कफ सिरप…एक रुपये प्रति बोतल बनाता था इनवॉइस, वाराणसी का फर्म संचालक भदोही में अरेस्ट; 12 करोड़ का लेनदेन
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भदोही। कालीन नगरी में कोडिन कफ सिरप मामले में पुलिस ने शनिवार को पहली गिरफ्तारी की। औराई के माधोसिंह स्टेशन के पास से पूर्णा फर्म का संचालक शैलेंद्र तिवारी निवासी भिखारीदास लेन भारतेंदु भवन वाराणसी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने 12 करोड़ से अधिक के लेनदेन और फर्जी ईवे बिल बनाने की बात स्वीकार किया। आरोपी पर एनडीपीएस एक्ट में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने जेल भेज दिया।
औषधि निरीक्षक कुमार सौमित्र ने नवंबर 2025 में चौरी और औराई थाने में पांच फर्मों के खिलाफ तहरीर दिया। जिसमें यह बताया गया कि भदोही में फर्मों की तरफ से नशे के लिए कोडिन कफ सिरप का कारोबार किया गया।
अपराधिक षड़यंत्र के तहत विधि विरुद्ध तरीके से कूटरचित एवं फर्जी विक्रय बीजकों के माध्यम से क्रय-विक्रय किया गया। पुलिस ने मामले में ओमप्रकाश कसेरा निवासी पियरीकला, चेतगंज वाराणसी, अंशिका गुप्ता निवासी स्टेशन रोड परसीपुर थाना चौरी, दिलीप कुमार उमर निवासी आजाद नगर नईबाजार, अमन कुमार निवासी जगतगंज वाराणसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किया।
पुलिस की विवेचना में शैलेंद्र तिवारी का नाम सामने आया। जिसमें पाया गया कि संबंधित फर्मों के लेनदेन का लेखाजोखा शैलेंद्र ही देखता था। मुखबीर की सूचना पर माधोसिंह स्टेशन के पास से आरोपी शैलेंद्र तिवारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी पर एनडीपीएस एक्ट की धारा भी बढ़ाई।
पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि आरोपी फर्म एवं संचालिका के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया था। माधोसिंह के पास से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उस पर धाराएं बढ़ाई गई है। शेष आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।
फर्जी ई वे बिल बनाओ, अच्छा कमाओगे
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि साल 2024 में वाराणसी की दवा मंडी में मुझे एक व्यक्ति मिला। उसने मुझे दिल्ली की एक फर्म से मिलवाया। दवा व्यापारी ने मुझे बताया गया कि कोडीन सिरप की सप्लाई कागजों में दिखानी है। सिर्फ इनवार्ड-आउटवार्ड दिखाकर फर्जी ईवे बिल बनाना है।
एक कोडिन कफ सीरप का बिल बनाने के लिए मुझे एक रुपये मिलते थे। मैने कई फर्मों से कोडीन सीरप प्राप्त करना कागजों में दर्शाया। उक्त फर्मो को कोडीन सिरप की लगभग 10 लाख बोतल सप्लाई मेरे द्वारा दिखाई गई है। मै सभी प्रपत्र फर्जी कूटरचित तरीके से तैयार कराता था। उसमें हम लोग फर्जी तरीके से कोई भी वाहन रजिस्ट्रेशन लगा देते थे।
कैश डिपॉजिट जैसे ही खाते में पैसा जमा होता था वह तत्काल कुछ ही घंटे में सभी धनराशि आरटीजीएस व एनईएफटी के माध्यम से मेरी फर्म के खाता में चली जाती। मेरे खाते में लगभग तीन करोड़ रुपए आए थे। इसके अलावा कई फार्मो से भी मेरे खाते में पैसे भारी मात्रा में आए।
मेरे खाते में वर्ष 2025 मे 12 करोड़ 13 लाख 38 हजार 102 रुपये की जमा और निकासी की गई। इसके लिए मुझे 12 से 15 लाख प्राप्त हुए। मैंने लालचवश यह कार्य किया था। यह पूर्णा नाम की फर्म मैने अपनी पत्नी पूजा तिवारी के नाम पर ली जरूर थी, लेकिन इसका संचालन मैं कर रहा था।
