नज़रिया : क्या सपा में शामिल होने के लिए जमाली ने छोड़ी बसपा.?

सियासत में पटकथा पहले लिख दी जाती है, अभिनय बाद में होता है. शायद यहाँ भी पोलिटिकल पटकथा लिखी जा चुकी है.

@ अरविंद सिंह #आंकलन
आज़मगढ़ के मुबारकपुर से बसपा विधायक शाह आलम गुड्डू जमाली का अचानक से सभी पदों और क़दों,मय विधायकी से भी इस्तीफा देना,
क्या यह एक संयोग भर है या एक नई सियासत की ज़मीन पर उतरने की तैयारी. या इस्तीफा का जो कारण बताया गया है वही पर्याप्त आधार है.
वैसे गुड्डू जमाली व्यापार जगत से राजनीति में क़दम रखने वाले आजमगढ़ माटी के ही नेता हैं, जो दो बार से बसपा के विधायक थे. यही नहीं, उन्हें आजमगढ़ से सांसद का भी चुनाव बसपा प्रमुख मायावती ने सपा के गढ़ में लड़ाया, हांलाकि इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली लेकिन इस चुनाव के बाद बसपा में उनका क़द जरूर बढ़ गया और वे माया के विश्वास पात्र बनते चले गएं.

सगड़ी बसपा विधायक वंदना सिंह, भाजपा में शामिल हुई

जिसके परिणामस्वरूप उन्हें बसपा ने अपना विधान मंडल दल का नेता भी बनाया. फिर अचानक से उनका लिखित इस्तीफा 25 नवंबर को आ जाना, और उसके लिए कारण का बताया जाना, सियासत में कई संकेत दें रहे हैं. सपा के गढ़ आज़मगढ़ में देखते ही देखते पहले सगड़ी सीट से वन्दना सिंह का बसपा से नाता तोड़ भाजपा ज्वाइन करना और फिर बसपा के दूसरे इसी जनपद के मुबारकपुर सीट से विधायक गुड्डू जमाली का इस्तीफा दे देना, के राजनीतिक निहितार्थ ये बता रहे हैं कि चुनावी मौसम में सियासत अपना कार्य कर रही है. इस्तीफा से पहले जमाली के भीतर कुछ चल रहा था, और इससे पहले अपने भविष्य की सियासत पर भी मंथन चल रहा था. ऐसे में उनके सामने दो विकल्प या रास्ते बचते हैं. एक कमल के फूल की ले जाता है, जो उनके लिए थोड़ी मुश्किल भरे निर्णय होगें. दूसरा रास्ता सायकिल की सवारी करा सकता है, जिसकी संभावना ज्यादा लगती. अगर ऐसा होता है तो सपा के किस सीट से लड़ेंगे जमाली. यह सवाल का उत्तर ढूढने होगें सपा प्रमुख और जमाली को. क्योंकि मुबारकपुर सीट से सपा के संभावित प्रत्याशियों में पहले से ही शीतयुद्ध चल रहा है. अब देखना दिलचस्प होगा कि कितना जल्दी इस पोलिटिकल मिस्ट्री से पर्दा उठता है.

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