• Thu. Oct 21st, 2021

जन्म-शताब्दी वर्ष में शिद्दत से याद किये जाएंगे मुगल-ए-आजम के निर्देशक के. आसिफ

Byadmin

Sep 18, 2021

के. आसिफ जन्‍म शताब्‍दी
——————————
– देश ने सिनेमा के सरताज को भुला दिया तो भी इटावा जिले ने आज भी सहेज रखी है यादें
– 25 सितंबर को के. आसिफ को याद करेगी उनकी जन्‍मभूमि, होंगे विविध आयोजन
—————————–
इटावा। हिंदी सिनेमा को मुगले आजम जैसी आइकॉनिक फिल्म को तोहफा देने वाले प्रसिद्ध निर्देशक के. आसिफ का यह जन्म शताब्दी वर्ष चल रहा है। के. आसिफ का जन्म 14 जून, 1922 को इटावा शहर के मोहल्ला कटरा पुर्दल खां में हुआ था। मुफलिसी से घिरे हुए के. आसिफ ने इस्लामिया इंटर कालेज में सिर्फ आठवीं तक ही पढ़ाई कर पाए। इसके बाद वे मायानगरी मुंबई चले गए और वहां दर्जी का काम करने लगे लेकिन, सिनेमा के प्रति उनकी दिवानगी ने उन्हें अव्वल दर्जे का निर्देशक बना दिया।

 

‘मुगले आज़म’ फिल्म को बनाने के लिए के. आसिफ ने प्रसिद्ध सिने स्टूडियो ‘अमौस सिने लैबोरेटरी’ के मालिक शिराज अली हकीम के साथ मिलकर काम करना शुरू किया, इससे पहले हाकिम ने के. आसिफ के डायरेक्शन में बनने वाली पहली फिल्म ‘फूल’ 1945 में भी उनके साथ काम किया था। फिल्म फूल को हिंदी सिनेमा की सबसे पुरानी मल्टीस्टारर फिल्मों में से एक माना जाता है। के. आसिफ मशहूर फिल्म निर्माता ही नहीं बेहतरीन लेखक भी थे। उन्होंने भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य और ऐतिहासिक माइलस्टोन फिल्म मुग़ले आजम बनाकर अमरता हासिल कर ली। वर्ष1949 में के. आसिफ ने शहीद-ए-आजम ‘भगत सिंह’ पर ख्वाजा अहमद अब्बास के साथ फिल्म निर्माण का काम शुरू किया था और 1951 में उनकी निर्मित ‘हलचल’ फिल्म रिलीज होते ही सिने प्रेमियों के जेहन पर छा गई।

बताते चलें कि मुगल-ए-आजाम निर्माण का शरूआती दौर भारी उथल-पुथल का रहा। आजादी और विभाजन की भयावह त्रासदी में शिराज अली हाकिम ने अपना स्टूडियो बेच दिया और एक्टर हिमाल्यवाला पाकिस्तान चले गए लेकिन इन सब परिस्थियों को जूझते हुए के. आसिफ ने मुंबई में अपने जिन्दा ख्वाबों की ताबीर में दिन-रात जुटे रहे। के. आसिफ को पाकिस्तान जाना गंवारा नहीं था, तब के. आसिफ की मुलाकात फेमस सिने स्टूडियो के मालिक शापूरजी से हुई। उन्होने के. आसिफ के ‘मुगले आजम’ के सपने को पर्दे पर उतारने में भरपूर मदद की।

आखिरकार 14 वर्ष के लंबे इंतजार के बाद 5 अगस्त, 1960 को 150 सिनेमा घरों में रिलीज किया गया था, जिसने अपने पहले ही हफ्ते में 40 लाख रुपये की रिकार्ड कमाई कर तहलका मचा दिया और पूरी दुनिया के शिलालेख में दर्ज हो गया। यह पूरी फिल्म ब्लैक एंड वाइट है और सिर्फ एक गाना इसमें रंगीन है। इसी मलाल में के. आसिफ ने वर्ष 1963 से ‘लव एंड गाड’ कलर फिल्म बनाने के लिए जी जान से जुटे थे लेकिन रिलीज होने से पहले ही के. आसिफ महज 48 वर्ष की उम्र में दुनिया से रूखसत हो गए।

‘चंबल फाउंडेशन’ ने देश की धरोहर महान फिल्मकार के. आसिफ के नाम पर ‘चंबल इंटनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ की शुरूआत की। जिसका पांच वर्ष से लगातार आयोजन होता रहा है। के. आसिफ की विरासत को याद करने के लिए के. आसिफ़ जन्म-शताब्दी समारोह समिति बनाई गई है जो उनकी जन्मभूमि से लेकर कर्मभूमि तक विविध आयोजन करेगी। कोविड की वजह से उनके जन्मदिवस (14 जून) पर होने वाले आयोजन को टाल दिया गया था।

25 सितंबर को 2.30 बजे दिन में के. आसिफ़ जन्म-शताब्दी समारोह का आयोजन इस्लामिया इंटर कालेज के सभागार में किया जा रहा है। जो कि अपने छात्र के. आसिफ की शिक्षा का गवाह रहा है। इस बार जन्म शताब्दी समारोह का थीम ‘सिनेमा-संसार : कला या बाज़ार’ रखा गया है। जिसे राज्यसभा टीवी के पूर्व एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर और फिल्मकार राजेश बादल, प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक अजीत राय, कर्मवीर के संपादक डॉ. राकेश पाठक, चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के ज्यूरी चेयरमैन प्रोफेसर मोहन दास संबोधित करेंगे। के. आसिफ जन्म-शताब्दी समारोह आयोजन समिति में कार्यक्रम संयोजक पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष फुरकान अहमद, प्रेस क्लब इटावा के अध्यक्ष दिनेश शाक्य, इस्लामिया इंटर कालेज के प्रिंसिपल गुफरान अहमद, दस्तावेजी फिल्म निर्माता शाह आलम आदि शामिल हैं।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी »