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आज़मगढ़ : विधान परिषद में उठा आजमगढ़ के ‘बडैला ताल’ के पर्यटन विकास का मुद्दा

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नियम-115 के तहत रामसूरत राजभर ने सदन का ध्यान कराया, पूर्वांचल की अमूल्य जलधरोहर बताया

नौकायन, वाटरगेम, पक्षी विहार और सुंदरीकरण की मांग, जैव विविधता संरक्षण पर जोर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में आजमगढ़ जनपद के सदर तहसील क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध जल पर्यटन स्थल ‘बडैला ताल’ के समग्र विकास का मुद्दा उठाया गया। सदस्य विधान परिषद रामसूरत राजभर ने नियम-115 के अंतर्गत सूचना देते हुए सदन का ध्यान इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलसरोवर की ओर आकृष्ट कराया। उन्होंने बताया कि लगभग 16 वर्ग किलोमीटर में फैला बडैला ताल मेंहनगर, सुम्भी, शाहखजूरा, देवइत और गंभीरवन जैसे कई गांवों तक विस्तृत है। यह न केवल आजमगढ़ बल्कि पूरे पूर्वांचल का एक विशाल जलस्रोत है, जो गोरखपुर के रामगढ़ ताल से भी बड़ा बताया जाता है। ताल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सफेद व गुलाबी कमल पुष्पों, प्रवासी साइबेरियन पक्षियों और जलक्रीड़ा के मनमोहक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। सदन को अवगत कराया गया कि बडैला ताल वर्ष भर पानी से भरा रहता है, जिससे क्षेत्र का भूजल स्तर संतुलित बना रहता है। यहां कमलगट्टे की खेती बड़े पैमाने पर होती है, जिसकी आजमगढ़, बनारस और काशी विश्वनाथ मंदिर तक भारी मांग है। यह ताल स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। रामसूरत राजभर ने कहा कि ताल के आसपास अटल आवासीय विद्यालय, आरटीओ कार्यालय, खाद्य निगम, नवनिर्मित राज्य विश्वविद्यालय जैसी कई महत्वपूर्ण सरकारी संस्थाएं स्थित हैं, इसके बावजूद पर्यटन की दृष्टि से इस क्षेत्र का अब तक समुचित विकास नहीं हो पाया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि बडैला ताल का संपूर्ण पर्यटन विकास किया जाए। इसके अंतर्गत सुंदरीकरण, वाटर गेम्स, बच्चों के लिए पार्क, नौकायन, पक्षी आश्रय विहार, अतिथिगृह निर्माण सहित विभिन्न पर्यटन परियोजनाएं विकसित की जाएं, ताकि जैव विविधता का संरक्षण करते हुए क्षेत्र को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके।

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