किसान का ये देश था ये देश है किसान का!

कृषि प्रधान
************

किसान का ये देश था
ये देश है किसान का!

बता दिया
जता दिया
ज़मीन पर
झुका दिया
घमण्ड के
पहाड़ को/
उतार कर
दिखा दिया
रंगे हुए
सियार की
मृगेंद्र सी
दहाड़ को/
बिके हुए
झुके हुए
बग़ैर रीढ़
के ग़ुलाम
हँस रहे
चियार दाँत
लोकतंत्र की
फटी हुई
सी अस्तीं
के साँप
आज सर
झुकाए हैं
ग़ज़ब तमाचे
खाए हैं/
बता दिया
किसान ने
धरा के
नौजवान ने
यहाँ नहीं
कोई ख़ुदा/
ये देश
देवताओं का
अनेक देवता
अनेक देवियों
को पूजता
जो भिन्न
काल खण्ड
भिन्न भिन्न
भूमि खण्ड
और भिन्न
सी परिस्थिति
में अवतरित
हुए यहाँ
बताने को
सिखाने को
कि ज़िन्दगी
महान है
नहीं कोई
ग़ुलाम है
ये लोकतंत्र
की ज़मीन
पुकार कर
सुना रही
उठे तो
लोकतंत्र है
झुके तो
भीड़तंत्र है
उठो चलो
बढ़ो बढ़ो
कि जबतलक
स्वराज न
मिले तुम्हे
रुको नहीं
ये फासले
ये दूरियां
क़दम क़दम
मिटाएंगे
तभी तो
हम बताएंगे
ये देश ही महान है
ये देश ही महान था
किसान का ये देश था
ये देश है किसान का..!!

19 नवम्बर 2021
ओमा The अक्©

(तीन काले कृषि कानून वापसी की घोषणा पर कृषि आंदोलन को समर्पित)

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी »