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आजमगढ़ : जिलाधिकारी ने तमसा नदी के किनारे स्थित महर्षि चन्द्रमा आश्रम का किया भ्रमण

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नदी के किनारे एवं आश्रम परिसर की आम जनमानस के साथ मिलकर जिलाधिकारी ने किया श्रमदान

आजमगढ़ 10 फरवरी। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने आज तमसा नदी के किनारे स्थित महर्षि चन्द्रमा आश्रम का भ्रमण किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी द्वारा नदी के किनारे एवं आश्रम परिसर की आम जनमानस के साथ मिलकर श्रमदान किया गया ।

जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में तमसा नदी 89 किमी0 में 111 ग्राम पंचायतों से होकर बहती है। जिलाधिकारी ने कहा कि आम जनजीवन में नदी का बहुत ही महत्व है, लेकिन तमसा नदी का आम जन जीवन में महत्व के साथ-साथ पौराणिक महत्व भी है। स्थानीय लोगों का मानना है की मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी जब 14 साल के वनवास के लिए निकले थे, तब पहली रात उन्होंने इसी तमसा नदी के किनारे गुजारी थी। उन्होने बताया कि तमसा नदी के किनारे महर्षि दुर्वासा, महर्षि दत्तात्रेय एवं महर्षि चंद्रमा का आश्रम है। महर्षि चंद्रमा के आश्रम में सालों भर टूरिस्ट एवं श्रद्धालु आते हैं, भ्रमण करते हैं एवं बड़ी संख्या में लोग पूजा-पाठ और तर्पण भी करते हैं। उन्होने बताया कि आगे आने वाली महाशिवरात्रि, सावन, छठ पर्व और अन्य कई मौके पर यहां मेला लगता है और उसी मेले में लाखों की संख्या में लोग प्रतिभाग करते हैं। महाशिवरात्रि और सावन में इस नदी का जल लेकर लोग मंदिरों में चढ़ाते हैं, कार्तिक पूर्णिमा के दिन बड़ी संख्या में लोग यहां स्नान करते है।

जिलाधिकारी ने बताया कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी लोग स्नान करते हैं, कपड़े भी धोते हैं, पशु को स्नान करवाते हैं, पशु इसका पानी पीते हैं, सिंचाई में इसका उपयोग होता है। उन्होने बताया कि यह नदी आम जीवन में बहुत महत्व रखती है, क्योंकि आम जनमानस इसके पानी का उपयोग करते हैं और साथ ही साथ इसका धार्मिक महत्व भी है, इसलिए जिला प्रशासन द्वारा इसमें आम लोगों का भी ध्यान आकर्षित किया गया कि जब आप जल से इतना जुड़े हैं तो इसके जल को गंदा न करें। इसी बिंदु को फोकस करके इस नदी के किनारे बसे 111 ग्रामांे के ग्राम प्रधानों और अन्य कर्मचारियों को बुलाकर गत वर्ष आजमगढ़ के हरिऔध कला केंद्र में एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया था, जहां लोगों से यह अपील की गई कि नदी आपके घर के बगल से गुजरती है, आप इसके जल का उपयोग करते हैं, अगर जल साफ रहेंगी, तो आपको अच्छा भी लगेगा, आपके स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होगा। इसी को लेकर एक मुहीम चलाई गई और जिसके फलस्वरूप इस नदी की साफ-सफाई के साथ ही नदी के किनारे जो इससे जुड़े हुए सरकारी जमीन थे, उसकी पैमाइश कराके अतिक्रमण को हटाया गया एवं जन सहयोग से वृक्षारोपण भी किया गया, जिसमें फलदार वृक्षों पर विशेष ध्यान दिया गया।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन का यह फोकस रहा कि आम जनों को नदी से जोड़ा जाए, उन्हें उनके मन में स्वामित्व दिया जाए कि यह नदी आपका है। उन्होने बताया कि गत वर्ष मानसून से पहले प्रथम चरण में और फिर मानसून के बाद दो चरण में इसकी सफाई हुई है, लेकिन नदी की अविरलता और निर्मलता सुनिश्चित करने के लिए आगे भी ऐसा किया जाना आवश्यक होगा, क्योंकि नदी आम जन से जुड़ी हुई है, इसलिए इसके लिए जन जागरूकता किया जा रहा है कि लोग नदी का स्वामित्व लें एवं मन से उसे अपना लें और रोजमर्रा की जिंदगी में नदी को गंदा ही न करें, कि साफ करने की जरूरत पड़े।

जिलाधिकारी ने कहा कि यहां पर बोर्ड लगाया गया है, जिसमें लिखा है कि गंदगी को नदी में ना डालें, यहां डस्टबिन रखे गए हैं, जो भी गंदगी हो, उसे डस्टबिन में डालें। जिला प्रशासन और आमजन के सहयोग से यह कार्य आगे भी किया जाएगा और एक समय ऐसा आएगा, जब लोग इतने जागरूक हो जाएंगे, कि खुद भी गन्दगी नही करेंगे एवं दूसरे को भी गन्दगी करने से मना करेंगे और तब हमारी तमसा अविरल एवं निर्मल दिखेगी। इस अवसर पर डीसी मनरेगा रामउदरेज यादव एवं अन्य संबंधित उपस्थित रहे।

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