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आजमगढ़ : अवैध सोनोग्राफी व पैथालॉजी सेंटरों पर छापेमारी

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डॉक्टर नदारद, टेक्नीशियन के सहारे चल रहा था सेंटर; एसीएमओ ने नोटिस जारी करने की कही बात

आज़मगढ़। जनपद के फूलपुर तहसील क्षेत्र व कस्बे में अवैध रूप से संचालित सोनोग्राफी और पैथालॉजी सेंटरों के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर बुधवार दोपहर करीब तीन बजे अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) डॉ. उमाशरण पांडेय ने कोतवाली के पास स्थित जनता सोनोग्राफी सेंटर की जांच की। जांच के दौरान सेंटर खुला मिला, लेकिन न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई मरीज। बताया जा रहा है कि सुबह से यह सेंटर टेक्नीशियन के सहारे संचालित हो रहा था। वहीं, जैसे ही संचालक को जांच की भनक लगी, डॉक्टर, टेक्नीशियन और मरीज मौके से हट गए तथा नए मरीजों को आने से मना कर दिया गया। एसीएमओ ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ की और सेंटर के अभिलेखों की जांच की। संचालक से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी। जांच के दौरान मशीन बंद पाई गई, जिससे सेंटर की कार्यप्रणाली पर संदेह गहरा गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में इस तरह की कार्रवाई पहले भी होती रही है, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही अधिकांश मेडिकल स्टोर, पैथालॉजी और सोनोग्राफी सेंटर बंद हो जाते हैं और टीम के जाते ही फिर से संचालन शुरू कर दिया जाता है। फूलपुर तहसील क्षेत्र व आसपास के बाजारों में दर्जनों पैथालॉजी और सोनोग्राफी सेंटर तथा कई मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं, जिनमें से अधिकांश जगहों पर अप्रशिक्षित लोग जांच कर मरीजों को रिपोर्ट दे रहे हैं। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर गरीब और ग्रामीण मरीजों का इलाज व ऑपरेशन तक किया जा रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है। इस संबंध में एसीएमओ डॉ. उमाशरण पांडेय ने बताया कि जनता सोनोग्राफी सेंटर के खिलाफ शिकायत मिली थी कि यहां बिना डॉक्टर के अल्ट्रासाउंड किया जाता है। जांच में डॉक्टर और मरीज अनुपस्थित मिले, इसलिए संचालक को नोटिस जारी की जाएगी। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों की जानकारी तो है, लेकिन उच्च अधिकारियों की मौजूदगी के बिना कार्रवाई करने पर उन पर आरोप लगने लगते हैं। उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद ही प्रभावी कार्रवाई संभव है। फिलहाल, इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कहीं-कहीं यह भी चर्चा हो रही है कि इन सबको सीएमओ कार्यालय का संरक्षण प्राप्त है।

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