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सांसदों की चौखट तक पहुंचा टीईटी अनिवार्यता का फैसला, 15 नवंबर के बाद बड़े आंदोलन की तैयारी

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लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरुद्ध ज्ञापन देने का अभियान जारी है। इस क्रम में अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले मंगलवार को कैसरगंज से सांसद करण भूषण सिंह, फैजाबाद से सांसद अवधेश प्रसाद व राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी को ज्ञापन दिया।

इस देशव्यापी मोर्चे में शामिल संगठनों के माध्यम से शिक्षकों ने सांसदों को ज्ञापन देकर केंद्र सरकार पर इसके लिए दबाव बनाने की मांग की कि वे पहल करे। ताकि देश भर के लाखों शिक्षकों को राहत मिल सके। अलग-अलग स्थानों पर पदाधिकारियों विनय तिवारी, डॉ. संजय सिंह, डॉ. अमित सिंह के नेतृत्व में ज्ञापन दिया गया। इसमें शिक्षकों ने टीईटी अधिनियम लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इससे छूट देने के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।

सांसदों को बताया गया कि प्रदेश में शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने की तिथि 29 जुलाई 2011 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता के फैसले से छूट देने के लिए देशव्यापी आंदोलन चल रहा है। सांसदों ने आश्वासन दिया कि वे इस मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री से मिलकर समाधान का प्रयास करेंगे।

वहीं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी और जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में इस मोर्चे की राज्य स्तरीय बैठक 15 नवंबर को आयोजित की गई है। इसमें सभी घटक संगठन शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि देश के सभी शिक्षक संगठनों को एक मंच पर लाने की कवायद के क्रम में मोर्चा गठित किया गया है। इसमें कई संगठन जुड़ चुके हैं। जो छूटे हैं उन्हें भी जोड़ने का प्रयास चल रहा है। इसी क्रम में अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि जल्द ही दिल्ली कूच की घोषणा की जाएगी।

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