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बेटे ने ही दोस्त के साथ पूरे परिवार को मार डाला

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प्रयागराज के साउथ मलाका इलाके के बंद घर में दंपति और उनके बेटे-बेटी की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. पुलिस ने एक इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. छानबीन में सामने आया है कि दंपति के बेटे ने ही दोस्त के साथ मिलकर अपने परिवार की हत्या की. बाद में घर में रखे गहनों और रुपयों के बंटवारे में दोस्त ने बेटे को मार डाला. दंपति की लाश बंद मकान में तो बेटे की लाश नीचे दुकान में मिली थी. पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने बताया कि मंजीत केसरवानी कीडगंज क्षेत्र के रहने वाले हैं. कोतवाली में तहरीर दी थी कि उसके मामा वीरेन्द्र वैश्य का मकान पिछले 2 दिन से बंद पड़ा है तथा घर से बदबू आ रही है. जिसकी सूचना 112 पर दी गई. मौके पर पुलिस पहुंची और घर का ताला तोड़ा गया. अंदर वीरेन्द्र वैश्य (70), उनकी पत्नी अनीता वैश्य (65), बेटी मीनाक्षी (40) के शव पड़े थे. एक कमरे में वीरेंद्र वैश्य व अनीता वैश्य का शव पलंग पर था. दोनों के सिर पर किसी भारी वस्तु से वार किया गया था. जबिक सीढ़ियों के पास बेटी मीनाक्षी का शव पड़ा मिला. शुरुआत में पुलिस ने बेटे अभिषेक पर शक जताया, लेकिन कुछ देर बाद ही उसका शव भी मकान के नीचे दुकान में मिला. आसपास के लोगों ने बताया कि उनके दो बेटे अश्वनी और अभिषेक हैं. अश्वनी को आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के कारण वीरेंद्र ने संपत्ति से पहले ही दखल कर दिया था. वर्तमान में वह जेल में है. दूसरा बेटा अभिषेक उनके साथ रहता था. जांच के दौरान दीवार और बोर्ड पर लिखा मिला कि बंटी-बबली बहू ने मारा. पुलिस को छानबीन के दौरान पता चला कि बेटे अभिषेक वैश्य को मकान के निचले हिस्से में बनी मार्केट में एक दुकान वीरेन्द्र दी थी. जिसमें वह लिक्विड डिटर्जेंट व टायलेट क्लीनर बेचता था. उससे भी संपत्ति को लेकर पिता का विवाद था. मकान से बरामद शवों पर डिटर्जेंट व क्लीनर डाला गया था. जांच के दौरान घटनास्थल पर पानी के ड्रम में अभिषेक की खून से सनी टीशर्ट भी बरामद हुई थी. बाद में जब दुकान से अभिषेक का शव मिला तो उस पर भी डिटर्जेंट डाला गया था. पुलिस ने सीसीटीवी व सर्विलांस की मदद ली तो एक व्यक्ति वीरेन्द्र के जूते व कपड़े पहनकर कॉम्प्लेक्स से बाहर जाता दिखाई दिया. जिसके बारे में पता चला कि उसका नाम सनी गुप्ता है, जो कि इसी परिसर में नीचे समोसे की दुकान लगाता है. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की पूरे मामले का खुलासा हो गया. पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार के मुताबिक, आरोपी सनी ने बताया कि उसकी समोसे की दुकान है. एक दुकान गिफ्ट सेंटर की है, जिसको अभिषेक की बहन मीनाक्षी चलाती थी. इसी मार्केट के ऊपर ये सभी रहते थे. उसकी अभिषेक से अच्छी दोस्ती थी. 31 मई को अभिषेक ने कचौड़ी, बीयर व सिगरेट लाकर पार्टी करने को कहा. वह सारा सामान लेकर लगभग 3 बजे अभिषेक की दुकान पर पहुंचा. वहीं पर दोनों ने बीयर पी. अभिषेक कर्ज में दबा था, जबकि पिता वीरेन्द्र पैसे नहीं देते थे. 2022 में वीरेन्द्र ने अभिषेक को भी संपत्ति से बेदखल कर दिया था. दोनों ने सभी की हत्या कर गहने चोरी करने का प्लान बनाया. सनी ने पुलिस को बताया कि शाम 5 बजे रोजाना की तरह अभिषेक की बहन मीनाक्षी दुकान खोलने आई. जैसे ही सीढ़ी का दरवाजा खोला, अभिषेक में रॉड से उसके सिर पर मारा. उसने धक्का दे दिया. दोनों उसे घसीटते हुए ऊपर ले गए. मीनाक्षी की वहीं मौत हो गई. उसके बाद दोनों ऊपर पहुंचे. फिर अभिषेक के मां-बाप पर भी रॉड से हमला कर मार दिया. दोनों ने अलमारी के सारे कपड़े मृतकों के ऊपर डाल दिए. इसके बाद अभिषेक ने लाल पेन से एक दफ्ती पर लिख दिया कि “बंटी-बबली बहू ने मारा” ताकि घटना का सारा इल्जाम अभिषेक के भाई अश्विनी व उसकी पत्नी रीतू पर लग जाए. उन्हें ही बंटी-बबली के नाम से जाना जाता है. फिर अभिषेक ने रसोई के पीछे पानी की टंकी में वह पेन, सारी फाइल, कपड़े, लैपटॉप और मोबाइल डाल दिए. सारे गहने लेकर नीचे दुकान में आए. पुलिस के मुताबिक, गहनों-रुपयों के विवाद में सनी ने अभिषेक को मार डाला. पूछताछ में आरोपी सनी ने बताया कि, अभिषेक उसे 5 चूड़ी व 1 हार दिए, इसी बंटवारे को लेकर विवाद हो गया. उसने अभिषेक की भी उसी लोहे की रॉड से मार कर हत्या कर दी, फिर दुकान से डिटर्जेंट, ब्लीचिंग पाउडर, रसोई से हल्दी व सरसों का तेल सभी शवों पर डाले, ताकि सारे सबूत मिट जाएं. आरोपी ने बताया कि उसने वीरेंद्र के जूते व कपड़े पहने थे, इसीलिए वापस घटनास्थल पर गया और अपनी चप्पल पहन कर बाहर आया. इस पूरे मामले में पुलिस कमिश्नर ने साउथ मलाका चौकी प्रभारी और कोतवाली एसएसई को निलंबित कर दिया है.

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