पुस्तक समीक्षा -निश्छल प्रेम की अनुपमेय अभिव्यक्ति है -एक और राधा -राजीव कुमार ओझा
1 min read
अहिन्दी भाषी उड़ीसा के संस्कार इंटरनेशनल स्कूल बरगढ़ में हिन्दी विभागाध्यक्ष रेणु अग्रवाल की काव्य वाटिका में अब तक तीन खूबसूरत काव्य पुष्प खिले हैं
(01 )एक और राधा (02 )रेगिस्तान में नागफनी (03 ) महुआ महकेला (भोजपुरी गीत संग्रह )। एक और राधा बहुमुखी प्रतिभा की धनी रेणु अग्रवाल की प्रथम काव्य कृति है। बुक्स क्लिनिक से प्रकाशित इस काव्य संग्रह में 101 कविताएं शामिल हैं। इस काव्य संग्रह में राधा कृष्ण के निश्छल प्रेम के विविध पक्षों की काव्यात्मक अभिव्यक्ति भी है,सामाजिक सन्दर्भों को रेखांकित करती कविताएं भी हैं ,श्रृंगार रस की उत्कृष्ट कविताएं भी हैं,नारी स्वाभिमान ,नारी मन की व्यथा को रेखांकित करती कविताएं भी हैं, विरह की दिल को छू जाने वाली हृदयस्पर्शी कविताएं भी हैं।
कवि/कवयित्री की जिंदगी,किरदार और समाज और समसामयिक सन्दर्भों पर कवि/कवयित्री के दृष्टिकोण ,विचार,चिंतनधारा की काव्यात्मक अभिवक्ति होती है कविता। इस काव्य संग्रह को मैंने एकाग्रचित्त होकर पढ़ने के बाद मैंने पाया की रेणु अग्रवाल का यह काव्य संग्रह जिस राधा पर केंद्रित है उस राधा के किरदार को कवयित्री ने बहुत मनोयोग से पढ़ा है,राधा के किरदार को जीया है। इसकी तस्दीक एक और राधा के किरदार के मनोभावों को काव्य मनिका में पिरोई गई कविताएं करती हैं।कहीं स्व संवाद करती ,कहीं कृष्ण को उलाहना देती राधा की काव्यात्मक अभिव्यक्ति पाठक के मानस पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ेगी।
इस काव्य संग्रह की व्याकुल मन शीर्षक कविता में कृष्ण प्रिया राधा के मनोभावों की अभिव्यक्ति पाठकों को कवयित्री के वैदुष्य से परिचित कराती है –
तो सुनो मोहन !
राधा हूँ मैं शाश्वत प्रेम की धारा
फूटती हूँ तुमसे ही
होती हूँ सदा प्रवाहित
तुम्हारी ही ओर
अंत में हो जाता है विलीन
मेरा अस्तित्व तुम्हारे ही भीतर
विडम्बना शीर्षक कविता में राधा के मन की व्यथा को कवयित्री ने आवाज दी है –
प्रश्न जो मन में आया है
सोलह हजार रानियों को
जिसने महल में बसाया है।
उस निर्मोही ने क्यों
राधा को नहीं अपनाया है।।
विभेद शीर्षक कविता में कवयित्री ने राधा के साथ हुए छल को सधे अंदाज में लिपिबद्ध किया है –
राधा रानी तुझमे समाई
शिरोमणि रुक्मणि हुई
किया राधा ने विरह श्रृंगार
कृष्ण वधू रुक्मणि हुई
कहाँ है राधा बोलो श्याम
जीवन तो रुक्मणि हुई
छल गया प्रेम राधा को
छलिया वधु रुक्मणि हुई
नारी माहात्म्य को कवयित्री ने मैं नारी हूँ शीर्षक में जिस अंदाज में रेखांकित किया है उसे कवयित्री का गागर में सागर भरने का हुनर मानता हूँ –
मैं नारी हूँ!
सत्य की मैं प्रतिपालक
जीवन की हूँ संचालक।।
असभ्यता पर प्रहारक
असत्य की मैं विनाशक ।।
मैं नारी हूँ!
पथ प्रदर्शिका मैं समाज की
आधुनिक हूँ नारी आज की ।।
अमर्यादित नहीं रहूँगी
करूंगी रक्षा लोक लाज की ।।
स्त्री -पुरुष के किरदार को व्याख्यायित करती मंदाकिनी शीर्षक कविता में कवयित्री का सवाल देखें –
हे महामानव पुरुष !
क्यों मापना चाहते हो
स्त्री के मन की गहराई ?
क्या तुम माप सकते हो
जिसमे सम्पूर्ण सृष्टि है समाई ?
अरे स्वयं ईश्वर भी कहते हैं माँ
असीमित सहनशक्ति की परिचायक जननी
स्नेह भाव से पूरित भगिनी
ले बारम्बार शक्ति अवतार
स्त्री का जीवन शीर्षक कविता भी स्त्री माहात्म्य को रेखांकित करती है –
स्त्री का जीवन
कड़कड़ाती धुप ,ममता का रूप
धुप में छाँव ,मझधार में नाव
शीत में अलाव ,जीवन का ठाँव
इस काव्य संग्रह में प्रिय की खोज शीर्षक कविता श्रृंगार रस की एक बेहतरीन रचना कविता है-
रजतध्वला ये चन्द्रबदन
नागिन से ये केश
अधरों पर है लालिमा
मदमाता ये वेश
नैनों में तीखे वाण लिये
खोज रही हो किसे प्रिये ?
जनक सुता वैदेही के अंतर्मन की पीड़ा को कवयित्री साहस के साथ रेखांकित किया है। वेदना वैदेही की शीर्षक कविता में कवयित्री वैदेही के अंतर्मन की पीड़ा को इन पंक्तियों में अभिव्यक्ति प्रदान की है –
अपहृत हुई छल से ,पिंजर बनी स्वर्ण लंका
माना जग को नहीं था ज्ञात ,
पर क्या तुम भी थे अज्ञात ?
क्यों की मेरे चरित्र पर शंका?
बिना जाने मेरी इच्छा ,मांग ली अग्नि परिक्षा ?
दे दिया अधिकार क्यों दूजों को
करें वो मेरी पवित्रता की परीक्षा ?
पुस्तक समीक्षा क्रम में रेणु अग्रवाल का काव्य संग्रह एक और राधा ने मुझे इस लिए अचंभित भी किया ,आह्लादित भी क्योंकि यह कवयित्री का काव्य पथ पर पहला कदम है। शब्द शिल्प ,सहज -सरल ,सरस ,बोधगम्य भाषा ,कथ्य ,अभिव्यक्ति ,सम्प्रेषण की कसौटी पर खरी यह काव्य कृति पठनीय भी है ,संग्रहणीय भी।टंकण की त्रुटियाँ भी बहुत खुर्दबीनी नजर से तलाशने पर नगण्य हैं। पथिक का पहला कदम उसकी मंजिल का संकेतक होता है ,काव्य सृजन के चुनौती भरे पथ पर कवयित्री रेणु अग्रवाल का पहला कदम बताता है की साहित्य की अनंत संभावनाएं उनके किरदार में समाहित हैं। मैं आश्वस्त हूँ एक और राधा पाठकों द्वारा सराही जाएगी ,साहित्य जगत में इस कृति की सकारात्मक चर्चा होगी।
