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आजमगढ़ : यूजीसी के नए कानून के खिलाफ सड़क पर दिखा उबाल, पदयात्रा निकालकर उठाई आवाज

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सोशल एक्टिविस्ट विनीत सिंह रीशु के अगुवाई में पदयात्रा, पीएम व केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भेजा गया सात सूत्री मांग पत्र
आजमगढ़। यूजीसी को लेकर आजमगढ़ में भी सामान्य वर्ग के लोगों का उबाल सड़क पर देखने को मिला। सोशल एक्टिविस्ट विनीत सिंह रीशू के आह्वान पर गुरूवार को सामान्य वर्ग के लोग वेस्ली इंटर कालेज में एकत्रित हुए और पदयात्रा निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां पीएम व केंद्रीय शिक्षा मंत्री को संबोधित सात सूत्री ज्ञापन जिलाप्रशासन को सौंपा गया। पदयात्रा के दौरान भारी पुलिस फोर्स तैनात रही। प्रशासन पहले वेस्ली कालेज में ही ज्ञापन देने के लिए युवाओं को मान-मनोव्वल करना चाहा लेकिन युवाओं ने अपनी मांगों को जायज बताया और पदयात्रा निकालकर लोगों को यूजीसी के प्रति जागरूक भी किया।
सौंपे गए ज्ञापन में सोशल एक्टिविस्ट विनीत सिंह रीशू ने विवि अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशन/नए नियम देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में गहरी असमानता और भेद भाव उत्पन्न करने वाला बताया। उन्होंने आगे कहाकि यह कानून अपने वर्तमान स्वरूप में एकपक्षीय प्रतीत होता है, जिसके कारण विशेष रूप से सवर्ण वर्ग के छात्रों का शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य बाधित होने की स्थिति बन रही है। शिक्षा नीति का उद्देश्य सभी वर्गों को साथ लेकर चलना होना चाहिए, न कि अगड़ा पिछड़ा के आधार पर किसी एक वर्ग के अधिकारों का हनन कर दूसरे वर्ग के लिए भूमि तैयार करना जबकि भारत का संविधान समानता, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की भावना पर आधारित है। ऐसे में किसी भी निर्णय समिति का संतुलित, बहुवर्गीय और समावेशी होना अनिवार्य है। एक ही जाति वर्ग द्वारा लिए गए निर्णय सवर्ण छात्रों के अधिकारों और विश्वास को प्रभावित करते हैं।
सात सूत्री मांगों में यूजीसी के इस एकपक्षीय एवं सवर्ण छात्रों के विरुद्ध प्रभाव डालने वाले काले कानून/ड्राफ्ट रेगुलेशन को तत्काल प्रभाव से रोका जाए, सामान्य, एससी/एसटी, ओबीसी सहित सभी वर्गों के छात्रों के लिए समान अवसर, मेरिट और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, नीति निर्धारण समितियों में सभी सामाजिक वर्गों का संतुलित और पारदर्शी प्रतिनिधित्व किया जाए, छात्रों, शिक्षकों, शिक्षाविदों एवं राज्य सरकारों से व्यापक संवाद के बाद ही कोई नई नीति लागू की जाए, निर्णय समितियों में सामाजिक विविधता का अभाव नीति को एकपक्षीय, पक्षपातपूर्ण और अविश्वसनीय बनाता है, यूजीसी के प्रस्तावित काले कानून/ड्राफ्ट रेगुलेशन को तत्काल वापस लिया जाए, हमें पूर्ण विश्वास है कि आप देश के युवाओं के कैरियर, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हेतु शीघ्र एवं न्यायसंगत हस्तक्षेप करेंगे।
ज्ञापन में पूरजोर मांग की गई कि यूजीसी का नया कानून वापस लेते हुए सरकार हम सब की है तो कानून भी सबके लिए समान हो। इसी प्रकार यूजीसी रेगुलेशन में जो कानून बनाया गया है वैसा ही कानून सामान्य वर्ग के लिये भी बनाया जाय ताकि सबका साथ और सबका विकास और सबका विश्वास को मूर्त रूप मिल सकें।
इस अवसर पर डा. डीपी तिवारी, अश्वनी कुमार मिश्रा, पथ द्विवेदी, प्रशांत राय रिंकू, विवेक सिंह, सुर सिंह कौशिक, विशाल श्रीवास्तव, रतन सिंह, आशीष पांडे, प्रदीप त्रिपाठी उर्फ हीरा, समर सिंह, धीरज, अविनाश सिंह बंटी, विपिन सिंह पालीवाल, डंपी तिवारी, अर्पित राय, सत्यम श्रीवास्तव आदि लोग उपस्थित रहे।

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