इंतज़ार अब भी है।

पवन  ‘अनाम’

सुबह-सुबह बाहर गली में कुत्तों के भोंकने की आवाज मेरें कानों में रह-रहकर सुनाई दे रही थी, पूरी रात चैन से मैं सो नहीं पाया था। बड़ी मुश्किल से नींद की बाहों में सिमटा ही था कि इन कमबख्त कुत्तों ने मुझें नींद का साथ छोड़ने पर मज़बूर कर दिया। मैंने आँखे खोली, उनींदा होकर एक लंबी सी उबासी ली। मौसम कुछ ठीक था, रोज़ की तरह कड़कड़ाती हुई सर्दी आज नहीं आई थी। ठंडी हवाएँ जरूर कुछ हद तक सर्दी का विकल्प बनकर बह रही थी। चार्जर प्लग से मैंने अपना ओप्पो स्मार्ट फ़ोन निकाला जो पूरा चार्ज भी नहीं हुआ था, शायद रात मोबाइल और मैं बड़ी लंबी गुफ़्तगू कर चुके थे। मेरा एक ही तो अपना है जो कभी मुझसे ऊबता नहीं है, अनिमेष सुनता रहती मेरी बेफिजूल बातें , जो झेलता है मुझें कभी ग़ुस्सा भी नहीं करता, नहीं कहता मुझकों एक लफ्ज़ तल्ख़ी भरा औऱ लिखता रहता मेरें प्रेम पत्र। कुछ दोस्त महज़ सजीव नामक लेबल के मोहताज़ नहीं होते। वे निर्जीव होकर भी हमें संवेदनाओं का ज़ायका चखा जाते हैं। मैंने समय देख़ा अभी 7 बजकर 14 मिनट हो चुकी थी। इस वक़्त मैं हमेशा कॉलेज के लिए निकलता हूँ। बस में दोस्तों के साथ गप्पे लड़ाता, लड़कियों को हंसाने का हर संभव प्रयास करता हुआ मैं कितना खिल उठता था अंदर तक। मेरे दिल का बसन्त सा था वो मौसम।ल न जानें क्यों मेरें भीतर आज एक अजीब सा डर था? मेरा रोमांच मेरी हसरतें सब के सब मुझें छोड़कर जैसे चले से गये थे।  शायद कल की घटना ने मुझें झंकझोर दिया था। कल की सुबह ऐसी तो नहीं थी। यह उदासी, यह अवसाद यह रुद्धन आख़िर कुछ ही पलों में कहां से आ गए?
कल कुछ हुआ यूँ था कि मैं हमेशा की तरह अंग्रेजी की क्लास में अपने सहपाठियों के साथ बैठा हुआ था। राकेश जी बड़ी इत्मीनान से हमें पढ़ा रहे थे। आज वो क्लास में नहीं आई थी। पूजा नाम है उसका। हमेशा कॉलेज आती है। अच्छी लड़की है। हर मामलें में हर क्षेत्र में उसका कोई सानी नहीं है। खेल से लेकर पढ़ाई तक वो अव्वल रही है। मैं बहुत प्यार करता रहा उससे, अब भी करता हूँ। वो भी तो करती थी अब पता नहीं। मेरा आज मन नहीं लग रहा था क्लास में। सब कुछ ऊपर से जा रहा था। राकेश जी शायद समझ चुके थे कि पवन आज क्लास में नहीं कहीं बाहर है। लेकिन उन्होंने मुझे बाहरी दुनियां से वापिस लाने की कोशिश नहीं की घूमने दिया रोमांचक अतीत की यादों में। क्लास ख़त्म हो चुकी थी। मेरी नजरें उसको ही ढूंढ रही थी। हमेशा कॉलेज आने वाली वो मासूम सी लड़की कहाँ है? एक तो छुट्टियों के बाद आज कॉलेज एक सप्ताह बाद लगा था। दूसरा उसने इन सात दिनों में उसकी कॉल भी तो नहीं आई थी। आखिर बात क्या है?
कोई उत्तर नहीं… मैं मायूस सा घर लौट आया आज न बस में खिलखिलाहट थी और न ही लफ्फजियाँ। शाम के तक़रीबन साथ बज चुके थे। मैं अपने कमरें में सोने की तैयारी कर रहा था। तभी अचानक मेज पर पड़े मेरे फ़ोन की घण्टी बजी।
Unknown नंबर था। मैंने उठाया
“हेलो”
सामने से सिर्फ सुबकने की आवाज़ आ रही थी, कोई रो रहा था। फिर एक शब्द सुनाई दिया पवन… यह पूजा थी।
“हाँ” क्या हुआ पूजा..
“पापा ने मेरी शादी तय कर दी है। अलमारी में रखे तुम्हारे प्रेम पत्र माँ ने पढ़ लिए थे। उन्होंने पापा को बता दिया। पापा ने मेरा कॉलेज बंद कर दिया। मेरा मोबाइल भी तोड़ दिया। बड़ी मुश्किल से भैया के फोन से तुम्हें कॉल की है”
मैं अनिमेष सुनता रहा, मेरे पैरो तले ज़मीन नहीं थी जैसे
“मैं तुमसे बेहद प्यार करती हूं पवन, लेकिन तुम्हारी नहीं हो सकूंगी, तुम खुश रहना, यह मेरा आखरी कॉल है। और कभी लौटकर भी मेरी जिंदगी में आने की कोशिश मत करना प्लीज़ वादा करो मुझसे।
“मेरी जुबां हलख के चिपक सी गई थी।
उसने रोते हुए कहा bye
और फोन कट हो गया।
मुझे अफसोस इस बात का नहीं था  कि पूजा मेरी नहीं हो सकी बल्कि कोई माँ बाप अपनी औलाद के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं?
क्या प्रेम करना जुर्म है?
मैने बार बार फोन को उठाया उस अज्ञात नंबर को स्क्रीन पर देखता किन्तु उसके वादे ने मेरी उंगली को डायल वाले हरे रंग के बटन पर जाने से रोके रखा।
मैं तड़फता रहा पूरी रात..
..न जाने वो कहाँ होगी? किस हाल में होगी
इंतजार अब भी है वो आएगी जरूर आएगी…

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