सावधान! ये दिल की बीमारी है, जान भी ले सकती है !!
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@ अरविन्द कुमार सिंह
हंसते-हंसते, नाचते-नाचते, गाते-गाते और बैठे-बैठे भी दिल की गति थम जा रही है। हर्ट अटैक के लगातार बढते मामले बेहद चिंताजनक तस्वीर बनाते जा रहें हैं। बुजुर्ग तो बुजुर्ग युवा पीढी भी इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा रहें हैं। सरकार का स्वास्थ विभाग इतनी तेजी से बढती हृदयाघात की समस्या पर कोई समुचित सलाह और कारण नहीं बता रहा है। कोरोना के बाद जिस तेजी से दिल की बीमारियां लग रहीं हैं और अचानक से नौजवानों की जाने जा रही हैं। यह युवा देश भारत के लिए बेहद चिंता जनक स्थिति है। क्या यह कोरोना वैक्सीन का दुश्प्रभाव है या कुछ और, जो भी है मौतों की दरें बेहद खतरनाक ढंग से बढती जा रही हैं।
भारत में — “Heart attack” से मौतें:-
NCRB डेटा का सार/मीडिया रिपोर्ट के अनुसार साल
2020 में 28,579 मौतें, साल 2021 में 28,413 मौतें, जबकि साल 2022 में यह आंकडा बढकर 32,457 मौतें हो गईं जो 2021 की तुलना में ≈12.5% की वृद्धि है। जबकि साल 2023 में~35,715 मौतें (रिपोर्ट्स में 35,637–35,715 के आसपास उद्धरण मिलते हैं; ≈ जो 10% वृद्धि है 2022 से)।
अब सवाल यह है कि कोरोना के बाद हार्ट अटैक क्यों बढ़े? (वैज्ञानिक कारण) :-
1. COVID-19 के बाद शरीर में लम्बे समय तक inflammation ये हृदय की मांसपेशियों और धमनियों को प्रभावित करता है।
2. ब्लड क्लॉट बनने की संभावना अधिक COVID मरीजों में महीनों तक D-dimer लेवल बढ़ा रहता है।
3. हार्ट मसल्स पर असर (Myocarditis / Micro-clots)
अचानक मृत्यु (sudden cardiac arrest) का खतरा बढ़ता है।
4. लाइफस्टाइल बदलाव और तनाव महामारी के बाद inactivity, वजन बढ़ना, तनाव—सबने जोखिम बढ़ाया।
5. Vaccination को लेकर भ्रम अब तक शोध में टीकों से हार्ट अटैक मौतें “significant स्तर पर बढ़ने” के प्रमाण नहीं मिले। जबकि मुख्य कारण COVID infection itself बताया गया है।
📌 कोरोना से पहले और बाद की तुलना (सरल तालिका)
वर्ष — हार्ट अटैक मौतें (भारत में)
2019 (Pre-COVID) ~28,000
2020 (COVID पहला साल)-28,579
2021 (COVID 2nd wave)-28,413
2022 (Post-COVID)-32,457
2023 (Post-COVID) ~35,700
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक है)
