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प्रदेश में ढाई करोड़ से ज्यादा और मतदाताओं को नोटिस देने की तैयारी

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लखनऊ। यूपी में ढाई करोड़ से ज्यादा और मतदाताओं को नोटिस देने की तैयारी है। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान खेल करते हुए उन्होंने वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान (मैपिंग) के लिए किसी और को अपना पिता दिखा दिया। इतना ही नहीं तमाम मतदाता ऐसे हैं, जिन्होंने मैंपिंग वाले कॉलम में संबंध तो पिता का बताया है, लेकिन नाम माता का लिखा है। इस तरह की तमाम त्रुटियों को असंगत डाटा में रखते हुए चुनाव आयोग ने इन्हें भी नोटिस भेजने का फैसला किया है।

उदाहरण के तौर पर 27 अक्तूबर 2025 को फ्रीज की गई मतदाता सूची में मतदाता राकेश के पिता का नाम सुरेंद्र है, लेकिन उसने मैपिंग वर्ष 2003 के जिस ब्योरे से कराया है, उसमें मतदाता का नाम तो राकेश ही है, पर पिता का नाम राजेंद्र है। कई मतदाताओं ने तो उन नामों से भी मैपिंग करा दी है, जो काफी जरा भी मिलते-जुलते नहीं हैं। इसी तरह से पिता-पुत्र या दादा-पोते की उम्र में असमान्य तौर पर अंतर है। अधूरे नाम या नाम की स्पेलिंग में अंतर के मामले तो बहुत ही बड़ी संख्या में आए हैं।

चुनाव आयोग के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, इस तरह की 7-8 तरह की असंगतियों (लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी) को चिह्नित कर लिया गया है। इस तरह के लोगों की संख्या ढाई करोड़ से ज्यादा होने की आशंका है। पहले चरण में उन 1.04 करोड़ मतदाताओं को दिए जाने वाले नोटिस की सुनवाई होगी, जिन्होंने वर्ष 2003 की सूची से मैपिंग करवाते हुए अपना डाटा नहीं भरा है। अगले चरण में इन ढाई करोड़ से अधिक मतदाताओं को भी नोटिस जारी होगा। नोटिस चरण, दावों और आपत्तियों के निस्तारण के लिए आयोग के पास 27 फरवरी तक का समय है। आयोग के सूत्र बताते हैं कि इनके मामले में फरवरी में विचार होगा। पूरे देश में इस तरह की असंगति वाले मतदाताओं की संख्या करीब 20 प्रतिशत बताई जा रही है, लेकिन यूपी में इनकी संख्या इससे ज्यादा होने की ही आशंका जताई गई है।

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