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इंटरव्यू किसी का, रख लिया किसी को… नियमों को किनारे रख हुई संयुक्त निदेशक की नियुक्ति

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लखनऊ। चिकित्सा शिक्षा विभाग में संयुक्त निदेशक पद के लिए साक्षात्कार देने वालों को दरकिनार कर दिया गया। यही नहीं, जिसने साक्षात्कार तक नहीं दिया, उस चहेते को नियमों की अनदेखी कर संयुक्त निदेशक बना दिया।

चिकित्सा शिक्षा व प्रशिक्षण महानिदेशक ने 13 जनवरी 2025 को सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों, हृदय रोग संस्थान और जेके कैंसर संस्थान कानपुर के निदेशक को पत्र भेजा। इसमें अपर निदेशक के एक पद और संयुक्त निदेशक के दो पद के लिए इच्छुक चिकित्सा शिक्षकों के आवेदन भिजवाने का निर्देश दिया।

अपर निदेशक पद के लिए बांदा के राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रो. डॉ. गुलजारी लाल निगम और प्रयागराज के प्रो. डॉ. खुर्शीद परवीन ने आवेदन किया। संयुक्त निदेशक पद के लिए कन्नौज से डॉ. मधुलिका यादव, अंबेडकरनगर से डॉ. रीतेश कुमार राय, सहारनपुर से डॉ. अमित मोहन वाष्र्णेय और डॉ. दीपेश कुमार ने आवेदन किया।

आवेदकों को 11 फरवरी 2025 को महानिदेशालय में साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। 30 मई को जारी परिणाम में अपर निदेशक के लिए आवेदन करने वाले डॉ. गुलजारी लाल निगम का चयन संयुक्त निदेशक पद के लिए कर दिया गया। जीएसवीएम कॉलेज कानपुर के फार्मेसी विभाग के सह आचार्य डॉ. सचिन कुमार को संयुक्त निदेशक पद पर चयनित किया गया है। डॉ. सचिन पहले से महानिदेशालय में संबद्ध थे। उनका नाम संयुक्त निदेशक पद के लिए साक्षात्कार देने वालों की सूची में भी नहीं था।

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का कहना है कि नियमों की अनदेखी की होगी जांच संयुक्त निदेशक पद पर नियुक्ति में नियमों की अनदेखी हुई है तो मामले की जांच कराई जाएगी। विधिक प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

महानिदेशक किंजल सिंह का कहना है कि चयन कमेटी करती है। मुझे जानकारी नहीं है। इस मामले में अपर निदेशक ही बता सकेंगे।

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