जिलाधिकारी की अध्यापकों से अपील, गुरू की भूमिका निभायें..

आजमगढ़ – मुख्यमंत्री उ0प्र0 योगी आदित्यनाथ जी द्वारा मण्डलीय समीक्षा बैठक में दिये गये निर्देश के क्रम में जिलाधिकारी नागेन्द्र प्रसाद सिंह द्वारा सिधारी स्थित प्रेक्षागृह में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापकों का उन्नमुखीकरण कार्यक्रम/कार्यशाला का दीप प्रज्ज्वलित तथा सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर शुभारम्भ किया गया।
उक्त कार्यक्रम/कार्यशाला के प्रथम पाली 10ः30 बजे से 1ः00 बजे तक विकास खण्ड अजमतगढ़, हरैया, महाराजगंज, कोयलसा, अतरौलिया एवं नगर क्षेत्र तथा द्वितीय पाली 2ः00 बजे से 4ः30 बजे तक विकास खण्ड अहरौला, तहबरपुर, फूलपुर, मिर्जापुर, पवई एवं मार्टीनगंज के प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण दिया गया।
जिलाधिकारी ने प्रधानाध्यापकों से कहा कि आपका कार्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं के बारे में भी बच्चों को जागरूक करना है। शिक्षक समाज के शिल्पकार होते हैं, मानव संसाधन के विकास एवं देश के विकास में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिलाधिकारी ने कहा कि वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि बच्चा मां की गर्भ से ही सीखने लगता है, इसलिए गर्भवती माॅ को भी इस बात ध्यान रखना चाहिए  तथा अपने आस-पास के माहौल को अच्छा बनाये रखना चाहिए। उन्होने प्रधानाध्यापको सें कहा कि महिलाओं का सम्मान करने के लिए बच्चों को अच्छे संस्कार दें।
जिलाधिकारी द्वारा समस्त प्रधानाध्यापकों को स्कूल चलो अभियान, नामांकन वृद्धि हेतु शारदा अभियान, गुणवत्तापरक शिक्षा, आयुष्मान भारत योजना, स्वच्छ भारत अभियान, सड़क/यातायात सुरक्षा तथा महिला सुरक्षा आदि बिन्दुओं पर विस्तार से बताया गया। उन्होने कहा कि स्कूल चलो अभियान 01 जुलाई 2019 से प्रारम्भ हो रही है, इस अभियान को सफल बनायें तथा छात्रों के नामांकन में वृद्धि करायें। उन्होने कहा कि प्रत्येक बच्चा/शिशु इस देश की इकाई है, जिससे राष्ट्र/समाज के विकास की सम्भावनायें जुड़ी है। उन्होने प्रधानाध्यापकों से कहा कि छात्र/छात्राओं के अवचेतन मन का विकास 12 वर्ष तक तेजी से होता है अतः छात्र-छात्राओं को 12 वर्ष तक अच्छी से अच्छी शिक्षा दें, जिससे छात्र/छात्रायें समाज के एक जिम्मेदार नागरिक बन सके, 12 वर्ष तक बच्चे अपने आस-पास के परिवेश को तेजी से ग्रहण करते है।
उन्होने प्रधानाध्यापकों से कहा कि आज हमारे देश के सामने पर्यावरण एक चुनौती का विषय है, हम सिर्फ पर्यावरण के लिए लेख, वार्तालाप आदि तो करते हैं, लेकिन पर्यावरण की सुरक्षा के लिए वृक्ष नही लगाते हैं। आज वृक्ष न लगने और वृक्षों की अन्धाधुन्ध कटाई से भूमि, जल, हवा से संबंधित चुनौतियां हमारे सामने आकर खड़ी हो गयी हैं। उन्होने प्रधानाध्यापकों से अपील किया है कि छात्रों को वृक्षारोपण के प्रति जागरूक करें, स्कूलों में गोष्ठी, नाटक के माध्यम से वृक्षारोपण के प्रति जागरूकता फैलायें, तथा बच्चों के अन्दर वृक्षारोपण के प्रति भाव जागृत करें तथा उनको राष्ट्रीय त्यौहार स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्रता दिवस तथा धार्मिक त्यौहार के साथ-साथ जन्मदिन, शादी की सालगिरह या किसी विशेष अवसर पर भी वृक्षारोपण करने के लिए प्रेरित करें, क्योंकि वृक्ष हमारे मित्र हैं, वृक्ष के बिना जीवन सम्भव नही है, इनसे हमे आक्सीजन प्राप्त होता है।
उन्होने कहा कि शिक्षक एक समाज की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, किसी भी राष्ट्र के लिए शिशु का समाजीकरण होना आवश्यक है। उन्होने प्रधानाध्यापकों से अपील किया कि छात्रों को इस प्रकार से शिक्षा दें कि छात्रों के अन्दर पर्यावरण जागरूकता, भावनात्मक जागरूकता, सामाजिक जागरूकता के साथ-साथ स्वावलम्बी प्रतिभाओं का विकास हो, जिससे छात्र आगे चलकर देश को सही दिशा में ले जा सके। उन्होने प्रधानाध्यापकों से यह भी कहा कि छात्रों मे ऐसा संस्कार विकसित करें, जिससे कि वे महिलाओं को आदर करें।
जिलाधिकारी ने कहा कि आज सारे संसाधन होने के बावजूद भी लोग अपने बच्चों को तीन हजार रू0 पाने वाले कान्वेन्ट टीचरों के भरोसे छोड़ दे रहे हैं, और अच्छे शिक्षित अध्यापकों पर आज हम लोग विश्वास नही कर रहे हंै।
उन्होने कहा कि आज हमारे स्कूलों का अच्छा संसाधन, अच्छे अध्यापक होने के बावजूद भी छात्रों को अच्छी शिक्षा नही मिल पा रही है, यह हमारे पूरे संगठन की असफलता है। यदि आप अध्यापक हैं तो आपको एक संवैधानिक रूप में रहकर छात्र/छात्राओं को अच्छी शिक्षा दें, तथा उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग करें तथा अपने स्कूलों में इतनी गुणवत्तायुक्त शिक्षा दें कि लोग सरकारी स्कूल की तरफ आकर्षित हों तथा अपने बच्चों को दाखिला करायें। इसी के साथ ही साथ जिलाधिकारी ने कन्या सुमंगला योजना, आयुष्मान भारत योजना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होने कहा कि उक्त योजना का लाभ दिलाने के लिए छात्र/छात्राओं के माता-पिता को प्रोत्साहित करें। उन्होने प्रधानाध्यापकों से कहा कि अपने-अपने स्कूलों में छात्र/छात्राओं को यातायात नियम, स्वच्छता आदि के बारे में भी जागरूक करें, जिससे कि छात्र/छात्राओं के जीवन में एक अच्छे संस्कार का विकास हो।
जिलाधिकारी ने प्रधानाध्यापकों से अपील किया कि आप सभी लोग गुरू की भूमिका निभायें तथा आप लोग अपने कर्तव्य तथा दायित्व को निष्ठापूर्वक करें।
यातायात पुलिस द्वारा बताया गया कि सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना सरकार की उच्च प्राथमिकता है, आज कल सड़क दुर्घटनायें अधिक संख्या में हो रही है, इसके लिए हमंे छात्र/छात्राओं को यातायात/सड़क सुरक्षा के नियमो के बारे में जागरूक करने की जरूरत है। उन्होने प्रधानाध्यापकों से कहा कि सड़क सुरक्षा/यातायात नियमों के बारे में जागरूक करने के लिए अपने स्कूलों में भी छात्र/छात्राओं को जागरूक करें।
उन्होने सड़क सुरक्षा नियमों के अन्तर्गत बताया कि यातायात नियमो का पालन करें, सड़क दुर्घनाओं से बचें/बचायें, नाबालिकों को वाहन न चलाने दें, दोपहिया वाहन चलाते समय हेल्मेट का प्रयोग करें, चार पहिया वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात न करें, नशा/नींद की हालत में गाड़ी न चलायें, वाहन चालक एवं बगल में बैठने वाले व्यक्ति के लिए भी सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य है, दोपहिया वाहन पर ट्रीपल राइडिंग न करें, बिना वैध लाइसेंस के गाड़ी न चलायें, ध्यान रखें कि समय बहुमूल्य लेकिन जीवन अमूल्य है, दायें या बायें मुड़ने से पूर्व संकेत अवश्य दें तथा निर्धारित गति सीमा से अधिक गति से वाहन न चलायें।
स्वच्छता के बारे में जिला पंचायत राज अधिकारी के तरफ से प्रीति सिंह जिला समन्वयक द्वारा विस्तार से बताया गया कि स्कूलों में स्वच्छता के प्रति बच्चों को किस प्रकार से जागरूक किया जाय।
एडीशनल सीएमओ द्वारा संचारी रोग के बारे में बताया गया कि 01 जुलाई से संचारी रोग पखवाड़ा प्रारम्भ हो रहा है, आप सभी प्रधानाध्यापक बच्चों को स्वास्थ्य एवं उनसे जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूक करें तथा बतायें कि बरसात के मौसम में पानी को गरम करके पीयें।
इस अवसर पर बीएसए देवेन्द्र कुमार पाण्डेय, जिला सूचना अधिकारी डाॅ0 जितेन्द्र प्रताप सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी इफ्तेखार अहमद, समस्त खण्ड शिक्षा अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे।
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