PF पर घट सकती है ब्याज दरें, कटौती के पक्ष में वित्त मंत्रालय

सरकार ने लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती कर दी है, लेकिन पीएफ की ब्याज दर पर अभी संशय बरकरार है। वित्त मंत्रालय ने श्रम मंत्रालय से पीएफ पर 8.65 फीसदी की सालाना तय ब्याज दर पर पुनर्विचार को कहा है। वहीं कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) बढ़ोतरी वापसी लेने के पक्ष में नहीं है।
खबरों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी नियमों के अनुरूप नहीं है। ईपीएफओ के फंड का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। मंत्रालय ने यह भी तर्क रखा है कि पीएफ पर ऊंचे रिटर्न से बैंकों की कम ब्याज दरों पर लोन देने की क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है। खासकर लघु उद्योगों को महंगा कर्ज मिलने से नुकसान हो रहा है। महंगाई दर तीन फीसदी होने और रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में कटौती को देखते हुए बैंक चाहते हैं कि बैंक खातों पर जमा बचत पर ब्याज दर कम रखी जाए। वहीं ईपीएफओ के अलावा श्रमिक संगठन भी नहीं चाहते हैं कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का निर्णय वापस लिया जाए। ऐसे में श्रम मंत्रालय विचार-विमर्श के बाद कुछ दिनों में वित्त मंत्रालय को आधिकारिक राय से अवगत कराएगा। श्रम मंत्रालय के अधीन ईपीएफओ ने चुनाव के ठीक पहले घोषित किया था कि वह 2018-19 के लिए 8.65% ब्याज का भुगतान करेगा। लेकिन इस पर अभी तक वित्त मंत्रालय की मुहर नहीं लग पाई है। माना जा रहा है कि श्रम मंत्रालय तीन-चार दिनों में अपनी राय से वित्त मंत्रालय को अवगत कराएगा। इसके बाद साफ होगा कि ब्याज दर कितनी होगी।

पीएफ के ब्याज पर संशय बरकरार
बैंकों का कहना है कि पीएफ और अन्य योजनाओं की ब्याज दर में कमी न होने से लोग खातों में पैसा कम जमा रख रहे हैं। इस कारण वह कर्ज की दरों में कमी कर पाने की स्थिति में नहीं है। रिजर्व बैंक ने लगातार तीन मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दर में 0.75 फीसदी की कटौती की है, लेकिन बैंकों ने कर्ज की दरों में महज 0.15 फीसदी की कमी ही की है। इस कारण होम लोन, ऑटो लोन और अन्य प्रकार का ऋण लेने वाले ग्राहकों को राहत नहीं मिल पा रही है। उद्योग भी ब्याज दर कम न होने से परेशान हैं।

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