आजमगढ़ : जिला ओटीडी सेल की बैठक में जनपद के चतुर्दिक विकास पर बल
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आजमगढ़। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला ओटीडी (वन ट्रिलियन डॉलर) सेल की चतुर्थ त्रैमासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। बैठक में जिलाधिकारी ने जनपद की जीडीपी बढ़ाने हेतु विभिन्न विभागों की भूमिका पर बल दिया। कृषि की जी०डी०पी० में भूमिका प्राथमिक क्षेत्र में कृषि की भूमिका जिला सकल घरेलू उत्पाद कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों के हिस्से में गिरावट दर्ज की जा रही है।कृषि क्षेत्र का देश व राज्य की जी०डी०पी० में योगदान, खाद्यान्न, सब्जी एवं अन्य।
कृषि को बढ़ावा देने के लिये सरकार की योजनाएँ- पी०एम०फसल बीमा योजना, पी०एम० कृषि सिचाई योजना, एन०एम०एस०ए० योजना, पी०एम०किसान योजना, पी०एम०-कुसुम योजना, उ०प्र० मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम, एस०एम०ए०एम० एवं इन-सीटू योजना संचालित है।
ओ०टी०डी० का लक्ष्य प्राप्त करने हेतु विभाग की कार्ययोजना- कृषि तकनीकी में निजी क्षेत्र की सहभागिता कृषि निदेशालय स्तर पर कार्यवाही प्रस्तावित है। कृषि विविधिकरण- फसलोत्पादन में दलहन के क्षेत्रफल को बढ़ावा देना। खरीफ के फसलें अरहर, उर्द, मूँग एन०एफ०एस०एम० के दलहन घटक अन्तर्गत मिनीकिट वितरण। रबी की फसलें चना, मटर, मसूर एन०एफ०एस०एम० के दलहन घटक अन्तर्गत मिनीकिट वितरण।
कृषक जागरूकता- किसाना पाठशाला का आयोजन कर किसानों को दलहन उत्पादन हेतु प्रेरित किया जाता है। जनपद में वर्ष 2025-26 खरीफ में 150 हे0 कलस्टर प्रदर्शन आयोजित किया गया है। जनपद में वर्ष 2025-26 रबी में हे0 कलस्टर प्रदर्शन आयोजित किया जाता है तथा 50 हे0 अन्तः फसली प्रदर्शनी आयोजित किया जाना है। मृदा में जीवाश्म कार्बन बढ़ाने हेतु मिशन- मृदा परीक्षण कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड (एस०एच०सी०) पर संस्तुति के आधार पर जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग वर्ष 2025-26 में 44000 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (एस०एच०सी०) वितरण का लक्ष्य है। कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देकर लागत को कम करना एवं आय में वृद्धि हेतु जनपद के 01 एफ०पी०ओ० को पराली प्रबन्धन हेतु एग्रीगेटर के रूप में चयन किया जाना है। इन्हें पराली प्रबन्धन के विभिन्न यंत्र, अनुदान पर उपलब्ध कराया जायेगा। कृषको को एकल यत्र पर 40-50 प्रतिशत तक अनुदान देय है। बाजार तक पहुँच। बीज इको सिस्टम का विकास उ०प्र० के लिये उपयुक्त मक्के की प्रजातियों का विकास आई०सी०आर०, आई०एस०आई० हैदराबाद द्वारा किया जाता है। उ०प्र० सीड पॉलिसी विचाराधीन है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान पी०एम०-कुसुम योजना- सिंचन क्षमता के वृद्धि हेतु सुगम एवं कृषि लागत के दृष्टिगत सस्ता साधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से (02 एच०पी० से 10 एव०पी०तक) 45-60 प्रतिशत अनुदान पर यह योजना संचालित है। सोलर पम्प की स्थापना से सिंचाई लागत को कम करना। उ0प्र0 मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम- मिलेट्स शुष्क क्षेत्रों और कम उपजाऊ भूमि में भी अच्छी उपज देते हैं। सूखा सहन करने की क्षमता होती है। इनमें बीज, उर्वरक कीटनाशक, सिंचाई आदि कृषि निवेश लागत कम करने से किसानों को कम लागत में अधिक लाभ मिलता है। मिलेट्स साठ से नब्बे दिवस में तैयार होने वाली फसल होती है, जिससे एक वर्ष में अधिक फसलें ले सकता है। मिलेट्स कीट एवं रोग प्रतिरोधी फसलें है, जिससे इनमें कीट एवं रोग व्याधि कम लगने से किसानों की लागत कम हो जाती है। योजनान्तर्गत मिनी किट का वितरण। आज़मगढ़ – उद्योग की जी.डी.पी. में भूमिका प्रगति एवं उपलब्धियाँ- उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार की योजनाएं- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना, एक जनपद एक उत्पाद वित्त पोषण सहायता योजना, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट- ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 में 223 निवेशकों से प्राप्त विभिन्न निवेश प्रस्तावों का एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित है। इनमें से 65 इकाइयां कार्यरत हो चुकी हैं तथा 9 इकाइयां निर्माणाधीन हैं। कुल संचालन उपलब्धिः 88.00 प्रतिशत (आपरेशनल/जीबीसी रेडी), निवेश मित्र पोर्टल के माध्यम से उद्यमियों को त्वरित एन.ओ.सी./लाइसेंस दिए जा रहे हैं, जिससे उद्यमियों को इज ऑफ़ डूइंग बिजनेस में जनपद में बढ़ावा मिल रहा है। गन्ना की जी०डी०पी० में भूमिका- प्राथमिक क्षेत्र में गन्ना की भूमिका जिला सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण है। ग्रामिण क्षेत्रों में नकदी प्रवाह बनाये रखने में गन्ना सबसे महत्वपूर्ण फसल है। रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था। गन्ने से बनने वाला एथेनाल को प्रेट्रोल में मिलाया जा रहा है (ई10-ई20 नीति), इससे तेल आयात घटता है, विदेशी मुद्रा बचती है, किसानों की आय बढ़ती है। गन्ना से चीनी, गुड़, एथेनाल, सीरा, बिजली (कोजनरेशन), पेसमड आदि उत्पाद प्राप्त होते है। गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की योजनाएं- जिला योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, पीएम कृषि सिंचाई योजना। ओ.टी.डी. का लक्ष्य प्राप्त करने हेतु विभाग की कार्ययोजना- गन्ना फसल की तकनीकि में उन्नत प्रजाति का विकास गन्ना शोध फार्म-शाहजहाँपुर, सेवरही, लक्ष्मीपुर, आई. आई. एस. आर. लखनऊ। भार्करा प्रौद्योगिकी, चीनी गुणवत्ता, एथेनाल/जैव ईधन तकनीक राष्ट्रीय भार्करा संस्थान कानपुर द्वारा दिया जा रहा है। कृषक गोष्ठी का आयोजन कर कृषकों को गन्ना फसल उत्पादन हेतु प्रेरित किया जाता है। उद्यान की जी०डी०पी० में भूमिका- प्राथमिक क्षेत्र में उद्यान की भूमिका जिला सकल घरेलू उत्पाद उद्यान एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में हिस्सेदारी। उद्यान क्षेत्र का देश की जी०डी०पी० में योगदान, उद्यान क्षेत्र का राज्य की जी०डी०पी० में, औद्यानिकी क्षेत्र में योगदान एवं अन्य। उद्यान को बढ़ावा देने के लिये सरकार की योजनाएँ। एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना। पर ड्रॉप मोर क्रॉपश्- माइक्रोइरीगेशन योजना। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना। कृषक जागरूकता/प्रशिक्षण- पर ब्लाक वन क्रॉप कार्यक्रम द्वारा विकासखण्डों में प्रचार-प्रसार, एम०आई०डी०एच० में कृषि विज्ञान केन्द्रों पर कृषक प्रशिक्षण कार्य एवं भ्रमण कार्यक्रम, योजना का गोष्ठी, प्रचार-प्रसार, जी०आई० टैग हेतु पान एवं भरवा मिर्च को प्रोत्साहन।
