• Thu. Oct 21st, 2021

कितना निर्मम है समय, तु इस बच्चे के आंखों के खारेपन को पढ़ जरा!

ByArvind Singh

Mar 30, 2020

यह विनोद तिवारी का बच्चा है। इतना छोटा बच्चा समझ नहीं पा रहा है कि मेरी माँ क्यों रो रही है। उसे नहीं पता कि उसे क्या करना चाहिए?

32 साल का तिवारी दिल्ली की नवीन विहार कॉलोनी में अपनी पत्नी व दो बच्चों के किराए के मकान में रहता था। बिस्कुट व कुरकुरे आदि सामान की सेल्समैनी करके अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था।
लॉकडाउन के बाद काम बंद होने से आय का साधन समाप्त हुआ तो विनोद तिवारी शुक्रवार की देर रात्रि पत्नी व दो बच्चों को मोपेड पर बिठाकर यूपी के सिद्धार्थनगर घर के लिए चल पड़ा। अलीगढ़ के पास उसकी तबीयत बिगड़ी। वह मर गया।
न तो उसे मरने का शौक रहा होगा, न यह शौक रहा होगा कि गांव में जाकर कोरोना फैलाएं। कैंसर का इलाज करा चुका व्यक्ति दिल्ली में भूख से परिवार के मर जाने की नौबत देखकर भागा होगा और आधे रास्ते में मर गया।

कहानी यहीं खत्म नहीं होती। उसके शव को कोई पहुँचवाने वाला नहीं था। अधिकारियों ने कहा कि यहीं जो करना हो कर दो। देर तक बच्चो को शव के पास बैठे देख एक मुस्लिम सब इंस्पेक्टर को तरस आई। उसने 15 हजार रुपये खुद देकर गाड़ी तय की।

कहानी आगे और भी है। इस कर्फ्यू में जो शव ले जाने का साहस दिखा पाए, वह दोनों भी नदीम और छोटे नाम वाले थे।
【सत्येंद्र ps】सोशल मीडिया से

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी »