Latest News

The News Complete in Website

पढ़े-लिखों के समझ में नहीं आता जीएसटी, पांचवीं पास ने फर्जी फर्में बनाकर ऐसे चुरा लिए 42 करोड़

1 min read

मुजफ्फरनगर। साइबर थाना पुलिस ने 34 फर्जी फर्मों के नाम पर फर्जी ई-वे बिल बनाकर 42 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में अब तक 100 फर्जी फर्मों का खुलासा हुआ है। रैकेट का सरगना केवल पांचवीं पास है, जबकि उसके दो साथी एलएलबी कर चुके हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से ई-वे बिल बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, चेक बुक, प्रिंटर और एक लग्जरी कार भी बरामद की है।

पुलिस लाइन में एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ ने बताया कि पिछले साल सितंबर और अक्तूबर माह में जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने शहर कोतवाली, खालापार, नई मंडी और शाहपुर थानों में जीएसटी चोरी के कुल पांच मामले दर्ज कराए गए थे। इन मामलों की जांच साइबर थाना पुलिस को सौंपी गई थी। जांच के दौरान, पुलिस ने मंगलवार को सिविल लाइन थाने के मोहल्ला मल्हूपुरा निवासी अफजल और मोनिस, नई मंडी के गांव तिगरी निवासी मोहम्मद हफीज को गिरफ्तार किया। आरोपियों से बरामद उपकरणों, जीमेल और लैपटॉप से मिली जानकारी के अनुसार, उन्होंने 34 फर्जी फर्मों का पंजीकरण कराया था। इन फर्मों के माध्यम से उन्होंने 42 करोड़ रुपये की जीएसटी की चोरी की, जिसे उन्होंने आपस में बांट लिया।

गिरफ्तार सरगना अफजल केवल पांचवीं पास है। मोनिस और मोहम्मद हफीज एलएलबी करने के बाद सीए की पढ़ाई कर रहे हैं। हफीज अकाउंटिंग और जीएसटी का काम करता था।

मोहम्मद हफीज और मोनिस फर्मों की अकाउंटिंग और जीएसटी से संबंधित कार्य संभालतते थे, जबकि अफजल लोगों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, अन्य आवश्यक कागजात जुटाने के साथ-साथ जीएसटी फर्मों के लिए गोदामों और जगहों का इंतजाम करता था। इस आपराधिक गतिविधि से उन्होंने काफी संपत्ति एकत्र कर ली है। अब तक उन्होंने लगभग 40 से 50 फर्मों का उपयोग फर्जी जीएसटी और ई-वे बिल बनाने के लिए किया है। हफीज ने पुलिस को बताया कि मोनिस और अफजल ने उसे सुझाव दिया कि यदि वह फर्जी फर्में बनाकर ई-वे बिल काटें तो उन्हें अच्छा मुनाफा हो सकता है। लालच में आकर तीनों ने मिलकर लोगों के आधार कार्ड और पैन कार्ड का उपयोग करके बैंक खाते खुलवाए व फर्जी जीएसटी फर्मों का पंजीकरण कराया। जिसके बाद वे फर्जी जीएसटी बिल और ई-वे बिल काटना शुरू कर दिए।

एसपी क्राइम ने बताया कि सरगना अफजल के नाम कई मकान और गाड़ियां हैं, और उसने दूसरों के नाम पर भी गाड़ियां खरीदी हैं। पुलिस सभी गिरफ्तार आरोपियों की संपत्ति का पता लगाने में जुटी हुई है, ताकि अवैध रूप से अर्जित धन और संपत्तियों को जब्त किया जा सके।

ऐसे मामलों की जांच के लिए प्रदेश स्तर पर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) भी गठित की गई है, जो सक्रिय रूप से जांच कर रही है। गिरफ्तार आरोपी अपने घरों से ही मोबाइल और प्रिंटर का उपयोग करके फर्जी फर्मों के ई-वे बिल बनाने का काम करते थे।

छह मोबाइल और पांच लैपटॉल मिले

आरोपियों के पास से छह मोबाइल, पांच लैपटॉप, डिजिटल साइन 12, एक लग्जरी कार, आधार कार्ड, पैन कार्ड, सिम कार्ड और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं। लैपटॉप, हार्ड डिस्क और मोबाइल को आगे की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है।

आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने पहले एक फर्म बनाई और फिर धीरे-धीरे 34 फर्जी फर्मों का जाल बिछाया। इन फर्मों को खोलने के लिए उन्होंने अलग-अलग लोगों के कागजात का इस्तेमाल किया। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से मिले कागजात और लैपटॉप से अब तक करीब सौ फर्जी फर्मों का विवरण प्राप्त हुआ है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि जीएसटी चोरी की कुल राशि में काफी वृद्धि हो सकती है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *