कम कीमत पर मिलेंगे शहरों में मकान, गांव-गांव तक जाएंगी सरकारी बसें; जानिए कैबिनेट के बड़े फैसले
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लखनऊ। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नये शहर प्रोत्साहन योजना के तहत प्रदेश के आठ शहरों में आवासीय योजनाओं के लिए सरकार ने 425 करोड़ रुपए देने का फैसला किया है। जिन शहरों को पैसा देने का फैसला किया गया है, उनमें बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर व मऊ शामिल हैं। इस धनराशि से शहरों में नई आवासीय योजनाएं शुरू करने के लिए भूमि की व्यवस्था की जाएगी। इससे संबंधित आवास विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
बता दें कि बड़े शहरों के साथ ही छोटे शहरों में भी प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण, नए शहर प्रोत्साहन योजना में विकास प्राधिकरणों को जमीन लेने को सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 20 साल के लिए पैसे दे रही है। कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के आठ शहरों को 425 करोड़ रुपये देने का फैसला किया गया है। वाराणसी को ग्राम गंजारी, हरपुर व शिवसागर और मढ़नी में जमीन लेने के लिए 200 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इससे वर्ल्ड सिटी एक्सपो भूमि विकास एवं गृहस्थान योजना वाराणसी विकास प्राधिकरण लाएगा। बरेली विकास प्राधिकरण में 150 करोड़ से आसपुर, खूबचंद, अडूपुरा, जागीर, अहिलादपुर, बरकापुर, कुम्हरा, कलापुर, मोहरनियां, नवदिया, कुर्मियांनव व हरहरपुर में जमीन ली जाएगी। उरई को 30, आवास विकास परिषद को चित्रकूट में भूमि लेने के लिए 20 करोड़ रुपये दिए गए हैं। आवास विकास परिषद को बांदा के लिए 30 करोड़, कटरा रोड प्रतापगढ़ के लिए 50 करोड़ रुपये दिए गए हैं। गाजीपुर के लिए 20 करोड़ रुपये दिए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट ने प्रदेश की 12,200 ग्राम सभाओं तक बस की सेवा पहुंचाने का फैसला लिया। इन बसों को परमिट व टैक्स से मुक्त रखा गया है। ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026’ के माध्यम से प्रदेश के हर गांव तक बस पहुंचेगी। पंचायत चुनाव से पहले कैबिनेट ने इस योजना के जरिये ग्रामीणों को तोहफा दिया है।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि अभी तक 12,200 गांवों तक बसें नहीं पहुंच रही थीं, लेकिन नई पॉलिसी के तहत प्रदेश की सभी ग्राम सभाओं तक बसों की उपलब्धता का फैसला लिया गया है। इससे ग्रामीण आबादी लाभांवित होगी। ये बसें चलाने की अनुमति निजी लोगों को मिलेगी। इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी, जिसमें सीडीओ, एसपी, एआरटीओ, एआरएम सदस्य होंगे। ये बसें रात में गांव में ही रुकेंगी। सुबह ब्लॉक व तहसील होते हुए सुबह 10 बजे तक जिला मुख्यालय तक पहुंचेंगी।
इस सेवा का लाभ विद्यार्थियों के अलावा कचहरी, ऑफिस या अपना उत्पाद शहर में बेचने जाने वाले लोगों को भी मिलेगा। करीब 5000 गांवों में ऐसी सड़कें हैं, जहां बड़ी बसों को मोड़ने में दिक्कत होती है। लिहाजा इन गांवों में छोटी बसें चलाई जाएंगी, जिनकी अधिकतम लंबाई सात मीटर और अधिकतम सीट क्षमता 28 होगी। सुबह 10 से शाम चार बजे तक इन बसों को डायवर्ट करेंगे। इसके बाद ये बसें दूरी के हिसाब से अधिकतम शाम 8 बजे तक गांव में पहुंच जाएंगी। इन बसों के ड्राइवर, कंडक्टर व क्लीनर आसपास गांव के लोग ही होंगे, जिससे रात में गांव में रुकने और सुबह आने में उन्हें परेशानी नहीं होगी। इन बसों की औसत आयु 15 वर्ष रहेगी, लेकिन पहले 10 साल के लिए ही इन्हें परिचालन की इजाजत दी जाएगी। परिवहन मंत्री ने बताया कि कमेटी स्थानीय स्तर पर किराया निर्धारण करेगी। इसका टिकट भी सस्ता रहेगा। योजना के तहत प्रत्येक आवेदक (जिस ब्लॉक के लिए उसने आवेदन किया है) को समस्त ग्राम पंचायत एवं रूट पर अपने विवेकानुसार वाहन संचालन करने तथा फेरों की संख्या का अधिकार होगा। बस संचालक ब्लॉक की प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिदिन कम से कम दो बार वाहन सेवा प्रदान करेगा। योजना के क्रियान्वयन के लिए आवेदन की स्क्रीनिंग 15 दिन में होगी। आवेदक को 15 दिन में वाहन उपलब्ध कराने होंगे। वहीं निर्धारित प्रक्रिया को 45 दिनों में पूरी की जाएगी। आवेदनों का परीक्षण एवं चयन कमेटी द्वारा किया जाएगा। कमेटी द्वारा सेवा प्रदाताओं का चयन करते हुए मार्ग निर्धारण को अंतिम रूप दिया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन एवं निगरानी का दायित्व क्षेत्रीय प्रबंधकों का होगा, जो नियमित रूप से (न्यूनतम मासिक) आयुक्त को कार्य प्रगति से अवगत कराएंगे।
प्रदेश में अब ओला, उबर आदि को भी कराना होगा पंजीकरण
कैबिनेट ने यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा के दृष्टिगत ओला और उबर आदि टैक्सी के पंजीकरण का फैसला लिया है। सेवा प्रदाता कंपनियां अब बिना पंजीकरण शुल्क, फिटनेस, मेडिकल टेस्ट, पुलिस वेरिफिकेशन के गाड़ियों का संचालन नहीं कर पाएंगे। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 की नियमावली में केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2025 को संशोधन किया था। इस नियमावली को अब प्रदेश में भी लागू किया गया है। पहले ओला-उबर पर नियंत्रण नहीं था लेकिन अब इन्हें भी पंजीकरण के दायरे में लाया गया है।
आवेदन, लाइसेंस और नवीनीकरण शुल्क भी देना होगा। कौन गाड़ी चला रहा है, यह अभी तक हम नहीं जान पाते थे। अब ड्राइवर का मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन तथा फिटनेस टेस्ट आदि भी होगा। यूपी में अधिसूचना जारी होने के बाद यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। आवेदन की फीस 25 हजार रुपये होगी। 50-100 या इससे अधिक गाड़ी चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी। रिन्युअल हर पांच साल पर होगा और इसके लिए पांच हजार रुपये देना होगा। परिवहन मंत्री ने बताया कि सभी जानकारी एक जगह रहे इसके लिए अत्याधुनिक एप विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार ने शहरी लोगों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पीएम आवास योजना-2 (शहरी) के तहत अब ईडब्ल्यूएस के साथ ही एलआईजी और मिनी एमआईजी मकान भी बनाए जाएंगे। इससे मध्यम वर्ग के लोगों को भी सस्ते में मकान उपलब्ध होगा। इन मकानों का आवंटन लॉटरी पद्धति से होगा। वहीं ईडब्ल्यूएस श्रेणी के मकानों की क्षेत्रफल बढ़ाकर 30 वर्ग मीटर कर दिया गया है। हालांकि इसकी कीमत लगभग नौ लाख तक होगी। इससे अधिक बड़े क्षेत्रफल वाले मकानों की कीमत रेरा की सहमति से तय किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में पीएम आवास योजना शहरी-2 के तहत ‘भागीदारी में किफायती आवास’ (एएचपी) और ‘किफायती किराया आवास'(एआरएच) घटक के तहत मकान बनाने की नीति को मंजूरी दी गई है। आवास विभाग के प्रस्ताव के मुतबिक विकास प्राधिकरणों के साथ बिल्डरों द्वारा इन मकानों को बनाया जाएगा। बिल्डरों को बड़े मकानों के साथ छोटे मकानों को बनाने की सुविधा दी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें भू-उपयोग और एफएआर में भी छूट दी जाएगी। इन मकानों को लेने वालों को ढाई लाख रुपये की छूट दी जाएगी।
भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में वर्ष 2026 के लिए इन दोनों घटकों के संचालन के लिए जल्द विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। योजना के तहत मध्यम और दुर्बल आय वर्ग के लोगों के लिए किफायती दरों पर आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
योजना के अंतर्गत दुर्बल आय वर्ग के भवनों के निर्माण के लिए केंद्रांश के रूप में 1.50 लाख और राज्यांश का एक लाख रुपये दिया जाएगा। इसके माध्यम से दुर्बल आय वर्ग के लोगों को कम कीमत पर मकान की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। पीएम आवास शहरी-दो में मकान बनाने वाले बिल्डरों को इंसेटिंग के रूप में भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क, मानिचत्र शुल्क, वह्य विकास शुल्क और लाभार्थियों को मकान की रजिस्ट्री कराने पर स्टांप शुल्क में छूट दी जाएगी। शहरी गरीबों, कामकाजी महिलाओं, उद्योगों, संस्थाओं के कर्मचारियों और अन्य पात्र ईडब्ल्यूएस व एलआईजी परिवारों के लिए निजी सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा आवास बनाकर किराए पर दिए जाएंगे। ऐसे मकान बनाने वालों को भी छूट की सुविधा दी जाएगी। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में कांशीराम आवासों को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला किया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में बने कांशीराम आवास योजना के कई आवासों पर अनधिकृत कब्जे की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे आवासों की पहचान कर उन्हें खाली कराया जाएगा और उनकी रंगाई-पुताई व मरम्मत कराकर पुनः पात्र दलित परिवारों को आवंटित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इन आवासों को फिर से जरूरतमंद दलित परिवारों को उपलब्ध कराना है।
