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श्रीजी की भक्ति के रंग रंगा टीएमयू

Byadmin

Sep 12, 2021

खास बातें :

प्रतिष्ठाचार्य बोले, व्यवहार में परिलक्षित होनी चाहिए – स्पष्टता और मधुरता
रिद्धि – सिद्धि भवन में भक्ति – गीतों पर जमकर झूमे श्रावक – श्राविकाएं
धर्म से ओत – प्रोत अंत्याक्षरी प्रतियोगिता के संग – संग हुए कल्चरल इवेंट्स
स्टुडेंट्स विशेष जैन, भावेश जैन, सर्वज्ञ जैन रहे अवार्ड ऑफ दा डे
बतौर चीफ गेस्ट नीलम जैन और ममता जैन की रही गरिमायी मौजूदगी

प्रो. श्याम सुंदर भाटिया
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के रिद्धि – सिद्धि भवन में उत्तम आर्जव के दिन प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य टीएमयू मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के वाइस प्रिंसिपल डॉ. एसके जैन, द्वितीय स्वर्ण कलश का सौभाग्य टिमिट के निदेशक डॉ. विपिन जैन और तृतीय स्वर्ण कलश का सौभाग्य श्री रिद्धिम जैन चतुर्थ स्वर्ण कलश का सौभाग्य ह्रदयेश जैन को प्राप्त हुआ। श्रीजी की स्वर्ण कलश से शांतिधारा करने का सौभाग्य निदेशक हॉस्पिटल पीएंडडी श्री विपिन जैन और रजत कलश से शांति धारा करने का सौभाग्य स्टुडेंट्स – सर्वज्ञ चौधरी, अमन जैन, भावेश जैन, अक्षत जैन, संयम जैन, हर्ष जैन, लोचन जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा और अभिषेक करने वालों को रजत कलश से सम्मानित भी किया गया। दिल्ली सेे आए सरस एंड पार्टी ने अपनी सुरीली आवाज पर… खुशी – खुशी प्रभु का न्वहन करे …., दहलीज पर मेरे गुरुवर ने रखे हैं कदम …., रोम – रोम से निकले प्रभुवर नाम तुम्हारा …., आयो रे पर्व पर्युषण आयो रे …., टीएमयू की नगरीय क्या सजी है …., रंगमा रंगमा रंगमा रे प्रभु थारा रंगमे रे …., भजनों पर श्रावक और श्राविकाएं जमकर झूमे। सैकड़ों श्रावक और श्राविकाएं हाथों में चंवर लिए हुए थीं। इस दौरान श्रीमती ऋचा जैन, डॉ. अर्चना जैन, डॉ. विनीता जैन, स्मिता जैन आदि भक्ति नृत्य में लीन नजर आए। श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महिला महासभा की राष्ट्रीय उपाध्यक्षा श्रीमती नीलम जैन और श्री दिगंबर जैन महासमिति, मुरादाबाद की मंडल अध्यक्षा श्रीमती ममता जैन की बतौर चीफ गेस्ट गरिमायी मौजूदगी रही।

दूसरी ओर ऑडी में आयोजित कल्चरल इवनिंग में तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के सभी एजुकेशन कॉलेजों और एग्रीकल्चर कॉलेज की ओर से ज्ञानवर्धक अंत्याक्षरी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहनी प्रस्तुति हुई। अंत्याक्षरी प्रतियोगिता में सन्मति टीम अवार्ड ऑफ द डे रही। अंत्याक्षरी प्रतियोगिता के पांच राउंड – गाये चले जा, धार्मिक पहेली, शब्द जाल, पहचानो तो जानें, अंतरा… मुखड़ा हुए। द्वितीय विजेता वीर टीम रही, जिसमें जागृत जैन, जतिन जैन, अनंत जैन रहे। इसके अतिरिक्त एग्रीकल्चर की टीम ने पर्युषण पर्व आया है— की जानदार प्रस्तुति दी फैकल्टी ऑफ एजुकेशन का एक्ट काबिल-ए-तारीफ रहा। इस टीम में विशेष जैन, भावेश जैन, सर्वज्ञ जैन शामिल रहे। इससे पूर्व निदेशक छात्र कल्याण प्रो. एमपी सिंह ने दीप प्रज्जवलित करके इस आस्थामय सांझ का शुभारम्भ किया। इस मौके पर प्रो. रश्मि मल्होत्रा, डॉ. विनोद जैन, डॉ. रत्नेश जैन, डॉ. अशोक लखेरा, एआर श्री दीपक मलिक आदि मौजूद रहे जबकि एग्रीकल्चर कॉलेज की ओर से डॉ. शाकुली सक्सेना, डॉ. भावना, डॉ. जीपी सिंह आदि भी इस शाम के गवाह बने। कार्यक्रम में निदेशक प्रशासन श्री अभिषेक कपूर, टिमिट के निदेशक प्रा.े विपिन जैन, निदेशक हॉस्पिटल पीएंडडी श्री विपिन जैन आदि भी मौजूद रहे।

रिद्धि – सिद्धि भवन में सम्मेद शिखर जी से आए पंडित श्री रिषभ जैन ने विधि विधान से श्रावक और श्राविकाओं को विनयपाठ, पंच परमेष्ठी पूजन कराया। श्रावक धोती, दुप्पटे और श्राविकाएं साड़िया पहनेे पूजा के रंग में रंगे नजर आए। उत्तम आर्जव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सम्मेद शिखर जी से आए प्रतिष्ठाचार्य श्री ऋषभ जैन बोले, जीवन में स्पष्टता और सुलझा हुआ मन ही ईश्वर से जुड़ाव बढ़ाता है। यह दिवस प्राकटयोत्सव के रूप में हो, अर्थात जो हमारे मन में है, वही हमारे आचार – विचार और कर्मो में परिलिक्षित होना चाहिए। मनुष्य की कथनी और करनी में शाश्वत और सात्विक एकरूपता से ही उत्तम आर्जव धर्म की पालना होती है। उत्तम आर्जव के सोलहकारण, पंच मेरु और दसलक्षण पर्व की विशेष पूजा हुई। इसी के साथ सम्मेद शिखर विधान का आयोजन हुआ। विधान में मंगल कलश स्थापना करने का सौभाग्य कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, फर्स्ट लेडी बीना जैन, ग्रुप वाइस चेयरमैन श्री मनीष जैन, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती ऋचा जैन को प्राप्त हुआ। विधान में चार कलश स्थापना करने का सौभाग्य श्रीमती शशि जैन, श्रीमती निधि जैन, श्रीमती शालिनी संजय जैन, श्रीमती विनीता विपिन जैन को प्राप्त हुआ, जिसमें दिल्ली से आयी सरस एंड पार्टी की सुरीली साज और आवाज में विधान संपन्न हुआ। कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने जैन समाज के सर्वोच्च तीर्थ सम्मेद शिखर जी की यात्रा से वंछित स्टुडेंट्स को यूनिवर्सिटी की ओर से तीर्थ यात्रा का आमंत्रण दिया।

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