट
वज्रपात

यहाँ तस्वीरें चीख-चीख कर बयान कर रहीं हैं कि यह किसी सनकी, आक्रोशित और पागल समूह की घृणा और आक्रोश की मानसिकता का तांडव है.आजमगढ़ के रौनापार थाना क्षेत्र के पलिया गांव में अगर यह तांडव नहीं है तो आखिर क्या है? किसने अंजाम दिया इस तांडव को?किसकी जवाबदेही है? पुलिस अधीक्षक के अनुसार -‘यदि इसे पुलिस ने नहीं अंजाम दिया है’..तो आखिर उसने यह होने कैसे दिया? इसका जवाब पुलिस और सरकार नामक संस्था के पास है? अगर इस गाँव के कुछ मनबढ़ लोगों ने पुलिस के साथ मारपीट की तो उनके साथ वैधानिक कार्रवाई होनी चाहिए थी, आखिर पुलिस से मारपीट के बाद इनके घरों को जमीदोज़ किसने कर दिया ? क्या धरती कांपी और सागर डोला है? और ये घर ताश के पत्तों की तरह अपने आप भरभरा कर गिर पड़ें. जिससे इनकी पूरी गृहस्थी किसी के सनकी मानसिकता से जमीदोज़ हो गयी.घरों में रखे ट्रैक्टर और गाडियां, अस्ति-पंजर में तब्दील हो गयें.अगर ऐसा नहीं है तो फिर दलितों के आशियाने को किसने गिराया. पीड़ित महिलाएं बोल रहीं हैं….पुलिस. और पुलिस बोल रही है कि- ‘उसको पता नहीं घरों को किसने गिराया’
अगर पुलिस ने नहीं गिराया तो पुलिस नामक संस्था कहाँ सो रही थी. ?

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