अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का ठेका लेता था फर्जी आईएएस, निजी सचिव गिरफ्तार; साथियों की तलाश जारी
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लखनऊ। राजधानी लखनऊ में पकड़े गए फर्जी आईएएस सौरभ त्रिपाठी के नए-नए कारनामे सामने आ रहे हैं। छानबीन में पता चला है कि वह आईएएस, आईपीएस की ट्रांसफर-पोस्टिंग का ठेका लेता था। कई अफसर उसके झांसे में थे। पुलिस ने शुक्रवार को आरोपी के पर्सनल सेक्रेटरी को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस सौरभ के अन्य साथियों के बारे में पता लगा रही है। इंस्पेक्टर वजीरगंज राजेश कुमार त्रिपाठी के मुताबिक एमआई रसलकोर्ट निवासी गौरव पांडेय को गिरफ्तार किया गया है। सौरभ ने उसे पर्सनल सेक्रेटरी बना रखा था। पूछताछ में गौरव ने बताया कि उसे नहीं पता था कि सौरभ फर्जी आईएएस है। सौरभ ने उससे खुद का परिचय आईएएस के रूप में ही दिया था। आरोपी के चालक हसनपुर खेवली निवासी बृजकुमार ने भी पूछताछ में सौरभ को आईएएस ही बताया। बृजकुमार के मुताबिक वह उसे 17 हजार रुपये वेतन देता था। पुलिस को सौरभ के पास से कई जाली मुहर भी मिलीं। उसके लैपटॉप और डायरी में कई लोगों के नाम और फोन नंबर मिले हैं। पुलिस को कुछ लोगों से आरोपी के लेनदेन की पुष्टि भी हुई है। आरोपी अधिकारियों को प्रमोशन का भी लालच देता था।
पुलिस सौरभ के बैंक खातों की पड़ताल कर रही है। सूत्रों का कहना है कि इनसे लाखों के लेनदेन हुए हैं। आरोपी के पास से मिले दस्तावेज कई आईपीएस अफसरों से कनेक्शन की ओर इशारा कर रहे हैं। सौरभ की कॉल डिटेल से कई अफसरों से बातचीत के साक्ष्य मिले हैं। माना जा रहा है कि पुलिस आरोपी के साथ व्यापार में साझेदारी करने वाले अफसरों से भी पूछताछ करेगी। यही नहीं, पुलिस उन लोगों का भी पता लगा रही है, जिनसे आरोपी ने ठगी की है।
वजीरगंज पुलिस ने बुधवार सुबह कार पर जॉइंट डायरेक्टर आईटी का पास लगाकर घूम रहे फर्जी आईएएस सौरभ को गिरफ्तार किया था। उसके पास से छह लग्जरी गाड़ियां बरामद हुई थीं। इनमें से चार पर सचिवालय का फर्जी पास और एक पर संयुक्त सचिव भारत सरकार का पास लगा हुआ था। आरोपी सरकारी प्रोटोकॉल के लिए ऐसा करता था।
