आजमगढ़: फार्मर रजिस्ट्री में लापरवाही पर डीएम ने सीएससी पर एफआईआर के दिए निर्देश
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किसानों से अवैध वसूली और प्रचार-प्रसार में कमी पर अधिकारियों की जवाबदेही तय
आजमगढ़। प्रदेश सरकार की शीर्ष प्राथमिकता वाली फार्मर रजिस्ट्री योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही को जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने गंभीरता से लिया है। बुधवार को उन्होंने जनपद के सबसे कम फार्मर रजिस्ट्री वाले ब्लॉक जहानागंज के ग्राम मित्तूपुर और दौलताबाद का स्थलीय निरीक्षण कर किसानों से सीधे संवाद किया और आ रही समस्याओं की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान मित्तूपुर ग्राम में बताया गया कि कुल 600 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री हो चुकी है, जबकि 271 किसान अभी शेष हैं। पंचायत सहायक ने बताया कि आधार व खतौनी में नाम की भिन्नता तथा फिंगर प्रिंट न लगने के कारण कई किसानों की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि शेष किसानों को आवश्यक अभिलेखों की स्पष्ट जानकारी दी जाए। ग्रामीणों ने बताया कि जानकारी के अभाव में वे फार्मर रजिस्ट्री नहीं करा सके।जिलाधिकारी ने सूची में दर्ज कुछ किसानों से एडीओ कृषि के माध्यम से फोन पर सत्यापन भी कराया। जांच में सामने आया कि कुछ किसान जनपद से बाहर थे, कुछ के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं थे, जबकि कई किसानों ने बताया कि उन्हें किसी प्रकार की सूचना ही नहीं दी गई। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि सीएससी संचालक 100 रुपये लेकर कागज बनाते हैं और बार-बार दौड़ाते हैं। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए उप निदेशक कृषि को संबंधित सीएससी पर तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। फार्मर रजिस्ट्री के कार्य में लापरवाही और किसानों को सही जानकारी न देने पर जिलाधिकारी ने जिम्मेदार कर्मियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ब्लॉक स्तर पर कैंप लगाकर प्रशिक्षण दिया जाए और किसानों के मोबाइल में ऐप डाउनलोड कराया जाए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी विभागीय अधिकारी प्रतिदिन कम से कम 10 गांवों का भ्रमण करें। जिन अधिकारियों को ग्राम भ्रमण की जिम्मेदारी दी गई थी, उनसे उसी दिन शाम तक भ्रमण किए गए गांवों की सूची तलब की गई। सूची उपलब्ध न कराने पर वेतन रोकने और प्रमुख सचिव को सूचना भेजने की चेतावनी दी गई। दौलताबाद पंचायत भवन में किसानों ने बताया कि गांव में कुल 859 किसान हैं, जिनमें से 448 की फार्मर रजिस्ट्री हो चुकी है, जबकि 348 किसानों का नाम सूची में नहीं है। किसानों ने यह भी बताया कि वरासत होने के बावजूद भूलेख में पुराना डाटा दिख रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने तहसीलदार को संबंधित मामलों में स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी को लेखपालों के माध्यम से वरासत प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। वहीं अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को सभी सीएससी संचालकों से वार्ता कर निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली न करने के सख्त निर्देश देने को कहा। फार्मर रजिस्ट्री के कार्यों में शिथिलता और प्रभावी पर्यवेक्षण न करने पर उप कृषि निदेशक से स्पष्टीकरण तलब किया गया। साथ ही प्रचार-प्रसार मद में अब तक किए गए कार्यों का पूर्ण विवरण भी मांगा गया। इस अवसर पर उप कृषि निदेशक आशीष कुमार, डीसी मनरेगा रामउदरेज यादव, जिला पंचायत राज अधिकारी पवन कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
