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बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा: डीएम आवास पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री, अफसरों संग बैठक; सियासी हलचल भी तेज

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बरेली। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इस्तीफा देकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई मारपीट और यूजीसी कानून का विरोध किया। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें वह पोस्टर लेकर खड़े दिखाई दे रहे हैं। पोस्टर में लिखा है कि हैशटैग यूजीसी रोल बैक…, काला कानून वापस लो। शंकराचार्य और संतों को यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान। उनके इस्तीफे की खबर ने बरेली जिला प्रशासन समेत प्रदेश के प्रदेश के प्रशासनिक वर्ग में खलबली मचा दी। दोपहर करीब दो बजे सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफा देने की खबर आई। इसके बाद उनके आवास पर मीडिया और लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।

सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को मनाने के लिए एडीएम सिटी सहित कई अन्य पीसीएस अफसर उनके आवास पर पहुंचे। इन अफसरों ने कैमरे के सामने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अफसरों ने अलंकार अग्निहोत्री को इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपने निर्णय पर अड़े रहे। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट के आवास पर मेयर डॉ. उमेश गौतम, भाजपा के पूर्व विधायक सहित कई अन्य दलों के ब्राह्मण नेता पहुंचे। बरेली के महापौर उमेश गौतम ने कहा कि यूजीसी से संबंधित नए कानून में काफी कमियां हैं। उसमें सुधार अवश्य होना चाहिए।

पूर्व सांसद एवं सपा नेता प्रवीण सिंह ऐरन ने कहा कि एक वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी को इतनी मेहनत से हासिल की गई अच्छी सरकारी सेवा और पद से इस्तीफा देने की जो परिस्थितियां बनी हैं, वो इस ओर ध्यान आकर्षित करती हैं कि ये मुद्दा किसी जाति या धर्म का नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमा और संविधान का है। चाहे अधिकारी किसी भी बिरादरी से हो, कर्तव्य पालन पर दबाव या अपमान अस्वीकार्य है। शासन की असली ताकत राजधर्म और संवैधानिक मर्यादाओं में है। यह राजनीति नहीं, लोकतंत्र की आत्मा का प्रश्न है।

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