आजमगढ़ : डॉ. कन्हैया सिंह की द्वितीय पुण्यतिथि पर कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन, उमड़ा जनसैलाब, राष्ट्रीय कवियों ने काव्यांजलि से दी श्रद्धांजलि
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आजमगढ़। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कन्हैया सिंह की द्वितीय पुण्यतिथि पर आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में जनमानस का सैलाब उमड़ पड़ा। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से दिवंगत साहित्यकार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा का संचालन करते हुए डॉ. विनम्रसेन ने भावपूर्ण पंक्तियों — “बन्द आँखों से आप आज मुझे रोज दिख जाते हैं, आज भी बाबा रोज बहुत याद आते हैं” — से वातावरण को भावुक कर दिया। दिल्ली से आए अभिसार शुक्ल ‘गीता’ ने “शूलों का दुर्भाग्य अमरता, पुष्पों को झड़ना पड़ता है, अर्जुन सबको अपना-अपना धर्मयुद्ध लड़ना पड़ता है” सुनाकर साहित्यकार के जीवन संघर्ष को स्वर दिया। लखनऊ से आए अभय ‘निर्भीक’ ने “गांवों की गलियां व्याकुल हो, सोन चिरैया ढूंढ रही हैं, आजमगढ़ की आंखें अपना, सिंह कन्हैया ढूंढ रही हैं” के माध्यम से साहित्य जगत की क्षति का मार्मिक चित्र खींचा। इंदौर के अमन ‘अक्षर’ ने बुजुर्गों के सम्मान पर केंद्रित अपनी रचना से समाज को आत्ममंथन का संदेश दिया। दिल्ली की युवा कवयित्री मनु ‘वैशाली’ ने गांवों के महत्व और राधा-कृष्ण के अमर प्रेम पर आधारित कविताएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। युवा कवि संक्षेप ‘अक्षत’ ने “लोकवचन का मूल्य बचाते, मर्यादित अलबेले हैं, क्या रामराज्य के हर निर्णय में दोषी राम अकेले हैं” सुनाकर व्यवस्था पर सार्थक प्रश्न खड़े किए। कार्यक्रम के अंतिम सत्र में पहुंचे उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री दानिश आज़ाद अंसारी को डॉ. सिंह के परिजनों, अखिलेश मिश्र ‘गुड्डू’ एवं भाजपा जिलाध्यक्ष ध्रुव सिंह द्वारा सम्मानित किया गया। कवि सम्मेलन में लक्ष्मण मौर्य, आरपी राय, पूर्व सांसद संतोष सिंह, सत्येन्द्र राय, डॉ. अशोक सिंह, डॉ. भक्तवत्सल, डॉ. अनुतोष वत्सल, डॉ. अनीता सिंह, प्रवीण सिंह, विनीत सिंह सोनू, निवेदिता सिंह, ज्योतिप्रिया सिंह, लेफ्टिनेंट डॉ. पंकज सिंह, डॉ. अवनीश राय, आशुतोष रूंगटा, प्रमोद सिंह सहित एनसीसी एवं एनएसएस के कैडेट्स और अन्य गणमान्यजन अंत तक उपस्थित रहकर कविताओं का आनंद लेते रहे। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प भी दोहराया गया।
