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प्रेमचंद की रचनाएं भारत के गांवों का प्रतिनिधित्व करती हैं

ByAmarjit Rai

Jul 31, 2021

दिलदारनगर(ग़ाज़ीपुर)। प्रेमचंद्र की 141वे जन्मतिथि के अवसर पर दिलदार नगर पंचायत स्थित जनार्दन ज्वाला के निवास पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता भोजपुरी साहित्य के वटवृक्ष  राम बचन “अजोर” जी ने की।

इस अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा अपने विचारों को साझा करते हुए गाजीपुर जनपद के वरिष्ठ पत्रकार व लेखक रामअवतार शर्मा जी ने कहा दुनिया के महान रचनाकारों में मुंशी प्रेमचंद्र का नाम शुमार है प्रेमचंद्र की कालजयी रचनाएं। जब तक साहित्य संसार रहेगा तब तक प्रासंगिक रहेंगीं। एक संस्मरण को साझा करते हुए बताया कि जैनेंद्र जी को जो पत्र प्रेमचंद जी ने लिखा है। उसका संग्रह पढ़ने का सुअवसर दिल्ली निवास के दौरान पढ़ने को मिला। पत्र लेखन की शैली अनूठी है। उनके पत्रों को जो पढ़ता है। उसके मुंह से वाह निकल पड़ता है।
कवि और संचालक कुमार प्रवीण ने कहा प्रेमचंद की तरह उनकी रचनाओं के पात्र भी सरल और सादे थे उनकी सभी कृतियां माटी से जुड़ी है। खेत खलिहानो और चौपालों की सुगंध प्रचुर मात्रा में है। उनकी रचनाएं भारत के गावों का प्रतिनिधित्व करती है।
संचालन करते हुए जनार्दन ज्वाला ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की रचना गोदान,गबन के अलावा उनकी कहानियों ने आम आदमी को बहुत प्रभावित किया। उनकी कहानियां बूढ़ी काकी, ईदगाह ,कफन दुनिया की उत्कृष्ट रचनाओं में गिनी जाती हैं। इस अवसर पर शायर खुर्शीद खां प्रेमचंद को दुनिया का एक बड़ा रचनाकार बताया। इनके अलावा सुरेंद्र पांडे,अवनिश शर्मा आदि भी अपने विचारों को साझा किया।
अंत में गोष्ठी के आयोजक काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता के छात्र रोहित पटवा ने इस गोष्टी में अपने विचारों को साझा करने वाले सभी विचारकों को हृदय से आभार व्यक्त किया।

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