50 हजार भेज दो ट्रांसफर रुकवा दूंगा…’, फर्जी BSA सहित दो शातिर अरेस्ट; शिक्षिका से ऐंठे थे रुपये
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वाराणसी। शिक्षकों को ट्रांसफर और पोस्टिंग की धमकी देकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों खुद को बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) या विभागीय अधिकारी बताकर शिक्षकों से ठगी करते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बरेली जनपद के फतेहगंज पश्चिमी थाना क्षेत्र के रहपुरा जागीर निवासी नरेंद्र पाल और सीवीगंज टेवुलिया निवासी सौरभ के रूप में हुई है। पुलिस तीसरे वांछित आरोपी विक्रम मिश्रा निवासी आर्य नगर, दिल्ली की तलाश में जुटी है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर दिया है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने करीब 90 शिक्षकों को डरा-धमकाकर डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक की ठगी की है। उनके पास से शिक्षकों का डाटा, संबंधित कागजात, एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक बरामद किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर ने बताया कि 21 मार्च को घोसी क्षेत्र के रघौली निवासी रोली ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार उनकी मां चिंता देवी दोहरीघाट स्थित कंपोजिट विद्यालय रियांव में सहायक अध्यापिका हैं। 16 फरवरी को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को शिक्षा विभाग से जुड़ा अधिकारी बताते हुए ट्रांसफर की धमकी दी। कॉलर ने कहा कि लखनऊ में एक कैंसर पीड़ित शिक्षक की नियुक्ति दोहरीघाट में होनी है, ऐसे में यदि 50 हजार रुपये तुरंत भेज दिए जाएं तो उनका ट्रांसफर रोका जा सकता है। डर के कारण शिक्षिका ने बताए गए स्कैनर पर रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपी का मोबाइल बंद हो गया, जिससे ठगी का एहसास हुआ। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस की संयुक्त टीम ने भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों की पहचान की। लोकेशन ट्रेस कर 12 अप्रैल की शाम करीब छह बजे बरेली से दोनों को उनके घर से गिरफ्तार किया गया और 13 अप्रैल को घोसी लाया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे इंटरनेट के माध्यम से शिक्षकों से संबंधित खबरें और शिकायतें खोजते थे। जिन शिक्षकों के खिलाफ कोई जांच या ट्रांसफर की प्रक्रिया चल रही होती, उनके क्षेत्र के ग्राम प्रधान का नंबर इंटरनेट से प्राप्त कर उनसे संपर्क किया जाता था। खुद को बीएसए या विभागीय अधिकारी बताकर ग्राम प्रधान से शिक्षक का नंबर लिया जाता और फिर शिक्षक को फोन कर डराया जाता था। आरोपी स्कैनर के माध्यम से पैसे मंगवाते थे और गिरोह के अन्य सदस्य खातों के जरिए रकम निकालकर आपस में बांट लेते थे। पुलिस के अनुसार इस गिरोह के खिलाफ हरियाणा, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और बरेली समेत कई जिलों में पहले से मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस फरार आरोपी की तलाश में दबिश दे रही है और गिरोह के अन्य सदस्यों की भी जांच की जा रही है।
