आजमगढ़ में 27 साल पुराने शिया-सुन्नी दंगे के हत्या कांड में 12 दोषी करार
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला, सजा पर 17 फरवरी को होगी सुनवाई
मोहर्रम जुलूस से लौटते समय हुई थी अली अकबर की हत्या, 1999 में दर्ज हुआ था मुकदमा
आजमगढ़। जनपद के मुबारकपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 1999 में हुए शिया-सुन्नी दंगे के दौरान एक व्यक्ति की हत्या के मामले में अदालत ने 27 वर्ष बाद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय की अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई पूरी करते हुए 12 आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तारीख नियत की है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी नासिर हुसैन ने 30 अप्रैल 1999 को मुबारकपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तहरीर में बताया गया कि उनके चाचा अली अकबर निवासी पूरा ख्वाजा 27 अप्रैल 1999 से लापता थे। 28 अप्रैल को अली अकबर के पुत्र जैगम ने थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 30 अप्रैल को अली अकबर की सिर कटी लाश राजा भाट के पोखरे से बरामद हुई थी।
विवेचना के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि मोहर्रम के जुलूस से लौटते समय अली अकबर को सुन्नी संप्रदाय के कुछ लोगों ने मारपीट कर मौत के घाट उतार दिया था। इस मामले में पुलिस ने हुसैन अहमद निवासी हैदराबाद, मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब (सभी निवासी दुल्हनपुरा), अली जहीर, इरशाद (निवासी पूरासोफी), मोहम्मद असद, अफजल, अलाउद्दीन, दिलशाद तथा वसीम निवासी हैदराबाद के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में प्रेषित किया था।
मुकदमे के दौरान हाजी मोहम्मद सुलेमान, नजीबुल्लाह, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक तथा हाजी अब्दुल खालिक की मृत्यु हो गई। अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी फौजदारी प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी एवं एडीजीसी दीपक कुमार मिश्रा ने नौ गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने हुसैन अहमद, मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब, अली जहीर, इरशाद, मोहम्मद असद, अफजल, अलाउद्दीन, दिलशाद एवं वसीम को अली अकबर की हत्या का दोषी ठहराया। अब सभी दोषियों की सजा पर अंतिम निर्णय 17 फरवरी को सुनाया जाएगा।
