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लखीमपुर कांड की निष्पक्ष जांच के आसार नहीं

ByAmarjit Rai

Oct 10, 2021

राजीव कुमार ओझा

कहने को योगी सरकार ने कहा है कि लखीमपुर कांड की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन जांच की दिशा बताती है कि सरकार की कथनी के विपरीत सरकार की करनी है।
टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर इस लोमहर्षक कांड की 28 सेकेंड और 45 सेकेंड की जो वीडियो उपलब्ध है उसमें यह साफ है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले मोदी सरकार के गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की तेज रफ्तार जीप और एक काले रंग की फार्चुनर कार (जो मंत्री के कृपा पात्र ठेकेदार अंकित दास की बताई जा रही है) ने शांति पूर्वक जा रहे किसानों को जानबूझकर कर कुचल डाला।
इस हृदय विदारक कुकृत्य मे गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी और उनके बेटे आशीष मिश्रा की संलिप्तता के साक्ष्यों की पुलिस ने अनदेखी की ।गौर तलब है कि इस हृदय विदारक कांड की पटकथा केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी ने 25सितंबर को ही लिख दी थी जब एक जनसभा को संबोधित करते हुए गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी ने किसानों को धमकाते हुए कहा था कि “सुधर जाओ नहीं तो हम दो मिनट मे ठीक कर देंगे।सांसद और मंत्री बनने के पहले मैं क्या था यह जान लो ।यदि मैं सांसद और मंत्री बनने के पहले वाले रूप मे आ गया तब परिया ही नहीं लखीमपुर छोड़ना पड़ेगा।अजय मिश्रा टेनी के इसी भड़काऊ भाषण का विरोध करने के लिए किसान काले झंडे के साथ विरोध करने पहूंचे थे।
मोदी काल मे संवैधानिक पद पर रहते हुए अराजक बयानबाजी का यह पहला मामला नहीं है।मोदी सरकार के मंत्री अनुराग ठाकुर सीएए के खिलाफ शाहीन बाग मे चल रहे आंदोलन के समय ” देश के गद्दारों को गोली मारो सालों को ” जैसी नारेबाजी करते देखे गए।किसान आन्दोलन के खिलाफ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भाजपाई किसानों को‌ लठ्ठ उठाने का भड़काऊ भाषण देते देखे गए।खट्टर खुलेआम हिंसा भड़काने का आह्वान करते हुए यह कहते देखे गए कि बहुत ‌होगा तब दो चार महीने की जेल
होगी। जेल से नेता बन कर निकलोगे।
डा.कफील खान सहित तमाम सोशल‌ एक्टिविस्टों‌ को भड़काऊ भाषण देने के आरोप मे देशद्रोही घोषित कर जेल मे कैद करने वाली भाजपा सरकार अनुराग ठाकुर,कपिल मिश्रा,अजय मिश्रा टेनी ,मनोहर
लाल खट्टर के हिंसा भड़काने वाले भाषणों पर चुप्पी साध लेती है । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक टीवी चैनल को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू मे गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के भड़काऊ भाषण को पालिटिकल भाषण बता कर टेनी और खट्टर के भड़काऊ भाषण का बचाव‌ किया है। भड़काऊ भाषण देने वाले अनुराग ठाकुर और कपिल मिश्रा को भाजपा पुरस्कृत करती है। लखीमपुर कांड के मुजरिमों को गिरफ्तार करने की मांग करने वाले वरुण गांधी और उनकी मां‌ मेनका गांधी को भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकाल बाहर करती है।
मोदी काल की भाजपा गंभीर अपराधों‌ मे संलिप्त भाजपाईयों को‌ बचाती रही है।यौन हिंसा और बलात्कार के गंभीर अपराध मे संलिप्त कुलदीप सिंह सेंगर,पूर्व गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद, साक्षी महाराज के बचाव मे भाजपा की शर्मनाक भूमिका किसी से छिपी नहीं है।
लखीमपुर कांड मे भी भाजपा सरकार की शर्मनाक भूमिका देखी जा सकती है। लखीमपुर पुलिस पर सत्ता के दबाव का ही नतीजा रहा है कि किसानों को कुचलने वाली हत्यारी कार की पहचान हो जाने,टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो साक्ष्य ,घटना के शिकार घायलों और चश्मदीद गवाहों के बयान का लखीमपुर पुलिस ने संज्ञान नहीं लिया।इस कांड मे‌ नामजद एफआईआर के बावजूद लखीमपुर पुलिस ने आरोपी गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी‌ या उनके बेटे आशीष मिश्रा से पूछताछ तक नहीं की। जबकि आरोपी मंत्री और मंत्री पुत्र प्रेस कॉन्फ्रेंस करते रहे। सफेद झूठ परोसते रहे । किसानों को उपद्रवी, खालिस्तानी बताते रहे।
लखीमपुर की हिंसा के शिकार किसानों के परिवार से‌‌ मिलने जा रहे विपक्ष के नेताओं प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, सतीश मिश्रा, सचिन पायलट, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश‌ बघेल, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को रोकने मे प्रदेश सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी।काफी थुक्कम फजीहत के बाद अनुमति दी गई।
गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफे और अजय मिश्रा टेनी और उनके पुत्र आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी की मांग नक्कारखाने मे तूती की आवाज बन कर रह गयी।
इस शर्मनाक हत्याकांड का सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेकर योगी सरकार से विन्दुवार विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की तब सुप्रीम कोर्ट मे जबाब देने के इरादे से घटना के पांच दिन बाद कोरमपूर्ति की कवायद शुरू हुई है। दो नामजद आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया है और इस कांड के सूत्रधार गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के आवास पर लखीमपुर पुलिस ने एक समन‌ चस्पा कर मंत्री के पुत्र आशीष मिश्रा को‌ 8 अक्टूबर की सुबह 10 बजे क्राईम ब्रांच मे तलब किया है। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक मंत्री पुत्र क्राइम ब्रांच नहीं पहुंचा था । लाचार पुलिस ने अब एक और नोटिस गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के आवास पर चस्पा कर मंत्री पुत्र आशीष मिश्रा से 9अक्टूबर को 11बजे हाजिर होने की गुजारिश की है।सबाल अनुत्तरित है कि जिस लखीमपुर पुलिस ने इस कांड के नामजद दो आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद गिरफ्तार किया है वही लखीमपुर पुलिस नामजद आरोपी गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी और उनके पुत्र आशीष मिश्रा को किसके दबाव मे बचाने की कोशिश कर रही है।
इस कांड की निष्पक्ष जांच गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के ‌पद पर रहते संभव नहीं है। मोदी और अमित शाह की चुप्पी बताती है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी को सत्ता का संरक्षण हासिल है। उत्तर प्रदेश पुलिस की लचर जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने 8अक्टूबर को लताड़ लगाते हुए पूछा है कि जब हत्या की नामजद एफआईआर दर्ज है तब गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई? सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी को निर्देशित किया है कि वह सुनिश्चित करें कि सबूतों से छेड़छाड़ न हो। पुलिस की लचर कार्यप्रणाली बताती है कि उसने घटना स्थल से साक्ष्य संकलन मे जानबूझकर कोताही बरती है। हालात बताते हैं कि पुलिस पर सत्ता का दबाव है ।उससे निष्पक्ष जांच की अपेक्षा करना खुद को धोखा देना होगा। इस हृदयविदारक कांड की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट को ही सुनिश्चित करनी होगी । सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया जाना चाहिए कि उसकी सख्त टिप्पणी के बाद गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी का बेटा आशीष मिश्रा पूरे ताम झाम के साथ पुलिसिया जांच के लिए उपस्थित हुआ। पूछताछ मे वह अपने गुनाहों की सफाई नहीं दे सका और उसे गिरफ्तार किया गया।रिमांड मजिस्ट्रेट ने गृह राज्यमंत्री के बेटे को 14 दिन की न्यायिक हिरासत मे जेल भेज दिया। पुलिस की भूमिका को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि पुलिस और गृह राज्यमंत्री को सुप्रीम कोर्ट ने मजबूर न किया होता तब मंत्री के आवास पर नोटिस चस्पा करने की नौटंकी जारी रहती। सुप्रीम कोर्ट को यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच एजेंसी ठोस सबूतों के साथ इस मामले मे चार्जशीट दाखिल करे ताकि लखीमपुर के हत्यारों को सजा मिले और कानून के राज पर जनता का टूटा भरोसा पुनः कायम हो सके।

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