नई शिक्षा नीति के लिए अपने सुझाव कब भेजेंगे ?

शिक्षा नीति 2019 के लिए पूरी माथापच्ची कर के लखनऊ विवि से लौटे।
प्रस्तावित शिक्षा नीति के लिए आप सब लोगों के पास 31 जुलाई तक केंद्र सरकार के पास अपने सुझाव-सलाह व विचार भेजने का पर्याप्त समय है। फिर मत कहियेगा भविष्य में, कि सरकार की यह शिक्षा प्रणाली गड़बड़ है। जनता को सरकार ने भरपूर मौका दिया है, इस काम के लिए। इस काम में जुटी भारतीय भाषा मंच के अग्रणी व भाषा विज्ञानी तथा महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विवि, वर्धा के प्रो वृषभ प्रसाद जैन व अपने पत्रकार मित्र (पत्रिका डॉट कॉम के उत्तर प्रदेश के संपादक)  महेंद्र प्रताप जी का आग्रह टाल न पाया। आज देश के कोने कोने से कई विद्वान जुटे। इस चिंतन-मनन में मैंने भी दो बिंदु सुझाये। उन्हें जल्द ही लिपिबद्ध करूंगा।
एक तो, देश में बार काउंसिल, मेडिकल कौंसिल, फार्मेसी कॉउंसिल, इत्यादि की तर्ज़ पर पत्रकारों के लिए भी सार्थक कॉउंसिल गठित हो। जो पाठ्यक्रम की रचना के साथ साथ पत्रकारिता पेशा अपनाने वालों के लिए पहले रजिस्ट्रेशन कर सके। रजिस्ट्रेशन खत्म करने का भी अधिकार हो।
दूसरा, कैरियर ओरिएंटेड शिक्षा से कहीं ज्यादा जरूरी है, कल्चर ओरिएंटेड शिक्षा। जीव दया से लेकर जीवों के अधिकार सुरक्षित रखवाने में एक नागरिक के कर्तव्य क्या हैं, को भी अनिवार्य नैतिक शिक्षा में समाहित किया जाये। नहीं तो वृद्धाश्रम और पशु आश्रय स्थल भी भविष्य में दिखने से रहे। बुजुर्ग होते ही हर व्यक्ति अपनी दुर्दशा से पहले ही मर जायेंगे। और, सहअस्तित्व से परे मानसिकता के होते जा रहे मनुष्य के आस पास क्या, दूर भी पशु पक्षी केवल संग्रहालय की विषय-वस्तु बन के ही रह जाएंगे।
अभी देश की शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए आप भी कुछ लिख कर सुझाव देना चाहते हैं तो भारतीय भाषा मंच की वेबसाइट पर भी आप लिख के दे सकते हैं।
                                                                                           -एच.पी.एस.तोमर
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