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लखनऊ विवि में छात्रों के दो गुटों में जमकर भिड़ंत, रोहित वेमुला को लेकर आमने-सामने आए छात्र

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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में शनिवार दोपहर करीब एक बजे रोहित वेमुला की बरसी के मौके पर निकाले जा रहे स्मृति मार्च के दौरान दो छात्र संगठनों के बीच तनाव हिंसक झड़प में बदल गया। बिरसा अंबेडकर फुले छात्र संगठन (बापसा) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों के बीच नारेबाजी पर शुरू हुई बहस देखते ही देखते मारपीट में तब्दील हो गई। मौके पर मौजूद भारी भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्मृति मार्च के दौरान नारे लगाने पर दोनों पक्षों में पहले कहासुनी हुई, जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। बापसा की ओर से ‘रोहित हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं’ जैसे नारे लगाए गए। संगठन से जुड़े छात्रों ने उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। झड़प के दौरान एक छात्र को गंभीर चोट आने की सूचना है। मार्च में मानव रावत, अंकित गौतम, अश्वनी कुमार, अमितेश पाल, सुबेंदु रावत, अजितेंद्र आजाद, अमित कुमार सहित अन्य छात्र मौजूद थे।

दूसरी ओर, एबीवीपी की ओर से भी हसनगंज कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई है। अंग्रेजी विभाग के शोध छात्र राधेश्याम पांडेय ने बापसा कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया। शिकायत के अनुसार, वह विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन की ओर जा रहे थे, तभी बिना अनुमति मार्च निकाल रहे कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला कर दिया। एबीवीपी का आरोप है कि इस दौरान ब्राह्मणवाद, ठाकुरवाद और सुविधावाद जैसे नारे लगाए गए। संगठन ने बापसा अध्यक्ष शिखर दास सहित राम शरण, रवि और करीब 20 अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

इधर, रोहित वेमुला स्मृति दिवस के अवसर पर समाजवादी छात्र सभा की ओर से निकाले गए अलग मार्च के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच टकराव हो गया। पुलिस के रोकने के बावजूद छात्र नहीं माने, जिसके बाद कई कार्यकर्ताओं को घसीटते हुए पुलिस ने बसों में बैठाकर हिरासत में लिया। इससे छात्रों में नाराजगी रही। समाजवादी छात्र सभा के सचिव अतुल कुमार शुक्ला ने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस की सरकार दलितों के हितों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण स्मृति मार्च के दौरान चार थानों की पुलिस बुलाकर छात्रों को रोका गया और जबरन डिटेन किया गया।

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