Latest News

The News Complete in Website

आजमगढ़ में प्रभारी DIOS समेत छह पर एफआईआर

1 min read

अनुदान बहाली से पहले ही प्रधानाचार्य व शिक्षकों को दी गई मंजूरी, शासन नियमों की खुली अनदेखी

आजमगढ़। श्री देवानन्द संस्कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय, दानशनिचरा रामगढ़, आजमगढ़ में प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों के नियमविरुद्ध अनुमोदन के मामले में शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। संयुक्त शिक्षा निदेशक, आजमगढ़ मण्डल नवल किशोर के निर्देश पर प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) आजमगढ़ वीरेन्द्र प्रताप सिंह समेत छह लोगों के विरुद्ध शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।संयुक्त शिक्षा निदेशक द्वारा कोतवाली सदर को भेजे गए पत्र में बताया गया कि प्रभारी DIOS ने बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और शासन स्तर पर अनुदान बहाली का निर्णय हुए बिना ही विद्यालय में रिंकी यादव (प्रधानाचार्य), प्रियंका (साहित्य) एवं अल्का त्रिपाठी (साहित्य) के अनुमोदन की कार्यवाही कर दी। यह कार्यवाही उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर थी और उ0प्र0 माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद अधिनियम 2000 एवं विनियमावली 2009 के प्रावधानों के विपरीत पाई गई। पत्र में यह भी उल्लेख है कि अनुमोदन पत्र पर अधिकारी के हस्ताक्षर के नीचे किसी कार्यालय सहायक के हस्ताक्षर नहीं थे, जिससे पूरी प्रक्रिया संदिग्ध हो गई। मामला तब और गंभीर हो गया जब संयुक्त शिक्षा निदेशक से फोन पर बातचीत के दौरान DIOS ने पहले अनुमोदन निरस्त करने की बात कही, लेकिन बाद में वही अनुमोदन पत्र उनके संज्ञान में आया, जिसे व्हाट्सएप के माध्यम से भेजा गया। इसके बाद DIOS द्वारा जारी पत्र में यह दावा किया गया कि संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में तैनात प्रधान सहायक विधिचन्द्र यादव ने कूटरचित तथ्यों के आधार पर उन्हें गुमराह कर हस्ताक्षर कराए। हालांकि, विधिचन्द्र यादव ने अपने स्पष्टीकरण में किसी भी प्रकार की भूमिका से स्पष्ट इनकार किया है। दोनों अधिकारियों से प्राप्त स्पष्टीकरण के बाद संयुक्त शिक्षा निदेशक इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि पहले नियमविरुद्ध अनुमोदन जारी किया गया और बाद में उसे निरस्त किया गया, जिससे भविष्य में उच्च न्यायालय से वेतन भुगतान संबंधी आदेश मिलने पर विभाग और शासन को गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित विद्यालय वर्ष 2015 में अनुदान सूची में शामिल हुआ था, लेकिन 2016 में शिकायतों के बाद अनुदान रोक दिया गया। अनुदान बहाली का प्रकरण अब तक शासन स्तर पर लंबित है। इसके बावजूद केवल विद्यालय प्रबंधन के पत्र के आधार पर अनुमोदन किया जाना उ0प्र0 सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 के नियम-3 का उल्लंघन माना गया है। संयुक्त शिक्षा निदेशक ने आशंका जताई है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से विद्यालय प्रबंधन एवं संबंधित शिक्षकों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। तहरीर के आधार पर शहर कोतवाली पुलिस ने प्रभारी DIOS वीरेन्द्र प्रताप सिंह, प्रधानाचार्य रिंकी यादव, शिक्षक प्रियंका व अल्का त्रिपाठी, प्रधान सहायक विधिचन्द्र यादव तथा प्रबंधक श्रीकृष्ण मिश्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *