मातृ-सम्मेलन : मां और बच्चे के बीच बाइंडिंग प्रकृति ही विकसित कर देती है- डा० दीपक पांडेय

दिल्ली से आयी देश की जानी मानी पैरेंटिंग एक्सपर्ट बैशाली गागुंली ने जहां बच्चों के मानसिक विकास में मातायें उत्तम योगदान कैसे दें इसे समझाया

एसकेडी में हुआ बच्चों के सर्वांगीण विकास को समर्पित कार्यक्रम मातृ सम्मेलन
जहानागंज। क्षेत्र के धनहुंआ स्थित एसकेडी विद्या मन्दिर में शनिवार को मातृ सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें बच्चों के सर्वांगीण विकास में माताओं की विभिन्न भूमिकाओं पर चर्चा की गयी साथ ही विशेषज्ञों द्वारा उन्हें गुड पैरेंटिंग से जुड़ी अनेक बातों से अवगत कराया गया। नई दिल्ली से आयी देश की जानी मानी पैरेंटिंग एक्सपर्ट बैशाली गागुंली ने जहां बच्चों के मानसिक विकास में मातायें उत्तम योगदान कैसे दें इसे समझाया वहीं राजकीय मेडिकल आजमगढ़ के प्रवक्ता और जाने माने बाल रोग विशेषज्ञ डा0 दीपक पाण्डेय ने बच्चों के शारीरिक विकास के अनेक पहलुओं पर चर्चा की। साथ ही माताओं की विभिन्न जिज्ञासाओं का भी समाधान हुआ।


कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और वाग्देवी मां सरस्वती तथा कालिन्दी देवी के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। उपस्थित माताओं को संबोधित करते हुए बैशाली गांगुली ने कहा कि जैसे बच्चों की आयु में परिवर्तन के साथ उनके शारीरिक और मानसिक स्थिति में भी परिवर्तन होता है वैसे ही बच्चों के प्रति माताओं के कर्तव्य में भी परिवर्तन होना चाहिए। बहुत छोटे बच्चों को अधिक प्यार की जरूरत होती है वहीं कक्षा दो से ऊपर के बच्चों के प्रति थोड़ी कड़ाई ही उचित होती है। जब बच्चा किशोरावस्था में होते हैं तो उनके प्रति सखाभाव अपनाना पड़ता है। उन्होनें कहा कि बच्चों पर पढ़ाई को जबरदस्ती नहीं थोपनी चाहिए बल्कि धीरे धीरे पढ़ने की आदत डालना चाहिए। श्रीमती गांगुली ने कहा कि कोरोना काल के चलते आनलाइन पढ़ाई का दौर शुरू हो गया है । इससे मोबाइल भी पढ़ाई का एक हिस्सा हो गयी है लेकिन बहुत से बच्चे इसका दुरूपयोग कर रहे हैं। इसे रोकने के लिए उन्हें प्यार से समझाते हुए गेम खेलने के लिए अलग से समय देना चाहिए ताकि पढ़ाई का समय बर्बाद न हो सके। बच्चों में हम अच्छी आदत तभी डाल सकते हैं जब स्वयं हम उस आदत को अपनायें क्योंकि एक बच्चा माता से ही सबसे अधिक सीखता है। बच्चे के विकास में माता की भूमिका पिता से कहीं अधिक होती है। बच्चों के शारीरिक विकास पर चर्चा करते हुए डा. दीपक पाण्डेय ने कहा कि मां और बच्चे के बीच जो समन्वय होता है उसे प्रकृति ही विकसित करती है लेकिन इसे और बेहतर कैसे किया जाय यह माता की जिम्मेदारी है। बच्चों के शरीरिक और मानसिक दोनों के विकास में संतुलित आहार की जरूरत सबसे अधिक होती है क्योंकि एक स्वस्थ्य शरीर में ही स्वस्थ्य मन का वास होता है। उचित पोषण के लिए दूध सबसे उचित होता है साथ ही बच्चों को हर छः महीने में पेट के कीड़ों को नष्ट करने की दवा जरूर देनी चाहिए।


क्षेत्राधिकारी लालगंज मनोज रघुवंशी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। एसकेडी इण्टर कालेज के प्रधानाचार्य केके सरन और एसकेडी विद्या मन्दिर के प्रधानाचार्य रामजी चौहान ने भी अपने विचारों को रखा। पत्रकारिता क्षेत्र के जाने माने शख्स अरविन्द सिंह, कमलेश राय सहित अनेक अभिभावर्क कार्यक्रम में उपस्थित रहे। संचालन रेनू मिश्रा और रंजना वर्मा ने किया। आयोजन को सफल बनाने में श्रीकान्त सिंह, संतोष, दीपक, संजय, आशुतोष, राकेश, अनन्त, योगेन्द्र, प्रियंका, आदि लोगों का योगदान सराहनीय रहा।

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