Latest News

The News Complete in Website

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बोले- शंकराचार्य जैसी संस्था को समाप्त करने का रचा जा रहा इतना बड़ा षड्यंत्र

1 min read

वाराणसी। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि शंकराचार्य जैसी संस्था को समाप्त करने का इतना बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है। यह मामला भारत के दुर्लभतम मामलों में प्रवेश कर रहा है। इस पर पूरे देश को ध्यान देने की जरूरत है। अगर मुझ पर लगाए गए आरोप साबित होते हैं तो फिर शंकराचार्य को इतना बड़ा दंड देना चाहिए जिसे सदियों तक याद रखा जाए। लेकिन अगर आरोप साबित नहीं होते हैं तो शिकायतकर्ता के लिए भी वैसा ही दंड होना चाहिए। ये बातें मंगलवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पत्रकारों से कहीं। उन्होंने कहा कि यह कोई ऐसा मामला नहीं है कि कोई भी आया और शिकायत करके निकल गया। शंकराचार्य ने एक फोटो दिखाते हुए कहा कि इनका नाम अजय पाल शर्मा है। इस समय इनके अधीन ही जांच चल रही है। इनके साथ दिख रहा व्यक्ति शिकायतकर्ता हिस्ट्रीशीटर है और वह पुलिस के बड़े अफसर के साथ केक काटकर बर्थडे मना रहा है। हमें यह तस्वीर कुछ लोगों ने भेजी है और अब लोग ही कह रहे हैं कि जब जांचकर्ता और शिकायतकर्ता एक साथ केक काटते दिखाई दे रहे हैं तो क्या जांच होगी। जब यह पहले से ही मिले हैं इनसे न्याय की क्या उम्मीद कर सकते हैं। शिकायतकर्ता बच्चों के बारे में शंकराचार्य ने कहा कि सबसे बड़ी बात उन बच्चों से हमारा क्या कनेक्शन, जो बच्चे कभी हमारे सामने नहीं आए जिन्हें मैं जानता नहीं हूं। एक सवाल के जवाब में कहा कि अधिवक्ताओं का पैनल बना दिया है वह कोर्ट में अपनी बात रख रहे हैं। कहा कि अभी तक कोई जांच एजेंसी उनसे पूछताछ करने नहीं आई है।

उघरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू

शंकराचार्य ने रामचरित मानस के बालकांड की चौपाई उघरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू का जिक्र करते हुए कहा कि यह बताती है कि कपट या ढोंग का अंत निश्चित है। पाखंडी का भेष (वेश) ज्यादा दिनों तक नहीं चलता और अंत में सच्चाई सामने आ ही जाती है, जैसे कालनेमि, रावण और राहु के कपट का अंत हुआ था। झूठ बोलने वालों की कलही भी ऐसे ही खुलेगी।

शंकराचार्य ने एक सवाल के जवाब में व्यंग्य करते हुए कहा कि क्या ये देश प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति का नहीं है, उन्हें नहीं पता कि उनके देश का शंकराचार्य दुराचारी हो गया। दूसरा प्रश्न यह कि शंकराचार्य जैसे निष्कलंक व्यक्ति पर कहानी बनाकर यह सब बातें कहना, क्या यह वह समझ नहीं रहे हैं।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *