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आजमगढ़ : शिबली के भ्रष्टाचार का मुद्दा एक बार फिर सदन में उठा, एमएलसी रामसूरत की विजिलेंस जांच की मांग 

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44 लाख के फर्जी ढंग से आहरित कर कमीशनखोरी का गंभीर आरोप

कालेज के शुल्काय से प्राप्त धनराशियों के रख-रखाव, विभिन्न खातों से भुगतान में भी शासनादेश की व्यवस्था और वित्तीय नियमों की घोर अनियमितता की गई है।

आजमगढ। आजमगढ़ के चर्चित अल्पसंख्यक संस्था शिब्ली नेशनल डिग्री कालेज के भ्रष्टाचार, धन उगाही और प्राचार्य द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का मुद्दा आज एक बार फिर विधान सभा के शीतकालीन सत्र में एमएलसी रामसूरत राजभर द्वारा उठाया गया। इसी के साथ विधान परिषद में शिबली का प्रकरण लगातार तीसरी बार सदन में उठा कर विजिलेंस जांच की मांग की गयी। जिसको लेकर आजमगढ सहित पूर्वांचल में हडकंप मचा हुआ है।

       आज 23 दिसंबर को विधान परिषद की कार्यवाही में नियम-115 के अन्तर्गत भाजपा के एमएलसी रामसूरत राजभर ने शिबली का मुद्दा सदन में जबर्दस्त ढंग से उठाते हुए सदन को बताया कि किसी देश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान, उस राष्ट्र का अपमान होता है और यह अपमान शिबली के प्राचार्य अफसर अली द्वारा जानबूझकर किया गया है। 15 अगस्त-24 स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्राचार्य द्वारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का सरेआम अपमान करने के घृणित और अपराधिक कृत्य को किया गया। यही नहीं उन्होंने इससे पहले भी कई राष्ट्रीय उत्सवों और दिवसों पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया है। जो मंडलायुक्त और डीएम के आदेश पर हुए जांच में साबित हो चुका है। बावजूद जिला प्रशासन द्वारा उन पर एफआईआर नहीं किया गया।

 उन्होंने सदन को आगे बताया कि इसी तरह के एक अन्य मामले में भी यही आरोपी प्राचार्य, संगठित गिरोह बनाकर शिबली कालेज के एससी एसटी के छात्रों की जमा फीस के खाते से शासनादेश के विरुद्ध जाकर 44 लाख रुपए को फर्जी ढंग से आहरित कर फर्जी ढंग से आहरित कर कमीशनखोरी के उद्देश्य से भुगतान कर दिया गया। कालेज के शुल्काय से प्राप्त धनराशियों के रख-रखाव व संचालित विभिन्न खातों से भुगतान में भी शासनादेश की व्यवस्था और वित्तीय नियमों की घोर अनियमितता की गई है। जो कमिश्नर के आदेश पर सीडीओ की प्राथमिक जांच कमेटी और अपर आयुक्त वित्त राजस्व परिषद वाराणसी मंडल की 5 सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्टों से सिद्ध हुआ।

इसके पहले 52 सहायक प्रोफेसर नियुक्तियों में भी इसी प्राचार्य और मैनेजमेंट के संगठित गिरोह द्वारा भारी पैमाने पर शासनादेश के विरुद्ध जाकर बिना लिखित परीक्षा के ही केवल इन्टरव्यू पर अपने सगे रिश्तेदारों और पहले से तय अभ्यर्थियों की नियुक्ति कर भ्रष्टाचार किया गया। जिसकी जांच मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश पर कमिश्नर आजमगढ की जांच टीम ने आरोप सिद्ध किया।

बावजूद प्राचार्य के ऊंचे प्रभाव, संगठित गिरोह, मैनेजमैंट की मिलीभगत पर, इतने बडे भ्रष्टाचार और कदाचार में भी एफआईआर तक नहीं दर्ज हुआ।

दिनांक 17 दिसंबर 2024 और 11 अगस्त 2025 को इसी सदन में लगातार इन गंभीर अपराधों को मेरे द्वारा नियम-115 के अन्तर्गत उठाया गया। बावजूद अब तक एफआईआर नहीं हुआ। उन्होंने सदन का ध्यान एक बार पुन: आकृष्ट करते हुए प्राचार्य के विरुद्ध राष्ट्रीय गौरव, राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के अपमान के दोषी सिद्ध होने पर राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण(संशोधित) अधिनियम,2003 की धारा-2 एवं अन्य सुंगत धाराओं, धनउगाही, वित्तीय भ्रष्टाचार व गबन तथा बिना लिखित परीक्षा के 52 सहायक प्रोफेसर की अवैध नियुक्तियों के संबंध में संबंधित प्राचार्य, मैनेजमेंट और उसके सगठित गिरोह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराते हुए इस गंभीर और संवेदनशील प्रकरण की विजिलेंस से जांच करा आरोपी प्राचार्य को पदच्युत कर वैधानिक, विभागीय तथा दंडात्मक कार्रवाई की मांग सरकार से की है।

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