• Thu. Oct 21st, 2021

गांधी और खादी के बीच साज़ की ऊँची उड़ान..

Byadmin

Oct 3, 2021

फैशन का ब्रांड बन जब आधुनिकता व पुरातन के चोले में सौन्दर्य, कैटवॉक करने लगा तो लाइट की दुधिया रौशनी में नहाई माडलों के दमकते- चमकते चेहरे और लिबास विशेष आकर्षण के केंद्र बनते जा रहे थे, जो साज़ फाउंडेशन के खादी के विशेष डिजाइनर कपड़े थे.

 

‘जो रोकना हो उनकी उड़ानों को/तो ऊँचे कर लो आसमानों को’
@ अरविंद सिंह की रिपोर्ट
यह 2 अक्टूबर की एक बरसाती शाम थी. मंच पर गांधी और खादी दोनों थे लेकिन उनके बीच सियासत न थी, बल्कि यहाँ प्रतिभा और कला के बीच, शिल्प और सर्जना का अदभुत प्रदर्शन था. शिल्प था, शिल्पकार था और उनका सम्मान था.
गांधी की खादी थी तो शास्त्री का सादगी और इमान था. यहाँ डिजाइनर थें उनके डिजाइन थे लेकिन दोनों ही गांधी के खादी में लिपटे थें.


क्योंकि यहाँ गांधी के खादी का ‘फैशन शो’ चल रहा था. और उस डिजाइनर लिबास में लिपटा सौन्दर्य का दमकता-चमकता प्रदर्शन था, तो नन्हें और मासूम हुनरबाजो़ की प्रतिभा का उड़ान.
शाम का समय, नगर के राहुल सांकृत्यायन प्रेक्षागृह सभागार की सीटों पर बढ़ती जा रही भीड़ यह बता रही थी कि आजमगढ़ में कला और शिल्प के उपासकों के लिए मौसम की बांधा कभी रूकावट नहीं बनती. बरसाती मौसम में भी कला के पारखी और सर्जना के कद्रदान आ ही जाते हैं और आज भी आजमगढ़ इस सभागार में दिख रहा था. सामने मंच पर जब इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और भारतीय शिक्षा परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष मा०-एनपी सिंह और वाईपी सिंह ने गांधी और शास्त्री की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर दिया तो साज फाउंडेशन ने कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत कर दिया.
मनन पांडेय ने जैसे ही नृत्य का प्रदर्शन शुरू किया. लोग इस बच्चे की नृत्य कला में सम्मोहित होते जा रहे थे, लोगों को तब पता चला की नृत्य समाप्त हो गया. जब संगीत की लहरिया अचानक से बंद हो गयीं.


बाद में साज़ ने जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत कलाकारों, सामाजिक किरदारों को सम्मानित किया.
लेकिन जब वह अपने मूल कार्यक्रम खादी फैशन शो की ओर आगे बढ़ा तो लोग बिलकुल शांत होकर इस फैशन परेड में डूबते चले गएं.

फैशन का ब्रांड बन जब आधुनिकता व पुरातन के चोले में सौन्दर्य, कैटवॉक करने लगा तो लाइट की दुधिया रौशनी में नहाई माडलों के दमकते- चमकते चेहरे और लिबास विशेष आकर्षण के केंद्र बनते जा रहे थे, जो साज़ फाउंडेशन के खादी के विशेष डिजाइनर कपड़े थे. यह साज़ का मंचीय साज़ था, जो एक कस्बाई शहर की सरहदों को तोड़ एक महानगरीय और पेशेवर संस्कृति होने का भ्रम पैदा कर रहा था. नगर के लड़के लड़कियां और बच्चों को माडलिंग के लिए इस मंच पर उतारा गया था. जिसमें चिकित्सक, शिक्षक और शिक्षिकाओं के साथ उनके बच्चे भी थे. यह एक अदभुत प्रयोग था और प्रयोगकर्ता बड़ी तल्लीनता और पेशेवर अंदाज में अपने इस ‘फैशन-शो’ से लोगो के भीतर डिजाइनर कपड़ों के प्रति ललक और आकर्षण पैदा कर रहे थे, जो इस शो का उद्देश्य भी था. इस संदर्भ में यह खादी फैशन शो सफल और सार्थक भी था.
आखिर में जब मुख्य अतिथि के रूप में एनपी सिंह बोलना शुरू किया तो पूरा सभागार बिल्कुल शांत एक-एक शब्द को सुनने में मंत्रमुग्ध सा होता जा रहा था. उन्होंने कहा गांधी की खादी केवल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में आंदोलन का हथियार भर नहीं था बल्कि हमारे समाज की आर्थिक रीढ़ के साथ सांस्कृतिक चेतना की जमीन भी थी. खादी फैशन की राह पर भले पिछड़ गया लेकिन उसे साज़ फाउंडेशन जैसे हुनर और शिल्प के हाथों निखार कर आधुनिक दौर का फैशन बनाया जा सकता है, जिसे साज़ ने साबित कर दिखाया है. यह हमारे आर्थिक हितों को पूरा कर सकता है. गांधी का खादी हमारे दौर की आर्थिक समस्या का एक स्थायी समाधान बन सकता है.
आखिर में साज़ फाउंडेशन की डा० संतोष सिंह ने आगत जनों का आभार व्यक्त किया.बेहद मुश्किल समय में हुए इस सफल आयोजन से भावुक डा० संतोष के शब्द उनकी भावनाओं को प्रकट नहीं कर पा रहे थे. लेकिन उन शब्दों का असर मंच के सामने बैठे उनकी चिकित्सक पति के चेहरे पर पढ़ा जा सकता था. इस सफल आयोजन के लिए कैसे इस परिवार और बच्चों ने कठोर मेहनत किया था, उसका सुकून उनकी शब्दों की भाषा और देह की भाषा में पढ़ा जा सकता था. साज़ फाउंडेशन आजमगढ़ के हुनर और शिल्प की उम्मीद बन चुका है, संतोष सिंह और उनके कलाकार उस उम्मीद की नई उड़ान. बधाइयाँ…

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी »